कौन है 'भारत माता' और क्या है 'भारत माता की जय' का असली मतलब?
नई दिल्ली। 'भारत माता की जय' के बिना राष्ट्रीय पर्व का उद्दघोष पूरा नहीं होता है लेकिन क्या आप जानते हैं 'भारत माता की जय' का उद्दघोष कहां से आया है और क्या होता है इसका मतलब।
आइए जानते हैं भारत माता के बारे में विस्तार से...
- भारत को मातृदेवी के रूप में चित्रित करके उसे भारतमाता या 'भारतम्बा' कहा जाता है।
- भारतमाता को प्राय: केसरिया या नारंगी रंग की साड़ी पहने, हाथ में भगवा ध्वज लिये हुए चित्रित किया जाता है और उनकी सवारी शेर है।

काशी का भारतमाता मन्दिर
- भारत में भारतमाता के बहुत से मन्दिर हैं।
- काशी का भारतमाता मन्दिर अत्यन्त प्रसिद्ध है जिसका उद्घाटन सन् 1936 में स्वयं महात्मा गांधी ने किया था।

'भारत माता की जय'
पिछले कुछ वक्त से 'भारत माता की जय' को लेकर काफी विवाद हुआ, कुछ लोगों ने इस पर भगवाकरण का आरोप लगाया तो कुछ लोगों ने इस पर राजनीतिक रोटियां सेंकने में जरा भी देर नहीं की लेकिन अगर इतिहास पर गौर फरमाएंगे तो सच्चाई इससे बहुत अलग है। 'भारत माता की जय' भारतीय स्वाधीनता संग्राम के समय सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाला नारा था।

इस नारे का बार बार प्रयोग किया
भारत भूमि को जीवन का पालन करने वाली माता के रूप में रूपायित कर उसकी मुक्ति के लिए की गई कोशिशों में उसकी संतानों ने इस नारे का बार बार प्रयोग किया। भारत माता की वंदना करने वाली यह उक्ति हर उद्दघोष के साथ स्वाधीनता संग्राम के सिपाहियों में नए उत्साह का संचार करती थी। इसलिए आज भी इस नारे का प्रयोग राष्ट्रप्रेम या राष्ट्र निर्माण से जुड़े अवसरों, कार्यक्रमों एवं आंदोलनों में किया जाता है।

लेखक किरण चन्द्रबनर्जी
सन 1873 में लेखक किरण चन्द्रबनर्जी ने अपने नाटक 'भारत-माता' के लिए इस शब्द का उपयोग किया गया था। उस समय बंगाल में दुर्गा पूजा, लोगों को एकजुट करने और स्वराज पर चर्चा करने का एक माध्यम बनी थी| इस बीच बंगाल के लेखकों, साहित्यकारों और कवियों के लेखों और रचनाओ में मां दुर्गा का गहरा प्रभाव रहा था और इन लेखकोंं द्वारा लिखे गए लेखों, नाटकों में भी भारत को दुर्गा की तर्ज पर मां और मातृभूमि कहकर सम्बोधित किया जाने लगा।

अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने बनाई थी पहली फोटो
इसके बाद वर्ष 1905 में अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने भारत माता का एक चित्र बनाया। इसे भारत माता की पहली तस्वीर माना जाता है। चित्र में भारत का नक्शा नहीं था। भारत माता भगवा रंग के बंगाल के परंपरागत परिधान में दिखाई गईं। शुरू में इसे बंग माता भी कहा गया। चार हाथों वाली देवी के हाथों में किताब, धान की पुली, माला और सफेद वस्त्र था।












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