White Paper: क्या होता है श्वेतपत्र, देश और दुनिया में कितनी बार लाया गया?
White Paper: संसद के बजट सत्र में मोदी सरकार ने 8 फरवरी को पिछली यूपीए सरकार के शासन काल में आर्थिक कुप्रबंधन पर श्वेत पत्र जारी किया।
इस श्वेतपत्र में केंद्र सरकार ने साल 2004 से 2014 की आर्थिक नीतियों और मनमोहन सिंह सरकार के निर्णयों से पड़े हानिकारक प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

जानते हैं कि श्वेतपत्र क्या होता है और द चर्चिल पेपर से इसका क्या संबंध है? देश और दुनिया में कब कब श्वेतपत्र लाया गया?
श्वेत या व्हाइट पेपर क्या है?
श्वेत या व्हाइट पेपर किसी देश या राजनेताओं की ओर से किसी चुनौतीपूर्ण मुद्दे पर जानकारी देने के लिए जारी की गई एक डिटेल्ड रिपोर्ट का काम करता है। किसी चुनौतीपूर्ण मुद्दे पर जब एक साथ कई दृष्टिकोण आते हैं तो लोगों के लिए उसे समझने में मुश्किल होती है। आमतौर पर, उसी परिस्थिति में श्वेत पत्र जारी किया जाता है।
इस दस्तावेज के जरिए मुद्दों को स्पष्ट किया जाता है, उस पर चर्चा की जाती है और हल ढूंढे जाते हैं। चर्चा के बाद कार्रवाई के सुझाव दिए जाते हैं और निष्कर्ष भी निकाले जा सकते हैं। श्वेत पत्र जैसी सूचनात्मक रिपोर्ट सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और मुद्दों पर प्रकाश डालती है। स्टैनफोर्ड लॉ स्कूल के मुताबिक, सरकारी कागजात वितरण के लिए रंग-कोडित होते हैं और सार्वजनिक पहुंच के लिए सफेद रंग को चिन्हित किया गया है।
श्वेतपत्र की अहमियत
राजनेताओं के लिए सार्वजनिक नीतियों पर अपनी राय जाहिर करने और उन्हें जनता तक पहुंचाने के साधन के रूप में श्वेतपत्र बड़ा काम करता है। इसलिए लोकतांत्रिक देशों में श्वेतपत्र काफी अहम है। श्वेतपत्र में शामिल दस्तावेज कई रंगों में होते हैं। इन्हीं रंगों के हिसाब से दस्तावेजों का वितरण किया जाता है।
माना जाता है कि श्वेतपत्र जारी करने से अलग-अलग नीतियों पर जनता की राय को बढ़ावा मिलता है। श्वेतपत्र न केवल तब जारी किए जाते हैं, जब स्पष्टता की कमी होती है, बल्कि तब भी जारी किए जाते हैं जब सुधार की मांग की जाती है। इसमें कई विषयों को कवर किया जा सकता है।
इसके अलावा जवाबदेही निभाने के मामले में भी श्वेतपत्र को जारी किया जाता है। संस्था, संगठन और बड़ी कंपनियां भी अक्सर प्रोडक्ट्स या टेक्नोलॉजी को दुनिया के सामने पेश करने के लिए श्वेतपत्र जारी करती हैं।
देश और दुनिया में कब-कब आया अहम श्वेतपत्र
ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने साल 1922 में एक दंगे पर अपने दृष्टिकोण को व्यक्त करने के लिए दुनिया का पहला श्वेतपत्र जारी किया था। यह दस्तावेज बाद में चर्चिल व्हाइट पेपर (Churchill White Paper) के नाम से मशहूर हुआ। बहुत साल बाद तक यही शब्द बोले जाते रहने के बाद अब सिर्फ व्हाइट पेपर या श्वेतपत्र कहा जाने लगा है।
भारत में सबसे पहले साइमन कमीशन की सिफारिशों के आधार पर 'संवैधानिक सुधारों पर श्वेतपत्र' तैयार किया गया था। उसे ब्रिटिश संसद की संयुक्त चयन समिति के सामने विचार के लिए पेश किया गया था। श्वेतपत्र के जरिए साल 1929 के भारत सरकार अधिनियम में और अधिक सुधारों का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें भारत में सरकार की संघीय प्रणाली की स्थापना के प्रावधान भी शामिल थे।
स्वतंत्रता के बाद भारत में पहला श्वेतपत्र साल 1948 में जारी किया गया था। इसमें रियासतों के भारत में विलय से जुड़ी जानकारी थी। साल 1950 में देश के पहले बजट के दौरान भी श्वेतपत्र पेश किया गया था। नरेंद्र मोदी की सरकार ने भी 2014 में रेलवे में राजस्व और किराए से जुड़े श्वेतपत्र पेश किए थे।
केंद्र सरकार द्वारा आखिरी श्वेतपत्र साल 2020 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय ने जारी किया था। मार्च, 2023 में हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने आर्थिक नीतियों पर श्वेतपत्र लाने की बात कही थी। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता जयराम ठाकुर ने इसका स्वागत किया था।
बाहर के देशों में श्वेत पत्र
ऑस्ट्रेलिया में पूर्ण रोजगार पर साल 1945 में और यूनाइटेड किंगडम में 1939 और 1966 का रक्षा श्वेत पत्र लाया गया था। इजरायल के इतिहास में 1939 का ब्रिटिश श्वेत पत्र ब्रिटिश नीति में जियोनिज्म के खिलाफ एक बहुत बड़े टर्न को दिखाता है। कनाडा जैसे कई देशों में श्वेतपत्र के जरिए सीधे जनता को सूचित किया जाता है।
वैश्विक महामारी के बाद चीन ने एक श्वेतपत्र जारी कर कहा था कि कोविड-19 के दौरान उसकी ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई। चीन ने किसी भी दोष से बचने के मकसद से तुरंत दुनिया के साथ पूरी जानकारी साझा करने का दावा किया था।
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