बॉर्डर पर गुजरात के आखिरी गांव के लोग बोले- पीछे हटने का सवाल ही नहीं, सेना के साथ लड़ेंगे दुश्मन से

Gujarat News, गांधीनगर। कच्छ के रण से लेकर राजस्थानी रेगिरस्तान तक, सीमावर्ती इलाकों के लोग दो देशों के बीच अब तक हुए कई सैन्य टकराव के गवाह रहे हैं। 48 साल पहले बांग्लादेश की ​मुक्ति के समय गुजरात भी हिंदुस्तान-पाकिस्तान युद्ध का अखाड़ा बन गया था। 1971 में युद्ध के दरम्यान पाकिस्तानी फाइटर जेट्स ने भुज के हवाई अड्डे को 35 बार निशाना बनाया, लेकि​न कहा जाता है कि यहां की 300 से ज्यादा महिलाओं ने लगातार 27 घंटे काम करके फिर से रनवे बना दिया था। इस तरह महिलाओं ने अपनी वायुसेना की मदद की थी।

गुजरात के आखिरी गांव में लोगों का ऐलान- जमीन से नहीं हटेंगे

गुजरात के आखिरी गांव में लोगों का ऐलान- जमीन से नहीं हटेंगे

अब जबकि, भारत की पाक में आतंकी ठिकानों पर हुई एयरस्ट्राईक के बाद से एक बार फिर बॉर्डर पर तनाव है तो बनासकांठा के लोगों ने सेना से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। सीमावर्ती गांव में रह रहे लोगों का कहना है कि हम यहीं जन्मे हैं, यहीं रहेंगे। लेकिन गांव खाली नहीं करेंगे। हम हिंद की सेना के साथ कांधे से कंधा मिलाकर मदद करेंगे। यह ऐलान जलोया गांव के लोगों ने तो साफ तौर पर ​कर दिया है, कि वे जमीन छोड़कर पीछे नहीं हटेंगे।

'हम सब सेना के साथ रहेंगे और मदद करेंगे'

'हम सब सेना के साथ रहेंगे और मदद करेंगे'

बता दें कि जलोया गांव बनासकांठा जिले का वह गांव है, जो पाकिस्तान बॉर्डर से सीधे जुड़ा है। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सरकार और सुरक्षा तंत्र को इन गांव वालों की फिक्र है, ऐसे में सेना ने लोगों को सतर्क रहने का सलाह दी है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि ये गांव खाली करके आप लोग सुरक्षित जगह चले जायें। लेकिन गांव के मुखिया और अन्य लोगों ने कहा कि, हम गांव खाली नहीं करेंगे। हम सब सेना के साथ जुड़ेंगें और मदद करेंगे।'

'सेना चाहे तो हर युवा झोंक देगा दम'

'सेना चाहे तो हर युवा झोंक देगा दम'

गांव के बुजुर्गों ने कहा, 'अगर युद्ध जैसा माहौल खड़ा हो गया है तो भी लोग यहां से दूर तो नहीं जा सकते। इस गांव के हर युवा का जुनून ऐसा है कि वह गांव खाली करने के बजाय सेना का साथ देने के लिये तैयार है।'

सभी गांवों में अलर्ट, बीएसएफ की चौकसी बढ़ी

सभी गांवों में अलर्ट, बीएसएफ की चौकसी बढ़ी

ऐसे में बनासकांठा के सुइगाम सीमा में काम करने वाले मजदूरों को वहां से सुरक्षित जगह निकालने में सुरक्षा बलों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। उनसे पहले यहां बीएसएफ के जवान तैनात कर दिये गये हैं। साथ ही, आसपास के सभी गांवों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

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