गुजरात की अलीशा को जारी हुआ पहला ट्रांसजेंडर कार्ड, 4 दशक से कर रही थीं संघर्ष
अहमदाबाद, 25 जुलाई: हाल ही में गुजरात सरकार ने ट्रांसजेंडर के लिए नए नियम बनाए थे, जिसके तहत पहली महिला को ट्रांसजेंडर पहचान पत्र दिया गया। जिनकी पहचान अलीशा पटेल के रूप में हुई है। वो चार दशकों से आंतरिक उथल-पुथल का सामना कर रही थीं, लेकिन अब गुजरात सरकार ने उनको उनका हक दे दिया। जिस पर अलीशा के अलावा अन्य ट्रांसजेंडर्स ने खुशी जाहिर की है। साथ ही उम्मीद जताई कि अब वो भी समाज में आम लोगों की तरह जीवनयापन कर पाएंगी।
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न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अलीशा ने कहा कि जेंडर डिस्फोरिया का अनुभव होने के बाद उनको लिंग परिवर्तन करवाने में तीन साल का वक्त लगा। इसके अलावा उन्होंने 8 लाख से ज्यादा रुपये खर्च किए। अब वो इस बात से खुश हैं कि एक महिला के रूप में जीवन बिता सकती हैं। हालांकि अलीशा को स्कूल से लेकर ऑफिस तक हर जगह पर भेदभाव का सामना करना पड़ा था। उन दिनों को याद कर वो आज भी भावुक हो जाती हैं, लेकिन अब अलीशा सरकार की शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने उनको नई पहचान दी।
अपनी निजी जिंदगी पर उन्होंने कहा कि वो मैं 12 साल की थी, तो मुझे लगा कि मैं अंदर से एक लड़का नहीं, बल्कि लड़की हूं। इसके बाद उनके साथ भेदभाव का सिलसिला शुरू हुआ, जो सालों तक चलता रहा। हालांकि उनके परिवार ने बिना किसी आपत्ति के उनका पूरा साथ दिया। शुरुआत में बहुत से लोगों को कुछ आशंकाएं थीं, लेकिन उन्होंने सारी मुश्किलों को आसानी से पार कर लिया। बाद में तीन साल की मेहनत और लाखों के खर्च के बाद वो लिंग परिवर्तन करवाने में सफल रहीं। अब बतौर महिला वो खुशी से जीवन यापन कर रही हैं।












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