Gorakhpur News: MMMUT में होगा भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन
Gorakhpur News: मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर तथा भारतीय शिक्षण मंडल - युवा आयाम, गोरक्ष प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में कल दिनांक 13.10.2023, रविवार को विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में प्रांत स्तरीय शोधार्थी सम्मेलन/ विविधा प्रमाण पत्र वितरण समारोह सहित 'भारतीय ज्ञान परंपरा का विकसित भारत में योगदान' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो पूनम टंडन उपस्थित रहेंगी, जबकि राष्ट्रीय संगोष्ठी के सारस्वत वक्ता के रूप में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी आर शंकरानन्द जी उपस्थित होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो जे पी सैनी जी करेंगे। जानकारी देते हुए एम एम एम यू टी के अधिष्ठाता शोध प्रो राकेश कुमार एवं भारतीय शिक्षण मंडल गोरक्ष प्रांत के युवा आयाम प्रमुख श्री जितेन्द्र मिश्र ने बताया कि संगोष्ठी के दौरान विभिन्न विषयों जैसे कि भारतीय ज्ञान परंपरा का इतिहास और समृद्धि, भारतीय ज्ञान प्रणाली की उपयोगिता, आधुनिक भारत में भारतीय ज्ञान की उपादेयता, वैश्विक स्तर पर भारतीय ज्ञान का प्रभाव, आधुनिक समस्याओं के समाधान में भारतीय ज्ञान की भूमिका, तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और विकसित भारत आदि विषयों पर मंथन होगा। उन्होंने बताया कि गत दिनों भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े 11 विषयों पर शोध पत्र आमंत्रित किए गए थे। तदक्रम में गोरक्ष प्रांत स्तर पर कुल 249 शोध पत्र प्राप्त हुए थे। प्रांत स्तर पर प्राप्त शोध पत्रों का 40 विषय विशेषज्ञों से मूल्यांकन कराया गया गया था। मूल्यांकन के उपरांत प्रांत स्तर पर कुल 49 उत्कृष्ट शोध पत्रों का चयन किया गया है जिन्हें भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा आयोजित किए जाने वाले आगामी सम्मेलन में प्रस्तुतिकरण का अवसर दिए जाने की योजना है।

साथ ही गोरक्ष प्रांत स्तर पर चयनित किए गए 49 शोध पत्रों में से 4 श्रेणियों क्रमशः स्नातक, परास्नातक, शोध छात्र, तथा 30 वर्ष से कम आयु के अन्य व्यक्तियों की श्रेणी में से प्रत्येक श्रेणी के तीन तीन श्रेष्ठ शोध पत्र लेखकों को एक दिवसीय संगोष्ठी के अवसर पर पुरस्कृत भी किया जाएगा। इसके साथ ही 13 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर शोध पत्रों का प्रांत स्तर पर मूल्यांकन करने वाले विद्वानों को भी सम्मानित किया जाएगा।












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