'अंगुठी' केवल प्यार-श्रृंगार-वेल्थ ही नहीं हेल्थ भी देती हैं, कैसे?
अंगूठी बिना शादी की शुरूआत नहीं होती क्योंकि रिंग सेरोमनी से ही रिश्ते जुड़ने की पहल होती है, इसे प्यार का पहला तोहफा भी कहते हैं। यही नहीं महिलाओं के अभिन्न श्रृंगार का हिस्सा भी है अंगूठी। लेकिन आप में से बहुत कम लोग इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व जानते होंगे।
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आईये आपको बताते हैं हाथों की उंगलियों के श्रृंगार 'अंगुठी' के बारे में
- महिलाओं के 16 श्रृंगारों में से 12 नंबर रिंग या 'अंगुठी' का होता है।
- सगाई की अंगूठी हमेशा तीसरी नंबर की फिंगर में पहनी जाती है जिसे कि रिंग फिंगर कहते हैं क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि इस उंगली की नस सीधे दिल से जुड़ी होती है।
- अंगूठी पहनने से हाथों की उंगलियों पर एक समान प्रेशर बना रहता है जो कि उस हिस्से के रक्त-चाप को दुरूस्त रखता है जिससे महिलाओं और पुरूषों का रक्तचाप सही रहता है, यही कारण है ज्यादा गहने पहनने वाले लोगों को बीपी की शिकायत कम होती है।
- अंगूठी अगर सोने की हो तो ये इंसान को खुशी और तरक्की का एहसास कराती है।
- अंगूठी अगर चांदी की हो तो ये इंसान को धैर्य प्रदान कराती है।
- अंगूठी अगर मोती की हो तो ये इंसान के क्रोध को शांत रखती है।
- अंगूठी अगर हीरे की हो तो ये इंसान को धनी होने का मानसिक एहसास तो कराती ही है बल्कि इंसान के दिमाग को भी स्वस्थ रखती है क्योंकि हीरे के कारण निगेटिव विचारों और नकारात्मक ऊर्जा का अंत होता है।
- हाथ की छोटी फिंगर में रिंग पहनने से छाती के दर्द और अस्थमा से फायदा मिलता है।
- तांबे की अंगूठी पहनने वाला व्यक्ति भी पेट के रोगों से मुक्त रहता है।












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