'DJ और बैंड-बाजे वाली शादियों में निकाह न पढ़ाएं काजी', मुस्लिम महासभा ने सुनाया फरमान
सिबिलीबाड़ी जाम मस्जिद के प्रमुख इमाम मौलाना मसूद अख्तर ने कहा, "इस्लाम में ऐसी प्रथाओं की अनुमति नहीं है। इससे लोगों को असुविधा भी होती है।"

यूपी के गाजियाबाद में मुस्लिम महासभा ने मौलवियों से कहा कि अगर 'निकाह' समारोह में डीजे या "ब्रास बैंड" बजाया जाता है, तो निकाह न करवाएं। पीटीआई के मुताबिक, संगठन ने एक बयान जारी कर मौलवियों के सहयोग की मांग की ताकि समुदायों को "साधारण तरीके" से शादी समारोह आयोजित करने के लिए राजी किया जा सके।
बयान में यह भी कहा गया है कि संगठन शादी समारोह में पैसे खर्च करने का विरोध जारी रखेगा। बयान में कहा गया है कि परिवारों से एक लिखित गारंटी भी ली जानी चाहिए कि वे भविष्य में "डीजे संस्कृति" को प्रोत्साहित नहीं करेंगे।
मुस्लिम महासभा का यह बयान झारखंड के धनबाद जिले में मुस्लिम मौलवियों के एक समूह द्वारा डांस, तेज म्यूजिक बजाने और शादियों के दौरान आतिशबाजी के प्रदर्शन जैसी "गैर-इस्लामिक प्रथाओं" पर प्रतिबंध लगाने के कुछ दिनों बाद आया है। मुस्लिम महासभा ने कहा है कि फरमान का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। सिबिलीबाड़ी जाम मस्जिद के प्रमुख इमाम मौलाना मसूद अख्तर ने कहा, "इस्लाम में ऐसी प्रथाओं की अनुमति नहीं है। इससे लोगों को असुविधा भी होती है।"












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