गुजरात: बिलकिस बानो गैंगरेप के दोषी गांव छोड़कर भागे, परिजन बोले- डर से हाल बेहाल, खाने के लाले पड़े

दाहोद। गुजरात में बिलकिस बानो दुष्‍कर्म एवं हत्‍या मामलों के दोषी जेल से रिहा होने के बाद से ही सवालों के घेरे में हैं। उम्रकैद की सजा होने पर भी जेल प्रशासन ने उन्‍हें रिहा कर दिया था। इन दोषियों की संख्‍या 11 है, और जिस गांव के वे रहने वाले हैं...वहां भी उन्‍हीं की चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर उन्‍हें फांसी दिए जाने की मांग की जा रही है। और, अब खबर है कि, वे अपना घर छोड़कर कहीं भाग गए हैं। इसकी वजह उनके मन में बैठा डर है, उन्‍हें लगता है कि उन्‍हें छोड़ा नहीं जाएगा, उनके साथ कुछ भी हो सकता है।

बिलकिस बानो कांड के 11 दोषी गांव छोड़कर भाग चुके

बिलकिस बानो कांड के 11 दोषी गांव छोड़कर भाग चुके

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, दाहोद जिले के रंधिकपुर गांव में दोषियों के परिवार के सदस्यों से बात की गई तो उनके परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि उन्हें झूठे मामलों की धमकी दी गई थी। दोषियों में से एक की पत्नी ने कहा- "हम डर में जी रहे हैं।," वहीं, दोषियों के पड़ोसियों में भी चिंता है कि कहीं उन पर कोई मुसीबत न आ जाए। शैलेश भट्ट और मितेश भट्ट नाम के दोषियों के घर के दरवाजे बंद पड़े हैं। 63 वर्षीय शैलेश भट्ट वही हैं, जिन्‍होंने दावा किया था कि जब वह बिलकिस बानो मामले में गिरफ्तार हुए थे, तब वह सत्तारूढ़ भाजपा के एक स्थानीय पदाधिकारी थे। पड़ोसियों ने कहा कि शैलेश भट्ट और मितेश भट्ट शायद ही घर पर हों। पड़ोसियों ने कहा कि, वे दोनों लोग 15 अगस्त को जेल से रिहा होने के बाद से "बाहर" हैं।

गांव छोड़ भागे दोषियों के परिजन भी भय के साऐ में

गांव छोड़ भागे दोषियों के परिजन भी भय के साऐ में

ऐसी ही कहानी दोषी राधेश्याम शाह के घर पर भी खेली गई, जिस पर भी ताला लगा था। भट्ट के घर से महज 50 मीटर की दूरी पर बाकाभाई के घर में उनकी पत्नी मांगलीबेन और बच्चे रह गए हैं। घर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है और परिवार का कहना है कि उनके पास एक दिन में तीन समय के भोजन के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। वे पास के एक खेत में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करके अपना गुजारा करते हैं।
मांगलीबेन ने कहा, "जब से मेरे पति जेल से बाहर आए हैं, वे लोग (मुस्लिम समुदाय) उनके और अन्य लोगों के पीछे पड़े है।"
मांगलीबेन बोली, "अगर वे बाजार जाते या घर के बाहर भी बैठते हैं, तो मुस्लिम हमारी तस्वीरें क्लिक करते हैं और वीडियो बनाते हैं। उन्होंने हमें धमकी भी दी कि वे हमारे लोगों को बलात्कार, छेड़छाड़ और रोड रेज के झूठे मामलों में फंसाएंगे।"

महिला ने कहा, 'पति और अन्य ने डर के मारे गांव छोड़ दिया'

महिला ने कहा, 'पति और अन्य ने डर के मारे गांव छोड़ दिया'

मांगलीबेन ने दावा किया कि उत्पीड़न और प्रतिशोध के डर से तंग आकर, उसके पति बकाभाई और अन्य दोषियों ने गांव छोड़ दिया और अब यात्रा करने वालों की तरह घूम रहे हैं। महिला ने कहा, "दूसरे समुदाय के लोग यहां हैं और अपना दैनिक व्यवसाय कर रहे हैं लेकिन हम डर में जी रहे हैं और बाहर नहीं जा सकते। वे कहते हैं कि हमारे आदमियों को फिर से जेल भेज दो नहीं तो वे हमारे आदमियों को झूठे मुकदमे में फंसा देंगे। वे हमें डराते हैं और हमें उनसे डरना होगा। और, इसी डर से वे सभी 11 लोग डर के मारे गांव छोड़कर चले गए हैं।"

