बिहारः गया में 20 हजार रुपये के लिए नर्सिंग होम ने मरीज को सड़क पर लिटा दिया, जमकर हुई मारपीट
गया। बिहार में इन दिनों कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था खूब उजागर हो रही है। ताजा मामला बिहार के गया जिले का है, जहां एडवांस पैसा नहीं जमा करने पर नर्सिंग होम ने मरीज को सड़क पर लाकर छोड़ दिया। पूरा मामला जिले के फतेहपुर प्रखंड के ब्लॉक कार्यालय में एक नर्सिंग होम का है। नर्सिंग होम ने एडवांस पैसे नहीं मिलने पर भर्ती मरीज को न केवल सड़क पर मरने को छोड़ दिया, बल्कि उसके परिजनों के साथ मारपीट भी की। मामले की शिकायत लेकर पीड़ित परिवार जब थाना पुलिस तक पहुंचा तो पुलिस कार्रवाई करने की जगह पीड़ित परिवार को ही हड़काने में जुट गई। लेकिन मामला जब और गरमाया तो प्रशासन ने नर्सिंग होम को सील कर दिया।

70000 रुपए देने के बाद भी अमानवीयता
मातासो निवासी सुरेन मांझी को घरवालों ने बीते शुक्रवार को आदर्श चिकित्सा सेवा सदन में भर्ती कराया था। सुरेन को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। लगातर चार दिनों तक इलाज करने के बाद नर्सिंग होम के संचालकों ने सुरेन के परिजनों से 90 हजार रुपये जमा करने को कहा । जबकि, मरीज के परिजनों ने 70000 रुपए पहले ही जमा कर दिये थे। बाकी रुपयों का भुगतान नहीं करने पर सोमवार की दोपहर में मरीज को नर्सिंग होम से बाहर निकाल कर सड़क पर लाकर रख दिया।
इस बीच सुरने के परिजन जो कि बाकी पैसों का इंतजाम करने गए थे। वो जब अस्पताल लौटे और देखा कि उनका मरीज सड़क पर पड़ा हुआ है तो बौखला गए। बीमार मरीज को सड़क पर छोड़े जाने पर सुरेन के परिजनों व नर्सिंग होम के संचालकों के बीच बहस होने लगी। देखते ही देखते दोनों के बीच मारपीट होने लगी।
नर्सिंग होम को सील कर दिया गया
सुरेन के परिजनों का कहना है कि मारपीट की स्थिति हुई तो वे घबरा कर फतेहपुर थाने पहुंच गए। वहां मदद की जगह पर उन्हें न केवल बंद कर दिया गया बल्कि पुलिस ने हड़काया भी। पुलिस के इस तेवर को देख सुरेन के अन्य परिजनों ने घटना की सूचना जिले के वरीय पुलिस अधिकारी एवं प्रभारी जिला अधिकारी को दी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन के साथ सुरेन के परिजनों को बंद कर हड़काने वाली पुलिस भी हरकत में आ गई। CO विजय कुमार, CHC प्रभारी डॉ अशोक कुमार थानाध्यक्ष संजय कुमार की मौजूदगी में नर्सिंग होम को सील कर दिया गया।












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