Gorakhpur News: महज 18 साल में परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन योगेंद्र यादव ने युवाओं से की यह खास अपील
DDU University Gorakhpur News: भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीरचक्र विजेता कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के रक्षा एवं स्त्रातज़िक अध्ययन विभाग तथा ICWA के संयुक्त तत्वाधान में भारत की पड़ोसी प्रथम नीति: चुनौतियां एवं विकल्प विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में अपने विचार रखे। कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने इस शांति की भी व्याख्या की और बताया कि यह शांति युद्धों को जीतकर स्थापित की जाने वाले शांति नहीं, बल्कि ऐसी शांति ऐसी होगी जहां भारत व इसके समस्त पड़ोसी राष्ट्र अपने हितों का संवर्धन व संरक्षण करने के लिए अपने संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सकें और अपने विकास को नित्य नई ऊंचाइयों पर ले जा सके।
इसके आगे उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आंतरिक सुरक्षा के लिए समाज में पारिवारिक विखंडन एक बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए हमें दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास करने की आवश्यकता है, इसके साथ ही साथ उन्होंने 1999 में भारत और पाकिस्तान के मध्य हुए कारगिल संघर्ष के दौरान अपने अनुभवों को भी साझा किया तथा भारतीय सेना के जवानों के त्याग और सर्वोच्च बलिदान का विस्तार से वर्णन किया है।

कैप्टन योगेंद्र यादव मात्र 18 वर्ष की उम्र में परमवीर चक्र पुरस्कार प्राप्त करने वाले सबसे युवा भारतीय हैं जो वर्तमान समय में भारत की युवाओं के लिए एक आदर्श एवं प्रेरणा के स्रोत है। इस संगोष्ठी के समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि कर्नल सूर्य प्रकाश रेड्डी ने अपने उद्बोधन में भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के समक्ष उत्पन्न प्रमुख चुनौतियों एवं पड़ोसी राष्ट्रों की स्थिति का भारत के सामरिक परिदृश्य पर प्रभाव का उल्लेख किया। इस संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के पूर्व कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने भारत की प्रथम पड़ोसी नीति पर वर्णन करते हुए कहा कि भारत के अधिकतर पड़ोसी राष्ट्र, वर्तमान में राष्ट्र निर्माण के दौर से गुजर रहे हैं इसलिए ज्यादातर देशों में अस्थिरता, संघर्ष और हिंसा की घटनाएं होरही हैं।
ऐसे में भारत का यह दायित्व है कि अपने पड़ोसियों को इन चुनौतियों से निपटने में सहायता करें, तभी भारत की पड़ोसी प्रथम नीति सफल होगी और इसके लिए भारत को पड़ोसी प्रथम नीति के अपने सिद्धांतों पर विशेष बल देना होगा। संगोष्ठी के समापन सत्र में अतिथियों का स्वागत विभाग के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि यह संगोष्ठी अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में काफी सफल रही है एवं आभार ज्ञापन इस संगोष्ठी की आयोजन सचिव डॉ. आरती यादव ने कहा कि इस संगोष्ठी का सभी वर्गों जैसे शोधार्थियों,विद्यार्थियों एवं सेना से आए विशेषज्ञों और नागरिक समाज द्वारा पुरजोर प्रशंसा की गई, जिससे इसकी सफलता में चार चांद लग गए। इस अवसर पर विभिन्न प्रदेशों से आए प्रतिभागीगण, विषय विशेषज्ञ विभाग के आचार्य प्रो सतीश चंद्र पांडेय, प्रो हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो श्रीनिवास मणि त्रिपाठी, प्रो प्रदीप कुमार यादव, प्रो हरि सरन, डॉ प्रवीन कुमार सिंह, डॉ जितेंद्र कुमार, डॉ विजय कुमार, डॉ अभिषेक सिंह, डॉ डी. के. पाटिल (महाराष्ट्र) एवं विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के शिक्षकगण, विभिन्न महाविद्यालयों से आए शिक्षक गण, देश के अलग अलग प्रदेशों से आए प्रतिभागी व विभाग के शोध छात्र छात्राएं एवं परास्नातक व स्नातक के छात्र उपस्थित रहे।












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