Gita Press: क्यों होती हैं गीता प्रेस की किताबें सस्ती? 100 सालों में कभी नहीं किया क्वालिटी से समझौता
Gita Press: हिंदुस्तान में जितने भी घरों में हिंदू धार्मिक किताबें पढ़ी जाती हैं, वो सभी लोग गीता प्रेस से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। गीता प्रेस केवल एक पब्लिकेशन ग्रुप नहीं बल्कि एक भरोसा और आस्था का नाम है। गीता प्रेस अपने प्रकाशन के लिए दुनिया में एक अलग स्थान भी रखता है।

आपको जानकर हैरत होगी कि ये पूरे विश्व में सर्वाधिक हिंदू धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने वाली संस्था है। साल 1923 में स्थापित हुआ ये प्रेस बहुत सारे संग्राम और परिवर्तन का भी गवाह रहा है। इसके अहम योगदान को ही देखते हुए ही इसे साल 2021 के 'गांधी शांति पुरस्कार' के लिए चुना गया है।
PM मोदी 7 जुलाई को गोरखपुर आएंगे
आपको बता दें कि पीएम मोदी सात जुलाई को गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समारोह के समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। मालूम हो कि देश में रामचरित मानस, और भागवत गीता को घर-घर पहुंचाने का सारा श्रेय इस प्रेस को ही जाता है।
संस्थापक जयदयाल गोयन्दका
गौरतलब है कि इस प्रेस के संस्थापक जयदयाल गोयन्दका थे , जो कि मूल रूप से पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा के रहने वाले थे और एक मारवाड़ी बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखते थे।
बढ़िया लेखक भी थे जयदयाल गोयन्दका
लेकिन वो धार्मिक चीजों में काफी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे, वो बिजनेसमैन के साथ-साथ बढ़िया लेखक भी थे और उन्होंने खुद 100 किताबें लिखी हैं। कहते हैं कि एक यात्रा के दौरान उनके दिमाग में एक बात आई थी कि धार्मिक किताबें अगर लोग पढ़ेंगे तो उसे हिंदी भाषा में होना बहुत जरूरी है और इसी वजह से उनके मन में प्रेस खोलने का विचार आया था।
45 करोड़ से ज्यादा किताबों का प्रकाशन
आपको बता दें कि पिछले सौ सालों के अंदर यह प्रेस करीब 45.45 करोड़ से भी अधिक किताबों को प्रकाशित कर चुका है, जिसमें से 16.21 करोड़ किताबें तो भागवत गीता की रही हैं।
प्रेस का टर्नओवर करीब 100 करोड़
साल 2022 में इस प्रेस का टर्नओवर करीब 100 करोड़ का था। गीता प्रेस ने पब्लिकेशन की दुनिया में इतना लंबा वक्त तय किया है। वक्त बदला, देश में सरकारें बदलीं, लोगों की सोच भी बदली लेकिन एक चीज नहीं बदली और वो है गीता प्रेस की क्वालिटी और प्राइस आज भी इस प्रेस की किताबों के पन्ने उत्कृष्ट होते हैं।
क्यों होती हैं गीता प्रेस की किताबें सस्ती?
उनके प्रिंट उत्तम होते हैं और ना ही इस प्रेस की किताबें दूसरे मॉर्डन पब्लिकेशन ग्रुप की तरह बहुत मंहगी होती हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि गीता प्रेस से छपने वाली किताब की शुरुआती कीमत केवल 2 रुपए है।
गीता प्रेस ने कभी नहीं किया क्वालिटी से समझौता
आपको बता दें कि गीता प्रेस का शुरु से उद्देश्य यही रहा कि वो सस्ती किताबें ही छापेगा, जिससे घर-घर तक उसकी किताबें पहुंचे और वो आज भी इस बात पर कायम है। इस प्रेस का संचालन कोलकाता का गोविंद भवन करता है।
रोज 50 हजार किताबें बिकती हैं
गीता प्रेस एक ट्रस्ट के रूप में भी काम करता है, उसके पास 'गीता वस्त्र विभाग' और 'गीता आयुर्वेद विभाग' है, जहां कपड़े और दवाईयां बेची जाती हैं, प्रेस यहीं से कमाई करता है इसलिए प्रेस पर बोझ नहीं आता है। मालूम हो कि आज भी इसकी रोज 50 हजार किताबें बिकती हैं। आप इनकी किताबें बुक सेंटर्स, रेलवे स्टेशन और बस स्टॉप से खरीद सकते हैं।












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