Donkey Route: क्या है असली डंकी रूट, जिससे अमरीका में घुसते हैं अवैध अप्रवासी
Donkey Route: हाल ही में सिनेमा के परदे पर आई फिल्म "डंकी" में पंजाब के एक छोटे से गाँव लालतू से चार दोस्तों द्वारा बिना टिकट और वीज़ा के डंकी रूट से विदेश जाने की कहानी दिखाई गई है। क्या आप जानते हैं क्या है असली डंकी रूट, कितना जोखिम है इसमें ?
क्या है डंकी रूट?
डंकी रूट एक खतरनाक और अवैध आव्रजन मार्ग है जिसका उपयोग बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों तक पहुंचने के लिए करते हैं। पंजाबी शब्द "डंकी" का अर्थ है एक स्थान से दूसरे स्थान पर छलांग लगाना। बिना वीजा और टिकट के, दूसरे कई देशों में रुक रुक कर अवैध रास्तों से सीमा पार करना छलांग लगाने जैसा ही है। इस डंकी मार्ग का अक्सर उपयोग वे लोग करते हैं, जो अमेरिका में जाकर पैसा कमाने और वहाँ की चकचौध वाली जिंदगी जीने का सपना देखते हैं। डंकी रूट पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात के लोगों में ज्यादा प्रचलित है, लेकिन अब इसका विस्तार अन्य राज्यों के लोगों में भी हो चुका है।

डंकी रूट में क्या है जोखिम?
डंकी रूट का इस्तेमाल करने में कई सारे जोखिम शामिल हैं। अवैध तरीके से किसी देश में घुसने और पकड़े जाने के बाद जेल जाने से लेकर निर्वासन (डिपोर्ट) का खतरा शामिल है। फिर जान जाने का भी खतरा होता है, क्योंकि इस रूट में जंगलों, नदियों और समुद्रों से होकर गुजरना पड़ता है। इस मार्ग में कई देशों के सुरक्षा अधिकारियों से बचना और बिना भोजन के कई दिन गुजारना भी शामिल होता है। न तो साफ पानी पीने को मिलता है और न सांस लेने के लिए खुली हवा ही मिलती है। जंगली जानवर, आपराधिक गिरोह, डकैती और यहाँ तक कि बलात्कारियों से भी सामना होने का खतरा रहता है। डंकी रूट का इस्तेमाल कराने वाले एजेंट्स भी किसी खतरे के समय मदद के लिए नहीं मिलते। उसके बावजूद लोग इन एजेंटों को मुंह मांगे पैसे देने के लिए अपनी जमीनें और संपत्ति बेच देते हैं।
डंकी रूट के प्रमुख चरण
● लैटिन अमेरिका: भारत से सबसे लोकप्रिय डंकी रूट का पहला पड़ाव किसी लैटिन अमेरिकी देश तक पहुंचना है। इक्वाडोर, बोलीविया और गुयाना जैसे देशों में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा ऑन अराइवल की सुविधा उपलब्ध है। ब्राज़ील और वेनेजुएला सहित कुछ अन्य देश भी आसानी से वीज़ा प्रदान कर देते हैं।
● ग्वाटेमाला: ग्वाटेमाला इस रूट पर एक बड़ा केंद्र है। मेक्सिको में प्रवेश करने और अमेरिकी सीमा की ओर यात्रा जारी रखने के लिए प्रवासियों को यहां नए तस्करों को सौंप दिया जाता है। अब यहां से लुका-छिपी का खेल शुरू होता है, क्योंकि प्रवासियों को मैक्सिको से गुजरते समय कड़ी सुरक्षा से बचकर निकलना पड़ता है।
● मेक्सिको और अमेरिकी सीमा: एक बार मेक्सिको में प्रवेश करने के बाद, प्रवासियों को अमेरिकी सीमा तक पहुंचने के लिए खतरनाक इलाके और कठोर परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। यदि वे सफल होते हैं, तो वे अमेरिका में शरण या अन्य प्रकार की कानूनी स्थिति के लिए आवेदन कर सकते हैं।
डंकी रूट से संबंधित कुछ आंकड़े!
अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (यूएससीबीपी) के अनुसार, भारतीय नागरिक दक्षिण पश्चिम सीमा से अमेरिका में प्रवेश करने वाले अवैध प्रवासियों की पाँचवी सबसे बड़ी जमात है। यूएससीबीपी के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 के बीच 96,917 भारतीयों को अवैध रूप से अमेरिका में सीमा पार करते हुए पकड़ा गया। इनमें से 30,010 को कनाडा सीमा पर और 41,770 को मैक्सिको सीमा पर पकड़ा गया। यूएससीबीपी का हवाला देते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2019 और मार्च 2023 के बीच, अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने के प्रयास में 1,49,000 भारतीयों को हिरासत में लिया गया था। इनमें अधिकतर लोग गुजरात और पंजाब से थे। प्यू रिसर्च सेंटर के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, अमेरिका में 7,25,000 से अधिक भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं।
करणी सेना प्रमुख का हत्यारा भी डंकी रूट से भागा!
5 दिसंबर 2023 को राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के मास्टरमाइंड रोहित गोदारा ने भी भारत से भागने और अमेरिका पहुंचने के लिए "डंकी रूट" का इस्तेमाल किया था। रिपोर्ट के अनुसार, रोहित गोदारा ने अमेरिका में उतरने से पहले एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए "डंकी रूट" का उपयोग किया था।
ऐसा ही एक मामला जुलाई 2023 में भी सामना आया था जब एक 26 वर्षीय गैंगस्टर दीपक पहल उर्फ बॉक्सर ने 23 अगस्त, 2022 को उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में एक बिल्डर की हत्या के बाद भारत से भागने के लिए "डंकी रूट" का इस्तेमाल किया था, हालांकि, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने एक अभियान चलाकर बॉक्सर को मैक्सिको के एक हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया था।
डंकी रूट की जितेंद्र की कहानी!
2018 में जितेंद्र नाम के व्यक्ति ने डंकी रूट के सहारे अमेरिका पहुंचने की कोशिश की लेकिन 11 महीने हिरासत केंद्र में बिताने के बाद उसे वापस भारत लौटना पड़ा। जितेंद्र ने इंडिया टुडे को बताया कि "हमने अपना खेत बेच दिया और किसी तरह ₹40 लाख इकट्ठा किए। डंकी रूट से यात्रा इक्वाडोर से शुरू हुई। हमने पूरे दिन यात्रा की, कभी बस से तो कभी कार से। कई बार तो एजेंट हमें होटल में छोड़कर गायब हो जाता था। एक बार हमें छह दिनों के लिए एक कमरे में बंद कर दिया गया था। वह हमारे लिए खाना लाते थे, लेकिन हमें बाहर निकलने नहीं दिया जाता था।" जितेंद्र ने बताया कि "एक बार, हम सात दिनों के लिए जंगल में फंसे हुए थे। लंबी घास और घने पेड़ों वाला जंगल था। वहाँ दिन में भी अंधेरा रहता था और अचानक बारिश शुरू हो जाती थी। बहुत सारे साँप, बिच्छू और जहरीली मकड़ियाँ थीं।
जितेंद्र बताते है कि डंकी रूट पर उनके साथ 32 लोगों के समूह में नेपाली और बांग्लादेशी भी थे। जंगल में हमसे माफिया भी टकराते थे। तीन बार हमारी मुलाकात ठगों से हुई। हमारे मोबाइल फोन और पैसे छीन लिये। हमारे कपड़े और जूते भी लूट लिए। कड़ाके की ठंड में बिना जैकेट और जूतों के कई दिन चलना पड़ा। भले ही हमारे पैर सुन्न हो गए हों, हम सुरक्षित स्थान पर पहुंचने तक नहीं रुक सकते थे। वे अमेरिका तो पहुंच गए, लेकिन मुसीबत कम नहीं हुई। दीवार फांदने की कोशिश में अमेरिकी सीमा गश्ती दल ने पकड़ लिया। छह दिनों तक बिना कपड़ों के रखा। शरीर ढकने के लिए चांदी की पन्नी जैसा कुछ दिया गया।
ऐसी अनेक पीड़ादायक कहानियां अवैध रूप से अमरीका या कनाडा में घुसने की कोशिश करने वाले लगभग सभी भारतीयों की हैं। कई लोग तो अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही परिवार सहित मारे गए। लेकिन इन सब दर्दनाक घटनाओं के बावजूद दुनिया भर के लोगों में अपना भविष्य संवारने की चाह में अमरीका, कनाडा या यूरोप पहुंचने की होड़ लगी रहती है। उनके इस क्रेज का फायदा वे एजेंट उठाते हैं जो उन्हें बिना वीजा विदेश पहुंचाने के नाम पर लाखों रुपए ऐंठ लेते हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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