Flashback 2022 : Education Hub के रुप में बनी गोरखपुर की पहचान

गोरखपुर में पिछले एक साल में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हुआ है। प्राथमिक से लेकर उच्च तक सभी में सुधार हुए हैं। पूर्वाचल व बिहार के युवाओं के लिए यह एक एजूकेशन हब के रुप में है।

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Flashback 2022 Gorakhpur: योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर में शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है।वर्तमान समय में गोरखपुर में चार विश्वविद्यालय शिक्षा का अलख जगा रहे हैं। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में व्यापक परिवर्तन हुआ है। चिकित्सा,प्रौद्योगिकी,आयुष,कला सभी वर्ग के छात्रों के लिए यहां पर्याप्त अवसर हैं। पिछले एक सालों में भी शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बड़े व्यापक परिवर्तन हुए हैं।

शिक्षा का बना हब
वर्तमान समय में गोरखपुर की पहचान शिक्षा के व्यापक केंद्र के रुप में होने लगी है। यहां स्थित एम्स,मेडिकल कॉलेज,डीडीयू विश्वविद्यालय,एमएमएम प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय,आयुष विश्वविद्यालय,गुरु गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय ने छात्रों के सामने शिक्षा के बेहतर विकल्प प्रस्तुत किए हैं। इसके साथ ही अभी वर्तमान समय में वेटनरी इंस्टीट्यूट,होटल प्रबंधन संस्थान,सैनिक स्कूल का काम चल रहा है।

प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर
प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर में है। अभी इसका कार्य तेजी से किया जा रहा है। मार्च 2023 तक इसके पूरा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यह भटहट ब्लॉक के पिपरी व तरकुलहा में 52 एकड़ भूमि में विस्तृत है। आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा के छात्रों के लिए यह बेहतर विकल्प है। प्रदेश के आयुष विधा के 98 कॉलेज इस विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं।

गोरखपुर एम्स
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर में इस वर्ष नर्सिंग में रुचि रखने वाले छात्रों का भी दाखिला लिया गया। 60 सीटों की काउंसिलिंग की गयी थी। चिकित्सा शिक्षा संस्थान में गोरखपुर में पहली बार नर्सिंग की पढ़ाई शुरू की गयी। इसके साथ ही एमबीबीएस की कक्षाएं नियमित चल रही हैं।

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद
गोरखपुर सहित पूरे पूर्वांचल में शिक्षा का व्यापक अलख जागाने वाले महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद में प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय तक शामिल हैं। वर्तमान में यह परिषद सीएम योगी के नेतृत्व में शिक्षा में व्यापक परिवर्तन ला रहा है। इसी साल दिसंबर माह में हुए परिषद के स्थापना दिवस में योग्य व मेधावी छात्रों को पुरस्कृत किया गया। 1932 में स्थापित यह परिषद लगतार छात्रों एक नई दिशा दे रहा है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय में शुरु हुए नए कोर्स
इस साल विश्वविद्यालय में कई नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत की गयी। इससे यहां संकायों की संख्या भी बढ़ गयी है। पहले विश्वविद्यालय में सात संकाय थे, अब संख्या बढ़ाकर 13 कर दी गई है।नई शिक्षा नीति के तहत कला संकाय को अब फैकेल्टी ऑफ आर्ट, ह्यूमिनिटी व सोशल साइंस कहा जा रहा है। विधि संकाय का नाम बदलकर फैकेल्टी ऑफ लीगल स्टडीज कर दिया गया है। कला संकाय के अंतर्गत आने वाले भाषा के सभी विभागों के लिए फैकेल्टी ऑफ लैंग्वेजेज नाम से अलग संकाय बनाया गया है। इन परिवर्तनों के साथ ही विश्वविद्यालय छात्रों को लगातार बेहतर शिक्षा दे रहा है। अभी हाल में यहां पुरातन छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया थे। जिसमें देश-विदेश में रहने वाले 15 हजार छात्रों ने हिस्सा लिया था।

इसी तरह बीआरडी मेडिकल कॉलेज चिकित्सा के क्षेत्र में तो मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय विज्ञान व तकनीकी के क्षेत्र में छात्रों को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं।

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