PM मोदी के गृहनगर में खुदाई से 2 हजार साल पुराने बौद्ध कक्ष मिले, बर्तन-गहने और औजार भी निकले
महेसाणा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहनगर वडनगर में खुदाई के दौरान 2 हजार साल पुराने दो बौद्ध कक्ष मिले हैं। इनकी दो मीटर ऊंची और 1 मीटर चौड़ी चार दीवारें भी मिली हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने यहां बौद्ध विहार होने का अनुमान लगाया है। इससे पहले हाल ही में तीसरी व चौथी सदी के बौद्ध स्तूप के अवशेष और सातवीं-आठवीं सदी का एक मानव कंकाल भी मिला था।
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वडनगर गुजरात के महेसाणा जिले में पड़ता है। यहां इन दिनों पुरातत्व की खुदाई चल रही है। इसी खुदाई में सैकड़ों बरसों पुरानी चीजें सामने आ रही हैं। खुदाई के दौरान तीसरी व चौथी सदी के समय का सांकेतिक बौद्ध स्तूप भी मिला था। फिलहाल, लॉकडाउन के दौरान भी सारेगामा सर्कल में रेलवे फाटक के पास खुदाई चल रही है।
गुजरात के प्राचीनों में से वडनगर एक है। यह वही नगर है, जहां बचपन में मोदी चाय बेचा करते थे। ऐसा कहा जाता है कि, इसका इतिहास करीब 2500 साल पुराना है। कुछ पुरातत्ववेत्ताओं के मुताबिक, हजारों साल पहले भी यहां खेती होती थी। खुदाई के दौरान यहां से हजारों साल पहले के मिट्टी के बर्तन, गहने और तरह-तरह के औजार-हथियार भी मिल चुके हैं।

पुरातत्ववेत्ता मानते हैं कि, यह हड़प्पा सभ्यता के पुरातत्व स्थलों में से एक है। बता दें कि, हड़प्पा सभ्यता भारत की सबसे प्राचीनतम सभ्यता मानी जाती है। 16वीं सदी में जब से पश्चिमी देशों के लोग भारत आए, तो वे यहां की संपदा का इस्तेमाल करने लगे। अंग्रेजों ने यहां भी रेल की पटरियां बिछाईं। कुछ रिकॉर्ड बताते हैं कि, संवत 1943 (साल 1887) में महेसाणा और रंदाला, विसनगर, वडनगर के बीच रेलवे लाइन बिछाई गई। उसके बाद ट्रेनें चलने लगीं।












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