Direct Taxes: क्या है प्रत्यक्ष कर और उसके प्रकार, जानें सरकार की इससे कुल कमाई

Direct Taxes: भारत सरकार दो तरीकों से टैक्स (कर) लेती है। पहला प्रत्यक्ष कर के रूप में और दूसरा अप्रत्यक्ष कर के माध्यम से। प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने हाल ही में कर संग्रह पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। जिसके अनुसार 2023-24 की पहली तिमाही (1 अप्रैल से 17 जून) में प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹379,760 करोड़ हो गया है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में यह ₹341,568 करोड़ था। यानि प्रत्यक्ष कर संग्रह में 11.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस प्रत्यक्ष कर संग्रह में ₹156,949 करोड़ कॉरपोरेट टैक्स (सीआईटी) व प्रतिभूति लेन-देन कर (एसटीटी) सहित ₹222,196 करोड़ रूपये व्यक्तिगत आयकर (पीआईटी) द्वारा संग्रह किये गये हैं।

आपको बता दें कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्रत्यक्ष करों का शुद्ध संग्रह ₹741,945 करोड़ था, जो वित्तीय वर्ष 2022-23 तक 123.87 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ ₹16.61 करोड़ पहुंच गया है।

What is direct tax and its types, know the total earning of the government

प्रत्यक्ष कर क्या होता है?

प्रत्यक्ष कर का भुगतान सरकार को सीधे किया जाता है। अर्थात करदाता व सरकार के मध्य कोई अन्य नहीं होता। जबकि अप्रत्यक्ष कर सीधे सरकार को भुगतान न कर किसी अन्य व्यक्ति अथवा ईकाई को किया जाता है। फिर वह व्यक्ति/ईकाई उस कर की राशि का भुगतान सरकार को करती है।

प्रत्यक्ष करों के प्रकार

आयकर अर्थात इनकम टैक्स - जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि यह आय पर लगने वाला कर है। यह व्यक्ति की आय के अनुसार सरकार द्वारा निर्धारत आयकर स्लैब के माध्यम से लिया जाता है।

कॉरपोरेट अर्थात निगम टैक्स - कंपनियों व शेयरधारकों को अपनी आय पर कॉरपोरेट टैक्स का भुगतान करना अनिवार्य होता है। इसके अलावा भारत में कार्यरत विदेशी कंपनियों पर भी यह कर लागू होता है। इसमें संपत्ति की बिक्री द्वारा प्राप्त आय, तकनीकी सेवा शुल्क, रॉयल्टी, लाभांश या ब्याज द्वारा आय जैसे कर शामिल होते हैं।

प्रतिभूति लेन-देन (सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स-एसटीटी) कर - शेयर बाजार में शेयर खरीदने या बेचने पर जो कर लगता है, उसे एसटीटी कहते हैं। यह वित्त अधिनियम, 2004 के अनुसार अनिवार्य है। यह भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध प्रतिभूतियों की खरीद व बिक्री पर लगाया जाता है।

लाभांश वितरण कर (डिविडेंट डिस्ट्रीबुशन टैक्स-डीडीटी) - डीडीटी यानि लाभांश वितरण कर घरेलू निगमों/कंपनियां पर जब लगाया जाता है तब वे शेयरधारकों से लाभांश, वितरित अथवा प्राप्त करते है। यह अंतरराष्ट्रीय निगमों/फर्मों पर नहीं लगया जाता।

पूंजीगत लाभ कर - यह कर संपत्ति या निवेश की बिक्री से अर्जित आय पर लगाया जाता है। इसे कैपिटल गेन टैक्स कहते हैं। संपत्ति, व्यवसाय, शेयर, कला, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड आदि में निवेश को पूंजीगत संपत्ति माना जाता है।

प्रत्यक्ष कर के लाभ और नुकसान

प्रत्यक्ष कर के माध्यम से समानता को बढ़ावा मिलता है। दरअसल, कम आय वाले लोग कम टैक्स भरते हैं जबकि ज्यादा आय वालों से अधिक टैक्स वसूला जाता है। उच्च आय वालों से मिलने वाले टैक्स का उपयोग गरीबों के कल्याण एवं देश के विकास में होता है।

पिछले पांच वर्षों में प्रत्यक्ष कर शुद्ध संग्रह

वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्रत्यक्ष करों का शुद्ध संग्रह ₹741,945 करोड़ था, जो 2016-17 में लगभग 14.52 प्रतिशत बढ़कर ₹849,713 करोड़ हो गया। वहीं 2017-18 में भी 2016-17 के मुकाबले 17.09 प्रतिशत बढ़ते हुए प्रत्यक्ष करों का शुद्ध संग्रह ₹9.95 लाख करोड़ हो गया था। जबकि वित्तीय वर्ष 2018-19 में मामूली बढ़त्त 1.50 प्रतिशत के बाद यह ₹10.09 लाख करोड़ पहुंच गया।

वित्तीय वर्ष 2019-20 के प्रत्यक्ष करों के शुद्ध संग्रह में गिरावट देखी गयी और यह घटकर ₹9.56 लाख करोड़ पहुंच गया। यह गिरावट 2020-21 में भी जारी रही। इस दौरान देश के कई हिस्सों में लॉकडाउन लगा हुआ था और अर्थव्यवस्था का चक्का थमा हुआ था। जिस कारण वित्त वर्ष 2020-21 में प्रत्यक्ष करों का शुद्ध संग्रह ₹9.18 लाख करोड़ रहा।

लॉकडाउन हटने के बाद 2021-22 में प्रत्यक्ष करों का शुद्ध संग्रह में तेजी देखी आने लगी और यह 2020-21 के मुकाबले 48.40 प्रतिशत बढ़कर ₹13.63 लाख करोड़ पहुंच गया। यह बढ़त्त वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी रही और 21.86 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ प्रत्यक्ष करों का शुद्ध संग्रह ₹16.61 लाख करोड़ हो गया।

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