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Wrestlers Protest: क्या है हरियाणा के कुछ पहलवानों और कुश्ती महासंघ के बीच टकराव की असल वजह?

जहां हरियाणा के कुछ नामी पहलवान भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं कुछ लोग पहलवानों के राजनीतिक मोहरे बन जाने का आरोप लगा रहें हैं।

Wrestlers Protest

पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना-प्रदर्शन कर रहे कुश्ती के पहलवानों ने 28 मई को संसद भवन की ओर कूच करना शुरू किया। दरअसल, संसद भवन के ठीक सामने महापंचायत बुलाई गई थी। इसी पंचायत में शामिल होने के लिए पहलवान नये संसद भवन की ओर बढ़ने लगे और वहां आगे बैरिकेड्स भी तोड़ दिए। इस दौरान पहलवानों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़पें भी हुई। इसके बाद, दिल्ली पुलिस ने विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया सहित कई पहलवानों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का दावा है कि रविवार को नये संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को देखते हुए धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। खाप पंचायत और किसान संगठनों को भी यह हिदायत दी गई थी कि वह नये संसद भवन की ओर कूच न करें। लेकिन किसान और पहलवान अपनी जिद पर अड़े रहे। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने दिल्ली की सीमाओं को भी सील कर दिया था।

दिल्ली पुलिस ने पहलवानों समेत 109 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। इन पर दंगा फैलाने, गैरकानूनी सभा करने, सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, दिल्ली पुलिस जंतरमंतर पर पहुंची और पहलवानों के धरना स्थल से उनके टेंट और दूसरे सामान भी हटा दिए। पुलिस उपायुक्त सुमन नालवा ने कहा कि पहलवानों को अब जंतरमंतर पर धरना देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वे जंतरमंतर की बजाय कहीं और धरना दे सकते हैं।

गौरतलब है कि पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोप लगाए थे।

इस मामले में अब तक क्या हुआ?

  • इसी वर्ष की 18 जनवरी को विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया दिल्ली के जंतरमंतर पर धरने पर बैठे और यह आरोप लगाया कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न किया है। इसके बाद, केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने पहलवानों से मुलाकात की और इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाने का आश्वासन दिया। इसके बाद, पहलवानों ने धरना समाप्त कर दिया।
  • 23 अप्रैल को बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग करते हुए पहलवान फिर से जंतरमंतर पर धरने पर बैठ गए और कहा कि जब तक बृजभूषण शरण सिंह गिरफ्तार नहीं किए जाते, तब तक धरना जारी रहेगा।
  • 28 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज किए और साथ ही पॉक्सो एक्ट भी लगाया।
  • 7 मई को जंतरमंतर पर खाप महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी के लिए केंद्र सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया।
  • 21 मई की महापंचायत में 23 मई को इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकालने और 28 मई को नए संसद भवन पर महिला महापंचायत करने का फैसला किया गया।
  • 24 मई को बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मैं नार्को टेस्ट के लिए तैयार हूं। मगर आरोप लगा रहे पहलवानों का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए।

क्या है इस विवाद के पीछे का कारण?
बता दें कि नवंबर 2021 में भारतीय कुश्ती महासंघ ने नियमों में कुछ बदलाव किए थे, जिसमें कहा गया था कि ओलंपिक के लिए टीम को अंतिम रूप देने से पहले ओलंपिक कोटा प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को भी ट्रायल देना होगा। यह फैसला इसलिए किया गया क्योंकि ओलंपिक से पहले कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होती हैं, जिनमें जीतने वाले खिलाड़ी को ओलंपिक का कोटा मिल जाता है। यहां तक कि जो देश जितना ज्यादा टूर्नामेंट जीतता है, उसके उतने ज्यादा खिलाड़ी ओलंपिक में जा सकते हैं।

