सीएम सिटी गोरखपुर की वो मशहूर जगहें, जो आपकी यात्रा को बना देंगी यादगार और मजेदार
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से गोरखपुर व आस-पास के क्षेत्रों में पर्यटन का तेजी से विकास हुआ है।पर्यटन स्थलों की सुन्दरता बढ़ी है एंव उन्हें शानदार रुप दिया गया है। देश के साथ-साथ यह विदे
गोरखपुर,26 अगस्त:
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से गोरखपुर व आस-पास के क्षेत्रों में पर्यटन का तेजी से विकास हुआ है।पर्यटन स्थलों की सुन्दरता बढ़ी है एंव उन्हें शानदार रुप दिया गया है। देश के साथ-साथ यह विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है।आज हम आपको गोरखपुर की कुछ मशहूर जगहों के बारे में बताने वाले हैं, जहां पर्यटकों की सबसे ज्यादा भीड़ देखी जाती है।इसके साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि यहां किन मार्गों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

गोरखनाथ मंदिर
यह नाथ संप्रदाय का विश्व प्रसिद्ध मठ है।इसकी शाखाएं विश्व के कई देशों में फैली हैं।आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ ही यह देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर गुरु गोरखनाथ को समर्पित है।उन्होंने योग को विश्व पटल पर पहचान दी।12 वीं शताब्दी में गोरखनाथ मंदिर का निर्माण किया गया था। मंदिर परिसर में संत के मंदिर, उनके कदम और उसकी सिहांसन है, जहां वह योग का अभ्यास करते थे।विश्व प्रसिद्ध खिचड़ी मेला यहीं लगता है।सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही यहां के पीठाधीश्वर हैं जो नाथ संप्रदाय की परंपरा को बुलंदियों पर पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

गीता प्रेस
गीता प्रेस में वर्तमान में हिन्दू धार्मिक ग्रंथों और पुस्तकों को प्रकाशित करने की दुनिया की प्रमुख प्रेस होने का गौरव प्राप्त है। यह 1 9 23 में जया दयाल गोयंदका और घनश्याम दास जालान द्वारा शुरू किया गया था। उन्होंने पवित्र गीता और इसकी व्याख्याओं, पवित्र महाकाव्य रामायण और महाभारत, पुराण, उपनिषद और विभिन्न संतों और गुरुओं के कार्यों को भी प्रकाशित किया। ये सभी साहित्य अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवादित है और इसे बेचा गया है।हिंदू धर्म के मानने वालों के लिए गीता प्रेस की पुस्तकों का महत्व ईश्वर तुल्य है।यह पर्यटकों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

रामगढ़ताल
रामगढ़ताल शहर का एक ऐसा पर्यटन स्थल जिसकी सुदंरता मन मोह लेती है।प्राकृतिक दृश्य अद्भुत हैं।बोटिंग यहां के रोमांच को और बढ़ा देती है।शहर के दक्षिण-पूर्वी छोर पर 1700 एकड़ क्षेत्र में फैला रामगढ़ताल प्रकृति की अनुपम भेंट है। पूर्व में राप्ती नदी रामगढ़ताल से ही होकर गुजरती थी। बाद में राप्ती नदी की दिशा बदली तो उसके अवशेष से रामगढ़ताल अस्तित्व में आ गया। रामगढ़ ताल पूर्वांचल का मरीन ड्राइव बन चुका है। लाइट एंड साउंड शो के साथ शाम ढलते ही ताल का नजारा अद्भुत होता है। नौकायन व वाटर स्पोर्ट्स ने इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिया है।जल्द ही यहां फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की शुरुआत भी की जाएगी।

कुसम्ही वन
कुसम्ही जंगल का प्राकृतिक नजारा अद्भुत है।यह वन साल के पेड़ो का घना जंगल है। घने हरे जंगल में बुढ़िया माता का प्राचीन मंदिर भी है।जो भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है। जंगल के भीतर अन्य आकर्षण विनोद वन पार्क और एक चिड़ियाघर हैं।

