Changing Names: क्यों बदले जा रहे हैं गांवों, शहरों और सड़कों के नाम

शहरों और गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में ही नहीं बल्कि देशभर में लगभग सभी राज्यों में हो रही हैं।

Gorakhpur

27 दिसंबर 2022 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के दो स्थानों के नाम बदलने के प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी मिल गई है। गोरखपुर के मुंडेरा बाजार का नाम अब 'चौरी चौरा' और देवरिया तेलिया अफगान का नाम 'तेलिया शुक्ल' हो जायेगा। गौरतलब है कि शहरों और गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में ही नहीं बल्कि देशभर में लगभग सभी राज्यों में हो रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कही थी यह बात

केंद्र सरकार ने औपनिवेशिक 'हैंगओवर' अथवा मानसिकता को दूर करने और भारतीय विरासत एवं गौरव को स्थापित करने के तरीके के रूप में नाम परिवर्तन के लिये स्पष्ट कारण दिया है। इस साल 15 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में, पीएम मोदी ने कहा था कि औपनिवेशिक मानसिकता से संबंधित प्रतीकों को दूर करने के लिये अधिकांश नाम बदल दिये गये हैं। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि राजपथ अंग्रेजों के लिए था जिनके लिए भारत के लोग गुलाम थे। यह उपनिवेशवाद का प्रतीक था। अब उसका आर्किटेक्चर बदल गया है और उसकी स्पिरिट भी बदल गयी है।

राजपथ सहित कई नामों में हुआ बदलाव

मोदी सरकार ने राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्यपथ कर दिया है। राजपथ को पहले किंग्स वे कहा जाता था। यह नाम ब्रिटेन के महाराजा जॉर्ज पंचम के सम्मान में दिया गया था। सेंट स्टीफेंस कॉलेज के इतिहास के प्रोफ़ेसर पर्सिवल स्पियर की सलाह पर किंग्स वे का नामकरण हुआ था। आजादी के बाद किंग्स वे का नाम बदलकर राजपथ कर दिया गया था, जोकि किंग्स वे का ही हिंदी अनुवाद था। इसके अलावा, साल 2022 में राजासांसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अमृतसर का नाम बदलकर श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट किया गया। बेंगलरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर बेंगलुरु केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट हो चुका है।

स्वाधीनता संग्राम के क्रांतिकारियों को मिला सम्मान

भारतीय रेल ने बीते कुछ सालों में भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महान क्रांतिवीरों को सम्मान देने के लिये रेलवे स्टेशन के नामों को उनके नाम पर बदला है। जैसे बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर कर्नाटक के 19वीं सदी के क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिवीर सांगोली रायन्ना के नाम पर रखा गया है। मुंबई स्थित एलफिंस्टन रोड रेलवे स्‍टेशन का नाम बदलकर प्रभा देवी रेलवे स्‍टेशन किया गया। इसी प्रकार, हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन हो चुका है।

इन जगहों के भी बदले गये हैं नाम

केंद्र सहित देशभर में कई राज्य सरकारों ने शहरों और गांवों को उनकी वास्तविक पहचान दिलाने के साथ-साथ इतिहास को देखते हुये भी नाम बदले हैं। जैसे हरियाणा में गुडगांव का नाम गुरुग्राम और मेवात जिले का नाम नूंह किया गया। दिल्ली में मौजूद डलहौजी रोड का नाम दारा शिकोह रोड कर दिया गया। इसी प्रकार दिल्ली की औरंगजेब रोड को अब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर जाना जाता है। वही, यूपी सरकार ने मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर कर दिया था। दरअसल, जनसंघ के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनदयाल उपाध्याय का निधन मुगलसराय रेलवे स्टेशन के नजदीक ही हुआ था।

इसी क्रम में ओडिसा के आउटर व्हीलर आईलैंड का नाम एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप रखा गया है। अंडमान और निकोबार में रॉस द्वीप को नेताजी सुभास चंद्र बोस द्वीप; हैवलॉक द्वीप को स्वराज द्वीप; और नील द्वीप को शहीद द्वीप का नाम दिया गया हैं।

केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित अरिक्कोड को अरीकोड और नागालैंड के किफाइर जिले में सनफुर गांव का नाम सामफुरे किया गया है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में राजामुंदरी का नाम राजा महेंद्र वर्मन किया गया है। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद का नाम नर्मदापुरम बदला गया है। साल 2018 में, उत्तर प्रदेश सरकार ने फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या बदलने और जिले के प्रशासनिक मुख्यालय को अयोध्या शहर में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी थी।

