US Debt: सबसे बड़ी इकोनॉमी अमेरिका भारी कर्जे में, फ्री में बांटने का नतीजा
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन आजकल मुश्किलों में है। उनकी डेमोक्रेटिक सरकार ने अमेरिकी नागरिकों को लुभाने के चक्कर में मुफ्तखोर बना दिया है। सरकारी लाभों को बांटने के चक्कर में अब यह देश आर्थिक संकटों में घिरने लगा है।

US Debt: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका इन दिनों भारी ऋण के संकट से जूझ रहा है। इसकी वजह से राष्ट्रपति जो बाइडेन को अपने विदेशी दौरे तक रद्द करने पड़ रहे हैं। राष्ट्रपति बाइडेन, क्वाड देशों की बैठक के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने वाले थे। इसके बाद उनका पापुआ न्यू गिनी का भी एक दौरा प्रस्तावित था। मगर अमेरिका में गहराते गंभीर आर्थिक संकटों के चलते उन्होंने अपने दोनों ही दौरे निरस्त कर दिये हैं। हालांकि, राष्ट्रपति बाइडेन 19 मई से 21 मई के बीच प्रस्तावित जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जापान जायेंगे।
गौरतलब है कि एक तरफ अमेरिका दुनिया की सबसे विकसित और मजबूत अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल किये हुए है। वहीं दूसरी तरफ उसके ट्रेजरी डिपार्टमेंट यानी वित्त मंत्रालय के पास बिलों के भुगतान के लिए डॉलर खत्म हो गये हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री की मानें तो अगर स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो देश एक जून तक डिफॉल्ट हो सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके विनाशकारी परिणाम होंगे।
कितना है अमेरिका पर कर्ज?
अमेरिकी सरकार और अमेरिकी नागरिकों दोनों पर दुनियाभर का भारी-भरकम कर्जा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऐसी कोई भी संस्था नहीं है जो बढ़ते अमेरिकी कर्जे की ओर इशारा न करती हो। Statista के मुताबिक अप्रैल 2023 में संयुक्त राज्य का सार्वजनिक ऋण लगभग $31.4 ट्रिलियन पहुंच गया है। जो एक साल पहले की तुलना में लगभग एक ट्रिलियन अधिक है। तब यह $30.4 के आसपास था।
पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के मुताबिक अमेरिका हर दिन अपने ऋणों पर $1.3 बिलियन ब्याज खर्च कर रहा है। 10 सालों में कर्जा भी लगभग तीन गुना हो चुका है। साल 2022 में अमेरिकी सरकार की कुल आमदनी $4.9 ट्रिलियन थी, जबकि खर्च $6.3 ट्रिलियन। आज की तारीख में अमेरिका के प्रति व्यक्ति पर $94,174 का ऋण है।
वहीं PEW रिसर्च सेंटर की माने तो साल 2022 में अमेरिका पर जीडीपी का 121 प्रतिशत का ऋण था। इससे समझा जा सकता है कि वहां की सरकार अपने खर्चों के लिए किस हद तक कर्जों पर निर्भर रहती है।
अमेरिका पर दो तरह का कर्ज है:
● जनता द्वारा धारित ऋण (DHBP) - इसके तहत अमेरिका किसी व्यक्ति, निगम, कंपनी, पड़ोसी देशों, किसी राज्य या स्थानीय सरकारों से ऋण लेता है। फ़िलहाल इसकी हिस्सेदारी 78 प्रतिशत है।
● सरकार का अपना ऋण या अंतर सरकारी ऋण - इसके तहत सरकार अपने ही किसी सामाजिक कार्य के लिए रखे गये पैसे को ऋण के तौर पर लेकर खर्च करती है। जैसे भारत के लिहाज से समझें तो आरबीआई, भारत सरकार को खर्च के लिए ऋण देता है।
अमेरिका में ऋण का इतिहास
जर्मन वेबसाइट DW की खबर के मुताबिक अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस ने 1917 में पहली बार ऋण की सीमा पेश की थी। यह पूंजी की वह अधिकतम ऊपरी सीमा है, जो सरकार उधार ले सकती है। इस उपाय को लागू करने का मकसद यह था कि सरकार को हर बार ऋण लेने के लिए संसद से अनुमति नहीं लेनी होगी। बाद में 1939 और 1941 में सार्वजनिक ऋण अधिनियम पारित किए गये।
अभी तक अमेरिका में ऋण सीमा को 1960 से 78 बार बढ़ाया जा चुका है। जैसे आजकल अमेरिका में फिर से ऋण सीमा बढ़ाने पर हंगामा मचा हुआ है। इसी तरह साल 2011 में भी ऋण सीमा बढ़ाने को लेकर खूब चर्चा हुई थी। तब डेमोक्रेटिक पार्टी के बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति थे। हालांकि, उस साल नयी सीमा पर सहमति बनने में हुई देरी की वजह से अमेरिका ने अपनी प्रतिष्ठित एएए क्रेडिट रेटिंग खो दी थी और ऋण लेने की लागत में वृद्धि हुई थी।
आपको बता दें कि ऋण की सीमा उसे कहते हैं, जहां तक अमेरिका की फेडरल गवर्नमेंट उधार ले सकती है। अगर इस बार सीमा बढ़ी तो यह 79वीं बार होगी। पिछली बार ऋण सीमा को दिसंबर 2021 में बढ़ाकर $31.4 ट्रिलियन किया गया था।
मुफ्त की रेवड़ी बांट रहे हैं बाइडेन?
