World Sanskrit Day: 1994 में पहली बार संस्कृत में देशभर ने सुने थे समाचार, जानिए इस दिवस का इतिहास
संस्कृत भाषा भारत की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। माना जाता है कि इसी से देश में दूसरी भाषाएं निकली हैं। वर्तमान में संस्कृत को भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। जानकारों की मानें तो इसके बहुत से शब्दों पर आधारित शब्द अंग्रेजी सहित अन्य विदेशी भाषाओं में मिलते हैं।
पर वर्तमान में स्थिति ऐसी हो गई है कि संस्कृत आज देश की सबसे कम बोली जाने वाली भाषा बन गई है। आज संस्कृत दिवस भी है। ऐसे में हम इससे जुड़ी तमाम जानकारियां आपसे साझा करेंगे। साथ ही भारत के उस गांव के बारे में भी बताएंगे जहां आज भी आम बोलचाल की भाषा संस्कृत ही है।

संस्कृत दिवस का इतिहास
सालभर में हर दिन किसी न किसी महत्व और धरोहर को समेटे हुए है। यह सर्वविदित है कि महर्षि पाणिनि संस्कृत भाषा व्याकरण के जनक हैं। उन्होंने संस्कृत व्याकरण के सभी नियमों का उल्लेख अपनी कृति 'अष्टाध्यायी' में किया है। किंतु इसकी उत्पत्ति का समस्त श्रेय पाणिनि केवल महादेव को देते है। 'अष्टाध्यायी' का एक श्लोक इस बात की पुष्टि भी करता है। वहीं इस शास्त्रीय भाषा को इसकी वैज्ञानिक संरचना के कारण भी पहचान मिली, जिसकी इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी मांग है। भारतीय कैलेंडर के अनुसार संस्कृत दिवस सावन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस प्रकार यह दिन रक्षाबंधन के दिन आता है।
संस्कृत दिवस की शुरुआत 1969 में हुई थी। इस बार संस्कृत दिवस 31 अगस्त 2023 को मनाया जा रहा है। इसके मनाने का उद्देश्य यही है कि इस भाषा को और अधिक बढ़ावा मिले। इसे आम जनता के सामने लाया जाए और हमारी युवा पीढ़ी इस भाषा के बारे में जाने व इसके बारे में ज्ञान प्राप्त करे। इसके संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ही भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 1969 में विश्व संस्कृत दिवस मनाने की घोषणा की। हालांकि इसमें रोचक बात ये है कि श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाने के कारण रोमन कैलेंडर में हर वर्ष इसकी तारीख बदलती रहती है। 2019 में यह दिवस 15 अगस्त को मनाया गया था। तो वहीं 2020 में ये दिवस 3 अगस्त को मनाया गया था।
देश के अनोखे दो गांव
हमारे देश में दो गांव ऐसे हैं जहां आज भी फर्राटेदार संस्कृत बोली जाती है। आम बोलचाल की भाषा के रूप में यहां संस्कृत का ही प्रचलन है। इन दो गांवों में एक गांव दक्षिण भारत के कर्नाटक के शिवमोग्गा के पास मत्तूर गांव और उत्तर भारत के मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित झिरी गांव है। यहां गांव का हर दुकानदार, किसान, महिलाएं यहां तक कि स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चे भी फर्राटेदार संस्कृत में बात करते हैं। यहां प्राथमिक शिक्षा के तौर पर ही संस्कृत पढ़ाई जाती है। आपको बता दें कि झिरी गांव में संस्कृत सिखाने की शुरुआत 2002 में समाज सेविका विमला तिवारी ने की थी। उनके अथक प्रयासों का परिणाम है कि लोगों को ये भाषा ऐसी पसंद आई कि आज पूरा गांव एकदम फर्राटेदार संस्कृत बोलता है।
फिल्मों और दूरदर्शन में संस्कृत
हमारे समाज में आज भी संस्कृत को सिर्फ पंडितों की भाषा ही समझा जाता है, पर यह सत्य नहीं है। 21 अगस्त, 1994 को दूरदर्शन पर भी संस्कृत समाचार आरंभ किए गए थे। यह वह दिन था जब देश में पहली बार टीवी पर संस्कृत समाचारों को लोगों ने देखा। इसको बोलने वाले व्यक्ति बलदेवानंद सागर थे, जो पहले रेडियो पर संस्कृत में समाचार पढ़ते थे। वर्तमान समय में डा. बलदेवानंद सागर विश्व संस्कृत मीडिया काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वहीं 1 जून 1866 को संस्कृत में पहली पत्रिका काशी विद्या सुधािनधि: प्रकाशित हुई थी। तब इसे आम बोलचाल में पंडित पत्रिका कहा जाता था।
फिल्मों की बात करें तो सबसे पहली फिल्म जो संस्कृत में बनी वो आदि शंकराचार्य थी जो 1983 में रिलीज हुई थी। इसके साथ ही आपको बता दें कि अभी तक लगभग 15 फिल्में संस्कृत में बन चुकी हैं। जिनमें भागवत गीता, प्रियामनासम, इश्ति, सूर्यकांत, अनुरक्ति, अगोचर्याणव आदि प्रमुख हैं।












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