Teacher's Day: शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रेरणास्रोत हैं DDU University के यह प्रोफेसर, कर रहे यह पहल
Teacher's Day 2025 DDU University Professor Ajay Shukla News Hindi Uttar Pradesh: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने अपनी अकादमिक, शोध और सामाजिक उपलब्धियों से शिक्षा-जगत में विशेष पहचान बनाई है।
अकादमिक पृष्ठभूमि और अनुभव
1998 में अंग्रेज़ी विभाग से जुड़ने के बाद से वे लगातार 27 वर्षों से अध्यापन और शोध कार्य में सक्रिय हैं। पिछले 12 वर्षों से प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय जीवन, शिक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्वों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे अब तक 150 से अधिक व्याख्यान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं Faculty Induction Programmes में दे चुके हैं। साथ ही, वे कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की चयन समितियों में विषय विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएँ देते हैं।

शोध निर्देशन और उपलब्धियाँ
उनके निर्देशन में अब तक 34 शोधार्थि पंजीकृत हुए, जिनमें से 17 ने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है और शेष 17 प्रासंगिक विषयों जैसे रामचरितमानस, कबीर, जलवायु परिवर्तन, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर कार्यरत हैं। उनके मार्गदर्शन में शोध करने वाले विद्यार्थी आज विभिन्न महाविद्यालयों में सहायक आचार्य के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं।
प्रकाशित पुस्तक, शोध पत्रिका तथा पुस्तक अध्याय
इन्होंने ओरिएंट ब्लैकस्वान और मैकमिलन सहित कई प्रतिष्ठित प्रकाशकों से प्रकाशित 09 पुस्तकों का लेखन किया है, साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में हाई इंपैक्ट फैक्टर वाले शोध पत्रों का महत्वपूर्ण संकलन प्रस्तुत किया है। इन्होंने 13 पुस्तक अध्याय और 33 शोध पत्र( कुल 46 ) पीयर-रिव्यूड एवं यूजीसी केयर सूचीबद्ध पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं।

विद्यार्थियों की सफलता और मार्गदर्शन
* उनके नेतृत्व में रिकॉर्ड एक वर्ष में 64 से ज्यादा संख्या में छात्रों ने UGC-NET परीक्षा उत्तीर्ण की।
* मॉक इंटरव्यू सत्रों के परिणामस्वरूप दर्जनों विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में सफलता पाई।
• हाल ही में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में दर्जनभर से अधिक छात्रों का चयन उनके मार्गदर्शन से संभव हुआ।
• उन्होंने Doubt-Clearing Classes की विशेष परंपरा शुरू की, जिससे विद्यार्थियों की शंकाओं का निवारण नियमित रूप से होता है।
• साथ ही, उन्होंने Peer Teacher Concept की शुरुआत की, जिसमें विद्यार्थियों को शिक्षक की भूमिका में लाकर उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को विकसित किया गया।
शिक्षण दृष्टिकोण और NEP से सामंजस्य
प्रो. शुक्ल सदैव मानते हैं कि अच्छा आचार्य केवल ज्ञानदाता नहीं बल्कि प्रेरक और पथप्रदर्शक होता है। उनकी कक्षाएँ सदैव भरी रहती हैं, जहाँ वे प्रतिभा और तकनीक का संगम कराते हुए विद्यार्थियों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित करते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप उनका विशेष ध्यान विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और समग्र विकास पर रहा है।
पत्रिका और डिजिटल योगदानउनकी पहल पर साहित्य विमर्श पत्रिका की कुल 15 एडिशन पत्रिका प्रकाशित हुई, जिसमें लगभग 60 विद्यार्थियों को संपादक बनाया गया। यह अनूठा प्रयास विद्यार्थियों में नेतृत्व और लेखन कौशल को विकसित करता है।
साथ ही, उनका YouTube चैनल "English Literature Pathshala" विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक डिजिटल मंच है, जहाँ 175 से ज्यादा साहित्य और शोध से संबंधित वीडियो को लगातार साझा किया हैं।
नवाचार और Headship
अपने अध्यक्ष के कार्यकाल में उन्होंने "My Campus, My Pride, My Responsibility" जैसे अभियानों की शुरुआत की, जिसने छात्रों में जिम्मेदारी और अनुशासन का भाव जगाया।
* शोध फोरम का गठन शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए किया
- पीजी छात्रों के लिए PPT प्रस्तुतिकरण अनिवार्य किया गया
- *डिस्कोर्स" लिटरेरी क्लब का गठन साहित्यिक चर्चाएं, प्रतियोगिताएं आयोजित करने के लिए किया गया

संगोष्ठी, सम्मेलन एवं कोर्सों का आयोजन
- कई राष्ट्रीय/अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों के संयोजक रहे |
- प्रशिक्षण, शोध कार्यशालाएं, संवेदीकरण प्रोग्राम, मूल्यवर्द्धन पाठ्यक्रम आदि का सफल आयोजन किया
NSS और सामाजिक जीवन
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के समन्वयक के रूप में उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुए वे गोरखपुर नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर भी हैं। उनके मार्गदर्शन से गोरखपुर ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में देश में चौथा स्थान और उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
शैक्षणिक पत्रिकाएँ और बोर्ड सदस्यता
प्रो. शुक्ल प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के सलाहकार मंडल (Advisory Board) के सदस्य हैं, जिससे शिक्षा और शोध की गुणवत्ता में उनका प्रत्यक्ष योगदान है।
प्रो. अजय कुमार शुक्ल का जीवन यह संदेश देता है कि जब प्रतिभा (Talent) और तकनीक (Technology) साथ मिलते हैं, तो शिक्षा का स्तर नई ऊँचाइयों तक पहुँचता है। वे एक ऐसे आचार्य हैं जिनका उद्देश्य केवल ज्ञान का संचार नहीं बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी है।












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