रेलवे ने भी इस क्रम में राबर्टगंज रेलवे स्‍टेशन का नाम सोनभद्र, गुलबर्ग रेलवे स्‍टेशन का नाम कलबुर्गी, पंकी रेलवे स्‍टेशन का नाम पंकी धाम, तिल्‍डा रेलवे स्‍टेशन का नाम तिल्‍डा नियोरा रेलवे स्‍टेशन, बाम्‍बे रेलवे स्‍टेशन का नाम मुंबई सेंट्रल, और ओशिवाड़ा रेलवे स्‍टेशन का नाम राम मंदिर रेलवे स्‍टेशन किया हैं।

वहीं अब अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ या आर्यगढ़, फर्रुखाबाद को पांचाल नगर, सुल्तानपुर को कुशभवनपुर, बदायूं को वेद मऊ, फिरोजाबाद को चंद्र नगर और शाहजहांपुर को शाजीपुर करने का विचार सरकार कर रही है।

आजादी के तुरंत बाद भी बदले गये थे कुछ शहरों के नाम

शशि थरूर ने अपने एक लेख 'बिकमिंग बैंगलौर्ड' में लिखा है कि 1947 के बाद ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के नाम वाली सड़कों को धीरे-धीरे उन लोगों के नाम पर रखा गया, जिन्होंने उनका विरोध किया था। स्वतंत्रता के बाद के पहले दशकों में, व्यावहारिक रूप से एकमात्र शहर जिसने अपने नाम की वर्तनी को बदल दिया था, वह कानपुर था। इसे अंग्रेजों ने बेतुके ढंग से कानपोर लिखा था। इसके साथ ही अंग्रेजीकृत 'पूना' भी 'पुणे' किया गया और मैसूर राज्य का नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया था, जिसे अंग्रेजों ने 'कर्नाटिक' क्षेत्र कहा था। वहीं इसी प्रकार जुबलपुर को जबलपुर में बदला गया। हालांकि यह प्रक्रिया बेहद धीमी थी।

1956 में भाषाई राज्यों का निर्माण

1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश ने 7वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से मौजूदा राज्यों के नाम बदलने सहित भाषाई राज्यों का गठन किया। त्रावणकोर-कोचीन और आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर बनाये गये नये राज्य का निर्माण हुआ जिसे आज हम केरल के नाम से जानते हैं। मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु कर दिया गया। मैसूर राज्य का नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया। आजादी के बाद के शुरुआती वर्षों में कुछ शहरों के नाम बदले गये।

जब बदला बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता का नाम

महाराष्ट्र विधानसभा में सरकार ने सन 1995 में औपनिवेशिक काल वाले बॉम्बे को खारिज कर दिया और नया नाम मुंबई रखा। मुंबई नाम के पहले दो शब्द मुंबा को अंबा देवी के नाम से रखा गया है जबकि आखिरी शब्द आई, जिसे मराठी में 'मां' कहते हैं, से मुंबई पड़ा। इसके अलावा, 17 जुलाई 1996 में मद्रास का नाम बदलकर चेन्नई रख दिया गया। फिर जनवरी 2001 में कलकत्ता को आधिकारिक तौर पर कोलकाता का नाम दिया गया। यह सभी नाम इन शहरों के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखकर बदले गये थे।

कैसे बदले जाते हैं नाम

नाम बदलने की एक पूरी प्रक्रिया होती है। भारत के किसी भी राज्य का नाम बदलने का जिक्र संविधान के आर्टिकल तीन व चार में हैं। जगहों का नाम बदलने के प्रस्तावों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय तमाम दिशा-निर्देशों का पलन करते हुये विचार करता है। इसके साथ ही किसी भी जगह का नाम बदलने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग, रेल मंत्रालय और डाक विभाग की सहमति भी ली जाती हैं। इन सब सहमतियों के बाद गृह मंत्रालय NOC (No Objection Certificate) जारी करता है। इतना ही नहीं, नाम बदलने के लिए जिस स्थान का नाम बदलना हो वहां के नाम का इतिहास भी खंगाला जाता है।

इसके बाद जगह का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र और राज्य सरकारें अपनी कैबिनेट में रखती हैं। कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद शहर के बदले नाम पर मुहर लग जाती है। इसके बाद राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल की अनुमति भी जरूरी होती है। राष्ट्रपति/राज्यपाल की अनुमति के बाद नाम बदल जाता है और फिर समस्त दस्तावेजों में नये नामकरण को दर्ज करने के लिए नोटिफिकेशन के माध्यम से सूचना दी जाती है।

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