'हमें तो 3 वक्‍त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा'

'हमें तो 3 वक्‍त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा'

मांगलीबेन ने उन खबरों का भी खंडन किया कि दोषियों की रिहाई पर, गांव के कुछ लोगों ने जुलूस निकाला, संगीत बजाया और पटाखे फोड़ दिए। उनकी दुर्दशा के बारे में स्पष्ट रूप से भावुक मांगलीबेन ने कहा, "जेल से मुक्त होने के बाद भी, बहुत डर है। हम बहुत गरीब लोग हैं। हम मुश्किल से 100 रुपये प्रतिदिन कमाते हैं। कभी-कभी यह भी मुश्किल होता है। किसी दिन हम रिश्तेदारों के पास जा सकते हैं। ' खाने के लिए उनका घर है, लेकिन कोई हमें रोज नहीं खिलाएगा। किसी से कोई मदद नहीं मिलेगी।"

'हमें छोड़कर हर कोई चैन से जी रहा है'

'हमें छोड़कर हर कोई चैन से जी रहा है'

मांगलीबेन ने कहा कि, हमारे ही गांव में कई खेतों पर मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। हालांकि, गांव में कोई "सांप्रदायिक" माहौल व्‍याप्‍त नहीं है और हमें छोड़कर हर कोई शांति से रह रहा है। मुश्किल तो हमारी बढ़ी हुई है, हमें काम मिलना बंद हो गया है। एक स्थानीय चिकित्सक, नीलेश बामनिया ने मांगलीबेन की हां में हां मिलाते हुए कहा कि गांव में शांति थी और दोषियों के स्वागत के लिए कोई जुलूस नहीं निकाला गया था। नीलेश ने कहा, "रंधिकपुर गाँव में शांति है। हम केवल अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय समाचारों में नकारात्मक बातें सुनते हैं। ये 11 लोग जो अपने-अपने घर आए, इनके बारे में हमें मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से ही पता चला। मेरा घर मुख्य सड़क पर है, अगर कोई जुलूस या डीजे होता, तो हमें भी पता चल जाता, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।'

स्‍थानीय लोग कह रहे- कोई डीजे नहीं बजा था

स्‍थानीय लोग कह रहे- कोई डीजे नहीं बजा था

बामनिया ने यह भी कहा कि, इन लोगों को डर के कारण बाहर निकाला गया और इनके परिवार गरीबी में जी रहे हैं। बकौल बामनिया, "सभी 11 लोग बहुत गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं। वे उन घरों से हैं, जिनकी हालत खराब है। उन्हें डर था कि दूसरे समुदाय के लोग उन्हें झूठे मुकदमों में फंसा देंगे। जैसे अगर वे मिल जाएं, तो उन्‍हें धर लिया जाएगा और उन्हें झूठे मामलों में फंसा देंगे।"
दोषियों की रिहाई के मद्देनजर मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के गांव छोड़ने के बारे में पूछे जाने पर बामनिया ने कहा, "यह बिलकिस बानो के समर्थकों द्वारा फैलाया गया झूठ है। मैंने केवल गांवों से मुसलमानों के पलायन की खबरें सुनीं, जबकि वास्तव में वे सभी यहां हैं और व्यापार कर रहे हैं।"

घटना के वक्‍त प्रेग्‍नेंट थी बिलकिस बानो

घटना के वक्‍त प्रेग्‍नेंट थी बिलकिस बानो

बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्‍कर्म की घटना 2002 के गुजरात दंगों के समय की है। उस समय बिलकिस बानो प्रेग्‍नेंट थी। दंगों में हिंदू-मुस्लिमों की भीड़ एक-दूजे को निशाना बना रही थी। उस दरम्‍यान कुछ लोगों ने बिलकिस बानो के घर को निशाना बनाया था। कई लोगों ने उससे क्रूरतापूर्व उससे सामूहिक बलात्कार किया था। वहीं, उसके परिजनों की हत्या कर दी थी। बाद में अदालत ने दोषी पाए गए 11 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब उन्‍हीं 11 लोगों की रिहाई पिछले महीने हुई है।

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