टूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं ये पूर्व विधायक, सरकार ने नहीं दी पेंशन, एक वक्त की रोटी है मुश्किल

अहमदाबाद, 24 जून: आमतौर पर देश में विधायक या सांसद अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन समेत कई भत्तों के हकदार होते हैं। उन्हें रिटायरमेंट के तौर पर कई सुविधाएँ मिलती हैं। लेकिन गुजरात के एक पूर्व विधायक जेठाभाई राठौड़ को कार्यकाल पूरा करने के बाद ना तो पेंशन मिली और ना ही अन्य भत्ते। तंगी का आलम यह है कि, पूर्व विधायक को बीपीएल कार्ड से मिल रहे अनाज से अपना गुजारा करना पड़ रहा है। उन्‍हें कोर्ट के आदेश के बावजूद पेंशन नहीं मिली है।

कांग्रेस को हराकर निर्दलीय जीते थे जेठाभाई

कांग्रेस को हराकर निर्दलीय जीते थे जेठाभाई

गुजरात के साबरकांठा जिले के छोटे से गांव टेबड़ा के रहने वाले जेठाभाई राठौड़ ने 1967 में खेड़ब्रम्हा विधानसभा में कांग्रेस के सामने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 17,000 वोटों से जीत हासिल की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेठाभाई ने बताया कि एक समय वे साइकिल से चुनाव प्रचार करते थे और गांधीनगर भी सरकारी बस से ही जाया करते थे।

कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली पेंशन

कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली पेंशन

जेठाभाई बताते हैं कि, उन्‍होंने अपने क्षेत्र की जनता की पूरी सेवा की और सुख-दुख में उनके साथ रहे। सरकार ने उन्‍हें पेंशन नहीं दी।'वीटीवी गुजराती' के अनुसार जेठाभाई ने कई बार इसको लेकर आवेदन दिए और चक्‍कर काटे, परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद वे अपने इस मामले को लेकर कोर्ट पहुंचे। लंबे समय तक लड़ाई लड़ने के बाद कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था, इसके बाद भी आज तक पेंशन नहीं मिली।

बीपीएल कार्ड के सहारे कट रही है लाइफ

बीपीएल कार्ड के सहारे कट रही है लाइफ

जेठाभाई के पांच बेटे हैं। पूरा परिवार मेहनत-मजदूरी कर अपना परिवार चला रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जेठाभाई किसी तरह जीवन यापन कर पा रहे हैं। उन्‍हें उनकी पेंशन नहीं मिल सकी है, जबकि वे इसके हकदार हैं।जेठाभाई राठौड़ का पूरा परिवार बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) राशन कार्ड के सहारे अपना जीवन यापन करने मजबूर हैं। वे इसके हकदार हैं। उनकी दयनीय स्थिति को देखते हुए सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए।

इलाज के लिए पैसे तक नहीं हैं पूर्व विधायक के पास

इलाज के लिए पैसे तक नहीं हैं पूर्व विधायक के पास

जेठाभाई के परिजनों का कहना है कि स्‍वास्‍थ्‍य खराब होने की स्थिति में सही इलाज नहीं करा पाते हैं और इस गांव में उनके लिए ठीक जगह भी नहीं है। अब जेठाभाई के परिवार और गांववालों ने सरकार से उनकी मदद के लिए अपील की है।

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