पिछले साल हुए मिड टर्म चुनावों में अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन पार्टी को डेमाक्रेटिक पार्टी से 9 सीटें ज्यादा मिलीं थी। अपर हाउस का स्पीकर भी रिपब्लिकन पार्टी का कैंडिडेट केविन मैकार्थी चुना गया था। इस स्थिति में ऋण की सीमा बढ़ाने का सारा दारोमदार अपर हाउस और रिपब्लिकन पार्टी पर निर्भर करता है।
इस आर्थिक संकट के समाधान के लिए फिलहाल डेमोक्रेटिक बाइडेन को और कर्जे की जरुरत है। मगर रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि बाइडेन प्रशासन इस बात की गारंटी दें कि वह सामाजिक योजनाओं में बेफिजूल के खर्चे बंद करें। अगर ऐसा होता है तो वह ऋण की सीमा बढ़ाने में सहयोग के लिए तैयार हो सकते हैं। दरअसल, रिपब्लिकन सांसदों का आरोप है कि राष्ट्रपति बाइडेन और उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी जनता को लुभाने के लिए जरुरत से ज्यादा खर्चा कर रही है। एक प्रकार से यह रेवड़ियां अथवा फ्री में डॉलर बांटने जैसा है।
अमेरिका पर कर्ज बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह
अमेरिका के कर्ज बढ़ने के कई कारण हैं। इसमें राजनेताओं की पॉलिसी, टैक्स में भारी कटौती, विस्तारित संघीय खर्च, युद्ध वाले देशों की भारी मदद (यूक्रेन, ताइवान व अन्य), आपात स्थिति में किसी भी संस्था और देश की भारी मदद करना शामिल हैं।
PEW रिसर्च सेंटर की माने तो अमेरिका के कर्ज में सबसे बड़ी उछाल 2008 की मंदी और 2020 की कोरोना महामारी के कारण भी आई है। क्योंकि मेडिकल के क्षेत्र में अमेरिका पूरी दुनिया में अपने नागरिकों पर सबसे ज्यादा खर्च करता है। वहीं अमेरिका में सेवानिवृत्त लोगों की बढ़ती आबादी, सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर जैसी योजनायें भी कर्जे को बढ़ा रही हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने कितना बढ़ाया कर्ज
देश के बढ़ते कर्ज के पीछे सिर्फ बाइडेन सरकार को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कई दफा कर्जा लिया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने 2016 में चुनाव जीता था तो उस समय प्रशासन का कर्ज $19.95 ट्रिलियन था और 31 दिसंबर 2020 तक राष्ट्रीय ऋण $27.75 ट्रिलियन तक पहुंच गया। यानि राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में देश का कर्ज $7.8 ट्रिलियन और ज्यादा बढ़ गया।
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वाशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने 2017 में टैक्स में भारी कटौती की और खर्चों पर कोई संयम नहीं बरता, जिसके कारण राष्ट्रीय ऋण में जरुरत से ज्यादा का इजाफा हुआ। याद रहे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कॉर्पोरेट टैक्स 35 प्रतिशत से घटाकर 21 प्रतिशत कर दिया था।
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