सियाचिन का सच: हर माह एक सैनिक होता है शहीद
नई दिल्ली। शनिवार को सियाचिन के सिंकदर लांस नायक हनुमनथप्पा का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ कर दिया गया। लांस नायक हनुमनथप्पा जहां अब इस देश की मिट्टी में अपनी याद छोड़ गए हैं तो वहीं उनके नौ और साथी इंतजार कर रहे हैं कि कब उनके शव को सियाचिन की बर्फ की जगह उनके वतन की मिट्टी नसीब होगी।
क्या है सियाचिन की अहमियत
खराब मौसम की वजह से इंडियन आर्मी नौ शहीदों को निकाल नहीं पा रही। सियाचिन एक ऐसा ग्लेशियर जिसका नामों-निशान दुनिया के नक्शे में नहीं है, उसकी रक्षा के लिए भारत के जाबांज सैनिक हर पल तैनात रहते हैं।
नाम, नमक और निशान को आदर्श मानकर जंग लड़ने वाली भारतीय सेना एक ऐसी जगह की रक्षा कर रही है, जिसका वजूद दुनिया मानने से ही इंकार कर देती है।
नौ शहीदों के घरवालों के आगे सियाचिन का मौसम बना विलेन
आपको जानकर हैरानी होगी, इस 'बेनाम' जगह की रक्षा में हर माह भारतीय सेना का एक बहादुर सैनिक शहीद हो जाता है। वर्ष 1984 में भारत ने यहां पर अपनी सेना को तैनात किया था और तब से लेकर अभी तक यहां पर सेना मुस्तैद है। आगे की स्लाइड्स में।

हर माह एक सैनिक शहीद
भारतीय सरकार की ओर से संसद में पेश की गई रिपोर्ट पर अगर यकीन करें तो हर माह सियाचिन में एक सैनिक को शहादत हासिल होती है। वर्ष 1984 से लेकर दिसंबर 2015 तक यहां पर पिछले वर्षों में 869 सैनिक शहीद हुए हैं। अब यह आंकड़ां बढ़कर 883 हो गया है।

शहादत नहीं देखती है रैंक
शहीद हुए जवानों में 33 अधिकारी, 54 जूनियर कमिशन्ड अधिकारी और 782 अन्य रैंक के अधिकारी शामिल हैं।

क्या हैं आंकड़ें
लोकसभा आंकड़ों के मुताबिक, सियाचिन में शहीद जवानों की संख्या वर्ष 2011 में 24 से घटकर 2015 में पांच हो गई। ये सभी जवान हिमस्खलन और विपरीत जलवायु परिस्थिति की वजह से शहीद हुए।

अब तक कितना खर्च
वर्ष 2012-13 और 2014-15 के बीच कपड़े और पर्वतारोहण उपकरणों पर देश का 6,566 करोड़ रुपए (4.5 अरब डॉलर) खर्च आया है। इसमें से अधिकतर सामान सैनिकों के लिए आयात किया गया है।

दुनिया का हाइएस्ट बैटल फील्ड
सियाचिन विश्व का सबसे ऊंचा बैटल फील्ड है लेकिन यहां जवानों को दुश्मन के साथ-साथ मौसम से भी जूझना पड़ता है।सियाचिन ग्लेशियर भारत-पाकिस्तान सीमा पर हिमालय क्षेत्र में स्थित है।

पाक सैनिकों ने भी गंवाए जान
वर्ष 2012 में पाकिस्तान के सैन्य शिविर में 2012 में हिमस्खलन से 140 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 129 सैनिक भी शामिल हैं।

क्या है मुश्किल
सियाचिन की ऊंचाई 22,000 फीट है आपको बता दें कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 29,000 फीट है। सियाचिन का तापमान न्यूनतम से 45 डिग्री सेल्सिस से कम तापमान है।

कम हो जाती है याददाश्त
यहां ऑक्सीजन कम है, जिस वजह से सैनिकों की याद्दाश्त कमजोर होने की संभावना है। बोलने में दिक्कत, फेफड़ों में संक्रमण और अत्यधिक तनाव से भी जूझना पड़ सकता है। यहां बर्फ में लंबी दरारों की समस्या से भी जवानों को जूझना पड़ता है।

चीता हेलीकॉप्टर यहां बेस्ट
सियाचिन में कुछ चौकियों पर हेलीकॉप्टरों से ही जरूरी सामान पहुंचाया जाता है। सेना के हल्के चीता हेलीकॉप्टर यहां पर सप्लाई के लिए बेस्ट साबित हुए हैं।












Click it and Unblock the Notifications