DDU University: शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम 'गुरुदक्षता' का शुभारंभ, कुलपति ने कहीं ये खास बातें
DDU University Latest News Gorakhpur: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के तत्वावधान में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए 10वां शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम- 'गुरुदक्षता' का शुभारंभ 02 अगस्त 2025 को प्रातः 11 बजे कुलपति, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, प्रोफेसर पूनम टंडन की अध्यक्षता में समारोह पूर्वक संपन्न हुआ. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो रवि शंकर सिंह, कुलपति, माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर उपस्थित रहे. प्रतिभागियों के रूप में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के शिक्षक ऑनलाइन जुड़े.
गुरुदक्षता कार्यक्रम पर विचार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम न केवल शिक्षकों और शोधकर्ताओं में अकादमिक समझ को गहरा करते हैं, बल्कि ज्ञान-विस्तार, नवाचार, वैचारिक समृद्धि और समावेशिता को भी बढ़ावा देते हैं. ऐसे कार्यक्रमों में चलने वाले विमर्श शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर के कुलपति प्रो रवि शंकर सिंह ने कहा कि समूचे शिक्षा जगत में आमूल चूल परिवर्तन की आवश्यकता है और नई शिक्षा नीति का यही ध्येय है. नई शिक्षा नीति में अनेक प्रकार के महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं जो अत्यंत सामयिक एवं लाभप्रद हैं, पर कुछ कारणों से इनका प्रतिरोध भी किया जाता है. ऐसे विरोधों को इस नीति के उद्देश्यों को प्रचारित कर जागरूकता फैलाकर दूर किया जा सकता है. यह नीति भारतीय परंपरा का वाहक तो है ही बहुभाषी शिक्षण का समर्थन भी करती है. यदि शिक्षक एवं विद्यार्थी बहुभाषी नहीं होंगे तो राष्ट्रव्यापी संप्रेषणीयता में कमी आना स्वाभाविक है.
उन्होंने कहा कि आज का युग सूचना प्रणाली एवं एआई का युग है ऐसे में शिक्षकों को अपने विषयों में अपडेट रहना आवश्यक हो चुका है क्योंकि इनके माध्यम से विद्यार्थियों के पास पहले ही ज्ञान का भंडार खुला पड़ा है. आज हमारे देश में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खुलने से भी शिक्षकों के सामने नए प्रकार की चुनौतियां सामने खड़ी हैं जिनका सामना करने के लिए हमें और भी अद्यतन ज्ञान की आवश्यकता होगी. उन्होंने सचेत किया कि हमें व्यक्तिगत विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिकता तीनों की आवश्यकता है अतः तीनों पर अपेक्षित ध्यान दिया जाना चाहिए.प्रो रवि प्रताप सिंह ने रणनीतिक योजना और संगठनात्मक परिवर्तन के लिए नेतृत्व के उत्तरदायित्वों को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि नेतृत्व प्रभावी नहीं होगा तो संगठन अपने प्रयास में कभी सफल नहीं हो सकते. इसके लिए उन्होंने संगठनों को अपने दीर्घकालीन लक्ष्यों को निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए रणनीतियां विकसित करने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के अनुसंधानों में ईमानदारी, निष्पक्षता जरूरी है शोधार्थियों को साहित्यिक चोरी से बचने का हर प्रयास करना चाहिए.
कार्यक्रम में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. चंद्रशेखर, शिक्षकों ने कार्यक्रम के रूपरेखा रखते हुए कहा कि शैक्षणिक ईमानदारी, शोध में नैतिकता जैसे विषयों पर इस प्रकार के संवाद और विचार-विमर्श शिक्षा जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी हैं.
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो अनिल कुमार यादव ने कार्यक्रम में शामिल अतिथियों एवं प्रतिभागियोका स्वागत किया. एमएमटीटीसी सह-निदेशक डॉ. राजू गुप्ता ने कार्यक्रम की समाप्ति पर मुख्य वक्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूर्णिमा मिश्रा, सहायक प्रोफेसर, व्यवसाय प्रशासन विभाग, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा किया गया. कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ हर्ष देव वर्मा एवं डॉ राहुल मिश्रा, तथा डॉ. सुशील कुमार सिंह, डॉ मोहम्मद इरफान, डॉ सुरुचि श्रीवास्तव, डॉ अभिषेक इत्यादि ने कार्यक्रम के संचालन में अपनी-अपनी भूमिकाओं का निर्वहन किया।












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