गुजरात: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल, 90 परसेंट तक मेडिकल स्टाफ की कमी

Gandhinagar news, गांधीनगर। गुजरात का ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ रही हैं क्योंकि 30 फीसदी से 90 फीसदी तक मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। गुजरात सरकार के काफी प्रयासों के बावजूद भी ग्रामीण सरकारी स्वास्थ्य सेवा मे मेडिकल स्टाफ नहीं मिल रहा है। ज्यादातर डॉक्टर शहरी सेवाओं में काम करना चाहते हैं, गांवों के स्वास्थ्य केन्द्रों में जाने के लिये बहुत कम डॉक्टर तैयार होते हैं।

स्टाफ की कमी से उपकरण हो रहे खराब

स्टाफ की कमी से उपकरण हो रहे खराब

एक रिपोर्ट के कहा गया है कि खाली पदों की वजह से गुजरात में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिसका मुख्य कारण आवश्यक स्टाफ की कमी है। गुजरात सरकार स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिये काफी पैसा बजट में खर्च कर रही है लेकिन आवश्यक स्टाफ की कमी के कारण खरीदे गए लेटेस्ट उपकरण व्यर्थ होते जा रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में विभिन्न कर्मचारियों के लिए 30 से 90 फीसदी पद रिक्त हैं। राज्य स्वास्थ्य सेवा में 9153 उप-स्वास्थ्य केंद्र, 1474 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 363 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद हैं। इन केंद्रों की संख्या जनसंख्या के आधार पर उचित तो नहीं है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण आम लोग और गरीब परिवारों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।

इतने वर्कर्स की आवश्यकता

इतने वर्कर्स की आवश्यकता

राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में 10627 महिला स्वास्थ्य वर्कर्स की आवश्यकता है लेकिन केवल 8240 महिला वर्कर्स काम करती हैं। महिला की श्रेणी में अधिकतम 2287 पद खाली हैं। इसी तरह, उप-केंद्रों में पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 9153 स्वीकृत पदों के सामने 7755 पुरूष वर्कर्स को नियुक्त किया गया है। इस पद पर, 1389 पद खाली पड़े हैं, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर बिगड रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सहायकों की महत्वपूर्ण है। राज्य में महिलाओ कें 1474 स्वीकृत पदों में से, 851 महिला सहायकों और 1474 स्वीकृत पदों में से 826 पुरुष सहायक मोजूद हैं। राज्य में नर्सिंग स्टाफ की भी कमी है। 4391 के स्विकृत पद के मुकाबले 3,160 नर्स काम कर रही हैं।

डॉक्टरी सेवा की हालत खस्ता

सबसे बुरी हालत डोक्टरी सेवा की है। राज्य के 578 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो चिकित्सक और 796 केंद्र पर एक ही चिकित्सक उनकी सेवा प्रदान करते हैं। राज्य के 100 स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर ही नहीं हैं। राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंन्दों में 1854 डॉक्टरों की नियुक्ति करने की स्वास्थ्य विभाग को अनुमति है, जिनमें से 1321 डॉक्टर्स हाल ड्यूटी पर हैं, जबकि 544 पद खाली पडे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है की स्वीकृत पदों के सामने सिर्फ 30 फीसदी डॉक्टर हैं। इसका मतलब यह है हुआ कि राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को त्वरित उपचार नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर, राज्य के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 363 सर्जन के सामने केवल 31 स्थान भरे गए हैं, मतलब ये हुआ की इस केंन्द्रो में आवश्यकता के सामने केवल 8.54 फीसदी पदों पर सर्जन नियुक्त किये गये है और 91.46 फीसदी पद खाली पडे है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नहीं हैं स्त्री रोग विशेषज्ञ

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नहीं हैं स्त्री रोग विशेषज्ञ

महिलाओं की गर्भावस्था स्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्रो पर 363 के मुकाबले 315 पद खाली पड़े है। राज्य के 86 फीसदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। राज्य में 363 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 363 रेडियोग्राफरों की नियुक्ति के लिए अनुमोदन मिलने के बावजूद, 118 रेडियोग्राफर ही अभी काम कर रहे हैं, जबकि प्राथमिक और जन स्वास्थ्य केंद्रों में, 1837 फार्मासिस्ट के सामने 253 पद खाली पडे हैं। इसी तरह से लैब टेक्नीशियन के 1837 पद के मुकाबले केवल 179 स्थान भरे गए हैं।

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