CAG Report: गुजरात के सरकारी विभागों में चोरी-घपलों के 157 मामले, 25 साल से लंबित हैं 60 केस
गांधीनगर। गुजरात सरकार के विभागों में चोरी, ठगी और घोटालों के पिछले 25 वर्षों तक के केस लंबित हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात सरकार ने चोरी और घोटाले के 157 मामलों में 14.50 करोड़ रुपये की राशि खो दी, फिर भी चोर और घोटालेबाज कर्मचारी सरकार में बिना डर से काम कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, सरकार ने इन मामलों की प्रारंभिक जांच पूरी नहीं की है या फिर अदालत में अभी मामले चल रहे हैं। जिसके परिणामस्वरूप कई आरोपी कर्मचारियों को दंडित नहीं किया जा सका है।

कैग की रिपोर्ट में दिखाया गया है कि पांच साल तक के मामलों की संख्या 44 है। 10 साल तक के मामलों की संख्या 13 है और 15 साल तक के मामलों की संख्या 15 पायी गई है। इसके अलावा, 20 से 25 साल के मामलों की संख्या 16 देखी गई है और 25 साल से ऊपर के मामलों की संख्या 60 पर सबसे अधिक रही है।
इस रिपोर्ट ने सरकार की आलोचना की है और कहा है कि सरकार को नुकसान पहुंचाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें दंडित करना चाहिए। 157 मामलों में से 24 मामले नर्मदा विभाग के हैं। राजस्व विभाग के केस की संख्या 21 है जो 25 से अधिक वर्षों से लंबित हैं। 68 मामलों में केवल प्रारंभिक डेटा दर्ज किया गया है।
सरकारी विभागों के केग को सूचित किया है कि, लंबित मामलों के कई कारण देखे गये हैं। कुछ मामलों में जवाबदेही कार्रवाई लंबित है। कुछ में आपराधिक मुकदमा चल रहा है, लेकिन वसूली प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है। वसूली या मध्यस्थता के आदेश लंबित हैं। अदालतों में मामले भी चल रहे हैं। 157 मामलों में से, 72 कानूनी निर्णय की प्रक्रिया में हैं और 23 मामलों में विभागीय जांच बाकी है। सरकार को बड़ा नुकसान उन कर्मचारियों के कारण हुआ है, जिन्होंने चोरी और घोटाले किए हैं।












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