1965 की जंग में जब लाहौर तक पहुंच गई थी इंडियन आर्मी
बेंगलुरु। भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1965 की जंग का जिक्र 50 वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी होता है। दुनिया आज तक मानती है कि वाकई उस युद्ध में भारतीय सेनाओं ने अपनी बहादुरी का प्रदर्शन किया था।

तो आज लाहौर होता भारत में
दुनिया के देशों के सामने सिर्फ भारत बल्कि भारतीय सेनाएं एक मजबूत एशियन ताकत के तौर पर उभरी थी। आपको जानकर हैरानी होगी आज जो पाकिस्तान कश्मीर को अपने कब्जे में लेने की बात करता है उस समय लाहौर को भी नहीं बचा सका था। 65 की जंग में भारतीय सेना लाहौर तक पहुंच गई थी।
लाहौर की जमीन भारत के कब्जे में
भारतीय सेनाओं ने 65 की जंग में लाहौर शहर के कुछ हिस्सों को अपने कब्जे में कर लिया था। भारत ने पाक की 690 स्क्वायर मील की जमीन पर अपना कब्जा कर लिया था। वहीं पाक ने भारत की 250 स्क्वायर मील की जमीन को अपने कब्जे में लिया था।
उस समय इस जंग को लाहौर की लड़ाई नाम दिया गया था। इस युद्ध का अंत हालांकि पाक की जीत के साथ हुआ था। भारतीय सेना को पीछे हटना पड़ गया क्योंकि उस समय भारत को सीजफायर साइन करना था।
सीजफायर समझौते के तहत भारत को लाहौर, पाक को वापस करना पड़ता। लाहौर का बर्की कैंट उस समय भारतीय सेना के कब्जे में था।
पाक ने पंजाब तक बनाई अपनी पकड़
कश्मीर में ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम के साथ ही साथ पाकिस्तान ने पंजाब पर भी अपना कब्जा करने की कोशिश की। पाक की सेनाएं पंजाब तक में दाखिल हो गई थीं।
उस समय पाक के सेना प्रमुख जनरल अयूब खान का मानना था कि अगर कश्मीर की आवाम उनके साथ आ गई तो फिर भारत पर दबाव आसान रहेगा। लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
चीन ने दी भारत को धमकी
65 की जंग से पहले वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हो चुका था। चीन उस समय पाक का सबसे अहम दोस्त था। भारत युद्ध तो लड़ रहा था लेकिन उसे डर था कि कहीं चीन भी इसमें शामिल न हो जाए। चीन ने धमकी दी थी कि अगर भारत ने युद्ध बंद नहीं किया तो फिर उसकी वॉर शिप्स उसके लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।












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