#YogaDay: योग दिवस पर जाने पंतजलि के योग सिद्धांत
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज पूरे विश्व में तमाम प्रकार के आयोजन हो रहे हैं। योग का इतिहास भारत में तो 5000 वर्षों पुराना है। हिन्दू धर्म में वेदों और पुराणों में भी योग का विवरण दिया हुआ है।
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हमारी सभ्यता में जो पुरानी मूर्तियाँ वगैरह मिली हैं उनमे से कई योग मुद्राओं में हैं। हांंलाकि इस बात के कोई पुख्ता सुबूत तो नही हैं लेकिन कई वैज्ञानिक यह तथ्य देतें हैं की सिन्धु घाटी सभ्यता का योग और ध्यान से सम्बन्ध है।
योग गुरु हैं महर्षि पतंजलि
आज विश्व योग दिवस पर मैं आपको पतंजलि योग सूत्र के बारे में बताती हूँ, आपकी जानकारी के लिए बता दूं की जिस पतंजलि की हम यहाँ बात कर रहे हैं वो बाबा रामदेव का आश्रम नही ; वे योग गुरु महर्षि पतंजलि हैं जिन्होंने योग सूत्र की रचना की थी।
पतंजलि योगसूत्र के रचनाकार है जो हिन्दुओं के छः दर्शनों (न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदान्त) में से एक है। भारतीय साहित्य में पतंजलि के लिखे हुए ३ मुख्य ग्रन्थ मिलते हैः योगसूत्र, अष्टाध्यायी पर भाष्य और आयुर्वेद पर ग्रन्थ।
चार भागों में बंटा है योग शास्त्र
पतंजलि का योग दर्शन समाधि;साधन;विभूति और कैवल्य इन चारों भागों में बंटे हुए हैं। समाधि भाग में यह बताया गया है की योग का मुख्य उद्देश्य और लक्ष्ण क्या हैं; साधन भाग यह बताता है की कर्मफल आदि क्या होते हैं। विभूति भाग में योग के विभिन्न अंगों और उनके परिणामों का अनुमान लगाया जाता है और अंत में कैवल्य में मोक्ष के विषय में बताया जाता है।
कई ग्रन्थों में योग की महिमा का वर्णन है
पतंजलि के योग सूत्रों का सबसे प्राचीन विवेचन वेदव्यास जी ने किया था। विज्ञानभिक्षु का योगसारसंग्रह भी योग का एक प्रमाणिक ग्रन्थ माना जाता है, महर्षि पतंजलि ने योग को शरीर और मन की शुद्धि कारक बताया है। योगसूत्र में उन्होंने पूर्ण कल्याण तथा शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिए आठ अंगों वाले योग का एक मार्ग विस्तार से बताया है।
कई भाषाओँ में हो चुका है इसका अनुवाद
पतंजलि द्वारा रचित इस ग्रंथ की प्रसिद्धि आधुनिक युग में बढ़ गई है। इस पुस्तक का अंग्रेजी सहित विश्व की कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। हाल ही में इसका अनुवाद हिब्रू भाषा में हुआ है।













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