रेलवे संग्रहालय
रेल म्यूजियम लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।इस संग्रहालय को वर्ष 2007 में जनता के लिए खोला गया था। इस संग्रहालय का सबसे विशेष आकर्षण लॉर्ड लॉरेंस का भाप इंजन है। यह 1874 में लंदन में बनाया गया था और एक जहाज द्वारा भारत में आयात किया गया था। इसके अलावा यहा एक फोटो गैलरी, वर्दी, पुरानी घड़ियों और यहां तक कि अन्य इंजन भी हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए यहा एक खिलौना ट्रेन भी है।

राजकीय बौद्ध संग्रहालय
रामगढ़ ताल क्षेत्र में स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है। इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1987 में विविध तत्वों के संरक्षण के लिए की गई थी। संग्रहालय इस दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पाषाण काल से लेकर मध्य काल तक की पुरातात्विक वस्तुएं हैं। इनमें पत्थर की वस्तुओं, कांस्य की मूर्तियां, धातु की वस्तुएं, टेराकोटा, मिट्टी के बर्तन, पांडुलिपियां, हाथी दांत, लघु चित्र, पंचमार्क सिक्के, धन्यवाद और कई अन्य चीजें प्रदर्शित हैं।

गोरखरपुर का चिड़ियाघर
गोरखपुर चिड़ियाघर 121 एकड़ में बनाया गया है और इस चिड़िया घर में 155 से अधिक
वन्य जीव लाए जाने हैं और बहुत से जीव लाए जा रहे हैं। चिड़ियाघर लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।इसमें 6 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त प्रवेश दिया जा रहा है। छह से 13 वर्ष तक के बच्चों के लिए 25 रुपये और इससे अधिक उम्र वालों के लिए टिकट का दाम 50 रुपये है।प्रत्येक सोमवार को चिड़ियाघर की साप्ताहिक बंदी होती है।इसमें मोर, रेड जंगल फाउल, लव बर्ड, रोजी पेल्किन, पेटेंड स्टार, स्पर्ट बिल्ड समेत अन्य पक्षी हैं। बंदरों व भालू के बाड़े भी बने हैं।

विष्णु मंदिर
शहर के मेडिकल कॉलेज रोड पर भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।भगवान विष्णु की यह प्रतिमा 12वीं सदी के पाल वंश के समय की है। मंदिर की खास बात यह है कि यहां स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा के होंठ दिनभर में तीन तरह से बदलते हैं। मतलब भगवान की मुस्कान दिनभर में तीन तरह की होती है। प्रतिमा में सुबह, दोपहर और शाम को अलग-अलग छवियों में श्री विष्णु के दर्शन भक्तों को होते हैं।
भगवान विष्णु केे भक्तों में इस मंदिर को लेकर गहरी आस्था है। दूर-दूराज से भक्त भगवान के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। हरेक बृहस्पतिवार को यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है। साथ ही साल में एक बार नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ भी आयोजित होता है।
कैसे पहुंचे गोरखपुर
सड़क मार्ग द्वारा
गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है, जो इसे उत्तर प्रदेश के शहरों और अन्य प्रमुख भारतीय शहरों से जोड़ता है। गोरखपुर और कुछ महत्वपूर्ण भारतीय शहरों के बीच की दूरी लखनऊ (276 किमी), वाराणसी (160 किमी), इलाहाबाद (210 किमी), आगरा (624 किमी) दिल्ली (783 किमी) और मुंबई (1690 किमी) हैं।
रेल मार्ग द्वारा
सीधी ट्रेनें गोरखपुर को मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और अन्य प्रमुख भारतीय शहरों से जोड़ती हैं।
हवाई मार्ग द्वारा
गोरखपुर हवाई अड्डे से, जो शहर से 8 किलोमीटर दूर है, दिल्ली, वाराणसी, लखनऊ और कोलकाता के साथ हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है।












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