क्योंकि, ये प्रतियोगिताएं ओलंपिक से काफी समय पहले होती हैं, इसलिए भारतीय कुश्ती महासंघ का कहना था कि ओलंपिक के लिए नाम तय करने से पहले सभी खिलाड़ियों को ट्रायल देना होगा। इससे पहलवानों की तैयारियों का पता लगाया जा सकेगा और सभी तरह से योग्य पहलवान को ओलंपिक के लिए चुनने में मदद मिलेगी।

भारतीय कुश्ती महासंघ ने इन नियमों में बदलाव के पीछे का कारण यह बताया कि ओलंपिक कोटा हासिल करने के बाद कई बार कुछ खिलाड़ी चोटिल हो जाते हैं या फॉर्म में नहीं रहते हैं और वे इन बातों को छिपाकर ओलंपिक खेलने चले जाते हैं। इसके चलते हमारे खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

वर्चस्व की लड़ाई
कुश्ती महासंघ ने राज्यों की टीमों को लेकर भी कुछ नियम बनाए हैं। कुश्ती संघ का कहना है कि कोई भी राज्य राष्ट्रीय स्तर पर एक से ज्यादा टीम नहीं भेज सकता है और ट्रायल्स के जरिये कुश्ती में कमजोर राज्यों को भी मौका मिलना चाहिए। क्योंकि, कुश्ती में ज्यादातर खिलाड़ी हरियाणा के हैं और वे ओलंपिक कोटा भी हासिल कर लेते हैं। इसलिए इस नियम का हरियाणा के खिलाड़ियों ने विरोध किया और इस नियम को राज्य के लिए खतरा माना।

दरअसल, हरियाणा की टीम हर वर्ग में छह पहलवानों को उतारती है। इसलिए उनके मेडल जीतने की भी संभावनाएं ज्यादा होती हैं, जो दूसरे राज्यों के लिए सही नहीं है। इसके अतिरिक्त, रेलवे और सेना की टीमों में भी ज्यादातर पहलवान हरियाणा से ही होते हैं। कुश्ती महासंघ का कहना है कि हम इसे ठीक करना चाहते हैं, ताकि केरल, तमिलनाडु, उड़ीसा और अन्य राज्यों के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतें। इससे दूसरे राज्यों में भी कुश्ती लोकप्रिय होगी।

इसके अतिरिक्त, कुश्ती महासंघ ने यह भी नियम बनाया है कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जीतने के बाद ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिलेगा। हरियाणा के खिलाड़ी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम पिछले टूर्नामेंट में जीतकर आए हैं, इसलिए हमें मौका मिलना चाहिए। हरियाणा के खिलाड़ियों को लगता है कि कुश्ती पर जो उनका एकाधिकार है, वह ऐसे नियमों से समाप्त हो जाएगा।

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    हरियाणा कुश्ती संघ ने तब इन नियमों का विरोध करते हुए कहा था कि ये हरियाणा के साथ अन्याय है। इससे न सिर्फ हरियाणा, बल्कि देश की कुश्ती को भी नुकसान होगा। वहीं, हरियाणा के पहलवानों का कहना था कि हर राज्य की अपनी एक खास पहचान होती है। हरियाणा कुश्ती में अच्छा है, तो बाकी राज्य दूसरे खेलों में अच्छे हैं।

    कुश्ती के बहाने राजनीति
    साल 2011 में भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनावी मैदान में कांग्रेस के नेता दीपेंद्र हुड्डा और बृजभूषण शरण सिंह आमने-सामने थे। इस चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह ने जीत हासिल की थी। इसके बाद, 2015 और 2019 के चुनाव में भी बृजभूषण शरण सिंह ने कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष का चुनाव जीता था। ऐसे में अब हरियाणा के पहलवान यह चाहते हैं कि कुश्ती महासंघ का अध्यक्ष हरियाणा से हो। इसी संदर्भ में हरियाणा कुश्ती संघ के महासचिव राकेश कोच ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के नेता दीपेंद्र हुड्डा के कहने पर फोगाट परिवार कुश्ती महासंघ पर कब्जा करना चाहता है।

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