AIIMS गोरखपुर के अध्ययन से खुलासा - मोटापा और कुपोषण दोनों ही बुजुर्गों की याददाश्त को कर सकते हैं कमजोर
Gorakhpur AIIMS Latest News Hindi Uttar Pradesh: AIIMS गोरखपुर के डॉक्टरों ने एक बड़े और अहम अध्ययन में पाया है कि बुजुर्गों में कुपोषण (कम मांसपेशियां) और मोटापा (खासतौर पर पेट के आसपास की चर्बी) - दोनों ही उनकी याददाश्त, ध्यान और सोचने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
यह अध्ययन 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 1013 बुजुर्गों पर किया गया। सभी की मानसिक क्षमताओं की जांच खास ICMR-MUDRA टूलबॉक्स के जरिए की गई। डॉक्टरों ने पाया कि जिन बुजुर्गों की बांहें पतली थीं (MUAC कम था), उनमें याददाश्त और भाषा की क्षमता कमजोर मिली। वहीं, जिनके पेट और कमर के आसपास ज्यादा चर्बी थी (WHR अधिक था), उनमें ध्यान, सोचने की ताकत, भाषा और स्मृति - सभी में गिरावट देखी गई।

MUAC और WHR क्या होते हैं?
MUAC (Mid Upper Arm Circumference)**
इसका मतलब है - *बांह के बीच वाले हिस्से का घेरा।*
यह माप शरीर में मांसपेशियों की मात्रा का संकेत देता है। MUAC कम होना शरीर में कमजोरी या कुपोषण को दर्शाता है। यह माप कंधे और कोहनी के बीच की बांह के बीचों-बीच लिया जाता है।
WHR (Waist-Hip Ratio)
इसका मतलब है - *कमर और कुल्हे के घेरे का अनुपात।*
यह माप शरीर में पेट के आसपास जमा चर्बी (केन्द्रीय मोटापा) का पता लगाने में मदद करता है। कमर का घेरा नापकर उसे कुल्हे के घेरे से भाग दिया जाता है। WHR अधिक होना यह दर्शाता है कि व्यक्ति को भविष्य में शारीरिक और मानसिक बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।
*ये दोनों माप साधारण टेप (measuring tape) से आसानी से लिए जा सकते हैं और किसी मशीन की ज़रूरत नहीं होती।*
AIIMS गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा:
> "यह शोध बुजुर्गों की जिंदगी को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है। अगर हम ऐसे सरल और सस्ते उपायों को अपनाएं, तो हम समय रहते मानसिक समस्याओं को पहचान सकते हैं। AIIMS गोरखपुर इस तरह के समाज-हितैषी शोधों को हमेशा बढ़ावा देता रहेगा।"
अध्ययनकर्ता डॉ. यू. वेंकटेश ने बताया:
> "बुजुर्गों में पोषण और व्यायाम का बड़ा महत्व है। अगर हम समय पर कुपोषण या पेट की चर्बी को पहचान लें, तो बुढ़ापे में दिमागी कमजोरी को काफी हद तक रोका जा सकता है। MUAC और WHR जैसे उपाय गांवों में भी आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं।"
* बुजुर्गों की मानसिक सेहत के लिए पोषण और शरीर की बनावट दोनों जरूरी हैं।
* डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को चाहिए कि वे MUAC और WHR जैसे सरल तरीकों से बुजुर्गों की जांच करें।
* इससे समय रहते दिमागी गिरावट को रोका जा सकता है और बुजुर्गों की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है।
*AIIMS गोरखपुर का यह प्रयास न केवल एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि बुजुर्गों की बेहतर देखभाल की दिशा में एक ठोस कदम भी है।












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