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लेगिंग्‍स अश्‍लील हैं..क्योंकि दिखता है पूरा फिगर, छिड़ी बहस

बैंगलुरू। इन दिनों सोशल मीडिया पर तमिल की जानी-मानी पत्रिका 'कुमुदम रिपोर्टर' की कवर स्टोरी को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस कवर स्टोरी में महिलाओं के पहनावे पर चोट की गई है।

नई बहस- लड़कियों के लेगिंग पहने पर प्रतिबंध लगे या नहीं!

मैंगजीन ने लेगिंग्‍स अश्‍लील हैं..शीर्षक से एक स्टोरी छापी है जिसमें कहा गया है कि महिलाओं के लेगिंग्स जैसे पहनावे की वजह से ही लोग उन पर गलत ढंग से नजर डालते हैं। लेगिंग्स पूरी तरह से शरीर में चिपक जाती है जिसके कारण महिलाओं के शरीर का आकार पूरी तरह से सामने आ जाता है और वो पुरूषों के आकर्षण का केन्द्र बन जाता है।

पत्रिका ने महिलाओं की प्रिय लेगिंग्‍स को वल्गर कहा

खास तौर पर लेगिंग्स उस समय ज्यादा वल्गर हो जाती है जब लड़कियां या औरतें कमर से ऊपर की टी-शर्ट और टॉप पहने होती हैं। मैंगजिन ने जो फोटों कवर पेज पर छापी हैं वो महिलाओं की पीछे से लिये गये हैं।

लेगिंग्स में महिलाओं के शरीर का होता है प्रदर्शन

जिसके बाद इस पत्रिका के खिलाफ महिलाओं और लड़कियों ने जंग छेड़ी हुई है। इस बारे में वनइंडिया ने भी नारी सुधार केन्द्र वाराणसी की संचालिका श्रीमती प्रकाशवती भट्ट से बात की तो उन्होंने भी इस तरह के कवरेज की बुराई की और कहा कि ये महिलाओं की आजादी पर चोट है।

आईये नीचे की स्लाइडों से जानते हैं इस बारे में लोगों का और प्रकाशवती भट्ट दोनों का क्या कहना है...

दोष कपड़ो में नहीं सोच में हैं

दोष कपड़ो में नहीं सोच में हैं

नारी सुधार केन्द्र वाराणसी की संचालिका श्रीमती प्रकाशवती भट्ट ने कहा कि हर काम के महिलाओं को दोषी ठहराना पुरूषों की आदत हो गई हैं। अगर लेंगिग्स में कामुकता है तो रेप सलवार-सूट और साड़ी पहने लड़कियों और महिलाओं के साथ क्यों होते हैं, दोष लड़कियों के कपड़े में नहीं बल्कि लोगों की सोच में है।

छोटी बच्चियों क्यों होती हैं हवस की शिकार

छोटी बच्चियों क्यों होती हैं हवस की शिकार

श्रीमती प्रकाशवती भट्ट ने कहा कि मेरे पास ऐसी मां भी आती है जिसकी मासूम बच्चियां भी पुरूषों की हवस का शिकार बनी होती हैं। बच्चियां तो अश्लील कपड़े नहीं पहनतीं तो फिर वो किसी की बुरी नजर की शिकार क्यों होती है?

सोशल मीडिया पर बवाल

सोशल मीडिया पर बवाल

इस खबर की वजह से सोशल मीडिया पर भी बवाल छिड़ गया हैं। काफी महिलाओं ने इस बारे में मैंगजीन से तत्‍काल माफी मांगने को कहा है।

कविता मुरलीधरन

कविता मुरलीधरन

देश की जानी-मानी पत्रकार कविता मुरलीधरन ने भी इस खबर के लिए मैंगजीन को कोसा है और कहा है कि मैंगजीन ने जिन महिलाओं की तस्वीरें छापी हैं वो बिना उन्हें बताये क्लिक किये हैं जो कि महिलाओं का अपमान है।

साड़ी भी अश्लील बन जाती है...

साड़ी भी अश्लील बन जाती है...

लोगों ने कहा कि महिलाएं अगर साड़ी भी पहनें तो लोग उन्हें खराब कह देते हैं दरअसल महिलाओं को अपने कपड़ों पर नहीं बल्कि पुरूषों को अपनी आंखों और दिमाग पर ध्यान देने की आवश्यकता हैं।

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