चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर गुजरात तक आ पहुंचा, सीमा पार खुदी खदानें, बन रही ऐसी सड़क
कच्छ। एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन पाकिस्तान में एक इकोनॉमिक कॉरिडोर तैयार कर रहा है। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर कच्छ (गुजरात) बॉर्डर तक आ पहुंचा है। बॉर्डर के पास पाकिस्तान में चीनी कंपनियां खदान, पावर प्लांट और सड़क बना रही हैं। गुजरात के कच्छ से लगे पाकिस्तानी शहर इस्लामकोट की मुख्य सड़क पर लगे साइन बोर्ड पर पाकिस्तान और चीन के झंडे देखे गए हैं। कच्छ से लगे सरहदी इलाके में पाकिस्तान द्वारा चीनी कंपनियों को जमीन के पट्टे दिए जा रहे हैं। जहां कंपनियां सड़क निर्माण के अलावा खनन और पावर प्लांट लगाने का काम कर रही हैं।

इकोनॉमिक कॉरिडोर गुजरात के नजदीक से गुजरा
चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को भारतीय रक्षा विशेषज्ञ चिंता का विषय बता चुके हैं। इसी कॉरिडोर के चलते चीन की भारतीय समुद्री इलाके पर सीधी पहुंच हो गई है। क्योंकि, चीन ने उत्तर में पीओके से भी हाईवे निकलवाया है और अब यह कॉरिडोर कच्छ (गुजरात) बॉर्डर तक आ पहुंचा है। चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर की समाप्ति कच्छ से लगी पाकिस्तानी बार्डर पर ही खत्म होती है। एक रिपोर्ट में बताया गया कि, पाकिस्तान ने कराची के पास स्थित दो पोर्ट विकसित करने की जिम्मेदारी भी चीनी कंपनियों को सौंप रखी है।

नगरपारकर के पहाड़ों पर भी चीन की नजर
चीन की नजर पाकिस्तान के नगरपारकर के पहाड़ों पर भी है। यह भारतीय सुरक्षा के लिहाज से परेशानी बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है, क्योंकि वहां तरह-तरह के इक्विप्मेंट स्थापित किए जा सकते हैं। गौरतलब है कि, पाकिस्तान का इस्लामकोट शहर कच्छ की सरहद से मात्र 50 किमी दूर उत्तर दिशा में है। चीन-पाकिस्तान का इकोनॉमिक कॉरिडोर नजदीक से ही गुजर रहा है।

खनन के लिए बड़ा हिस्सा चीनी कंपनियों को
कच्छ से लगी पूर्वी सरहद पर नगरपारकर तहसील है। यहां कई प्राचीन हिंदू और जैन मंदिर होने के कारण से कारोंजर पर्वत को पाकिस्तान सरकार वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनाना चाहती है। इस पहाड़ में खनिज का भी भंडार होने के कारण चीन भी अपनी नजरें गाड़े हुए है। जमीन का बड़ा हिस्सा खनन के लिए चीन की कंपनियों को सौंपे जाने की बातें स्थानीय लोगों द्वारा की जाती रही हैं।













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