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Badrinath and Kedarnath: कब और क्यों बंद रहते है केदारनाथ व बद्रीनाथ मंदिर

केदरानाथ मंदिर के कपाट 25 अप्रैल को और बद्रीनाथ के कपाट 27 अप्रैल को खुल गये। साल में छह महीनों तक बंद रहने वाले इन मंदिरों में 15-20 लाख लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।

uttarakhand Badrinath and Kedarnath kapat opening and closing history

Badrinath and Kedarnath: केदारनाथ धाम उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है और भगवान शिव के बारह ज्योर्तिर्लिंगों में से एक है। इसके अलावा यह चार धामों व पंच केदारों में से भी एक धाम है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत काल में पाण्डवों द्वारा इसका निर्माण किया गया था और बाद में आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार किया था। जून 2013 में आयी प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित यही मंदिर हुआ था।

वहीं उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु का मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु के 24 अवतारों के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। इसके निर्माण के कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं मिलते है। अनुमान है कि इसका निर्माण 7वीं से 9वीं सदी में हुआ था। पुराणों के अनुसार आदि शंकराचार्य ने नारद कुण्ड से विष्णु भगवान की मूर्ति को निकालकर यहां स्थापित किया था।

हिन्दुओं के ये दोनों प्रसिद्ध मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ हेतु सीमित अवधि के लिए ही खुलते हैं। अभी 25 अप्रैल 2023 को केदारनाथ धाम के कपाट खुले हैं जबकि दो दिन बाद 27 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल गये। आइये जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों है कि इन दोनों मंदिरों के कपाट सीमित अवधि के लिए खुलते है और बाकी समय मंदिर में क्या होता है?

पंचांग के आधार पर खुलते व बंद होते हैं कपाट

केदारनाथ मंदिर के खुलने व बंद होने का निर्णय ज्योतिष शास्त्र पर निर्भर करता है। मंदिर के कपाट खुलने का निर्णय अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर निर्भर करता है और पंचाग की गणना के उपरांत उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर के पुजारियों द्वारा तारीख व समय निर्धारित किया जाता है, जिसकी घोषणा महाशिवरात्रि को होती है। इस वर्ष 25 अप्रैल 2023 की प्रातः 6.20 बजे मंदिर में विशेष पूजा उपरांत केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले।

केदारनाथ मंदिर के कपाट दीपावली के 2 दिन बाद यानि भैयादूज को बंद कर दिये जाते हैं। जो लगभग 6 महीनों तक बंद रहते हैं। इन 6 महीनों में बाबा केदारनाथ की पूजा ओंकारेश्वर मंदिर में होती है। 2023 में केदारनाथ धाम के कपाट 14 नवंबर को बंद होंगे। बंद होने की तिथि की घोषणा विजयदशमी को होती है।

वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की घोषणा राजदरबार नरेंद्र नगर में बंसत पंचमी को पंचांग गणना के बाद तय होती है। वैसे अधिकांशतः बद्रीनाथ के कपाट केदारनाथ के कपाट खुलने के दो दिन बाद खुलते हैं। कपाट बंद होने का समय दोनों का एक ही होता है। इस वर्ष बद्रीनाथ कपाट 27 अप्रैल को सुबह 7.10 बजे खुलेंगे व 14 नवंबर 2023 को बंद होंगे।

इसके अलावा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत यु़द्ध के उपरांत पांडवों ने पित्रों का कर्मकांड किया तथा भैयादूज के दिन वे स्वर्ग सिधारे। इसलिए भैयादूज को इन दोनों मंदिरों के कपाट कंद कर दिये जाते हैं।

कपाट बंद होने का आधार

उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग व चमोली जिलों में यह दोनों मंदिर स्थित है। अक्टूबर-नवंबर महीनों में यहां बर्फवारी शुरू हो जाती है। जिसके चलते आवागमन के सभी रास्ते बाधित होते हैं। इसलिए इन मंदिरों को लगभग 6 महीनों के लिए बंद कर दिया जाता है और भगवान शिव की पवित्र मूर्ति को उखीमठ (ओंकारेश्वर मंदिर) में स्थानांतरित कर दिया जाता है। लगभग 6 महीनों तक बाबा केदारनाथ की पूजा यहीं पर होती है और कपाट खुलने से पूर्व इन्हें पुनर्स्थापित कर दिया जाता है।

जबकि बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के उपरांत बद्रीनाथ भगवान की पूजा जोशीमठ के नरसिम्हा मंदिर में स्थित बद्री विशाल 'उत्सव मूर्ति' के रूप में चलती है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के दरवाजे बंद करने से पूर्व पुजारी गर्भगृह में मूर्ति के सामने एक दीपक जलाते हैं, जो छह महीने बाद भी मंदिर खुलने पर जलता हुआ दिखाई देता है।

मंदिर हेतु सरकारी उपक्रम

बद्रीनाथ मन्दिर को उत्तराखंड बनने के पूर्व उत्तर प्रदेश राज्य सरकार अधिनियम 30/1948 में मन्दिर अधिनियम संख्या 16/1939 के तहत शामिल किया गया था, जो बाद में "श्री बद्रीनाथ तथा श्री केदारनाथ मन्दिर अधिनियम" से जाना जाने लगा। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा नामित समिति 'बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति' दोनों मंदिरों का प्रबंधन करती है। इस समिति का गठन 1939 एक्ट के अनुसार किया गया।

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    'बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति' मंदिरों के संचालन के साथ-साथ संस्कृत भाषा के उन्नयन हेतु सात संस्कृत विद्यालयों का संचालन करती है। इन विद्यालयों में छात्रों को निशुल्क छात्रावास एवं छात्रवृति की सुविधा मिलती है। साथ ही एक आयुर्वेदिक फार्मेसी विद्यालय (गुप्तकाशी, विद्यापीठ) का संचालन भी करती है। इसके अलावा समिति 45 अन्य अधीनस्थ मंदिरों और 20 धर्मशालाओं का रखरखाव करती है जो कि श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ यात्रा मार्ग में स्थित हैं।

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