Organ Donation: अंगदान की जरूरत ज्यादा जबकि अंगदाता बहुत कम, जानें दुनिया के आंकड़े
Organ Donation: साल 2013 में 5,000 अंगदान की तुलना में अब देश में हर साल 15,000 से अधिक अंग दान किये जाते हैं। यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने 3 जुलाई 2023 को कही। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने देश में अंगदान बढ़ाने की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं। अब अंग दाताओं के लिए छुट्टी की अवधि 30 दिन से बढ़ाकर 60 दिन कर दी गई है। साथ ही 65 वर्ष की आयु सीमा हटा दी गई है और अंगदान की प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित किया गया है।
दस लाख की जनसंख्या पर सिर्फ एक डोनर
'द हिंदू' अखबार ने इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांट्स के सचिव विवेक कुटे के हवाले से लिखा कि भारत की मृतक अंगदान दर में वृद्धि तो हुई है। पिछले एक दशक से प्रति 10 लाख जनसंख्या पर एक दाता (डोनर) के करीब पहुंच चुके हैं।

हालांकि, भारत को फिलहाल प्रति 10 लाख लोगों की जनसंख्या पर 65 अंगदाता चाहिए। वैसे अंगदाताओं को जागरुक करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में लगे संस्थानों को आगे आना होगा। विवेक कुटे कहते हैं कि देश में लगभग 600 मेडिकल कॉलेज और 20 से अधिक एम्स हैं। अगर हमें हर साल उनसे एक-एक दान भी मिले तो भारत दुनिया में बेहतर स्थिति में रहेगा।
साल 2021 में नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार भारत में हर साल 5 लाख लोगों को अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन) कराने की जरूरत होती है। भारत में अब भी मरने के बाद अंग दान करने वालों की दर प्रति 10 लाख मात्रा 0.34 है। जो कि दुनिया में सबसे कम है। जीवित और मृत लोगों के अंग दान की कुल दर प्रति 10 लाख सिर्फ 0.52 है।
अंगों की मांग ज्यादा, अंगदान करने वाले कम
भारत में अंगों के डोनरों की कमी के कई कारण हैं। अंगदान के बारे में जागरूकता की कमी, प्रैक्टिस से जुड़ी गलत मान्यताएं और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका के बाद भारत दुनिया में लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। लेकिन, मृत दानदाताओं के अंग प्रत्यारोपण के मामले देश में बहुत ही कम हैं।
भारत में सिर्फ 250 अस्पताल ही नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (नोटो) से पंजीकृत हैं। जो अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम का समन्वय करता है। यानी इस हिसाब से देश में प्रत्येक 4.3 मिलियन लोगों के लिए तमाम सुविधाओं और उपकरणों वाला सिर्फ एक अस्पताल है। भारत के देहाती इलाकों में तो ट्रांसप्लांट सेंटर कमोबेश हैं भी नहीं।
भारत में किडनी की सबसे ज्यादा डिमांड?
ग्लोबल ऑब्जर्वेटरी ऑन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांटेशन के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश है। जहां किडनी या शरीर के अन्य अंगों का प्रत्यारोपण सबसे ज्यादा किया जाता है। वहीं 4 मार्च 2016 को लोकसभा में केंद्र सरकार की ओर से एक बहस के दौरान जानकारी दी गई थी कि देश में 2 लाख किडनियों की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 6 हजार उपलब्ध हैं। इसी तरह 30 हजार लिवर की जरूरत है, जबकि उपलब्ध सिर्फ डेढ़ हजार है। हार्ट की जरूरत 50 हजार है और 15 ही उपलब्ध हैं।
पश्चिमी देशों का हाल भी कुछ खास नहीं
दुनियाभर में अंगों की आवश्यकता वाले केवल 10% रोगियों को ही समय पर अंग मिल पाते हैं। वहीं स्पेन और अमेरिका में बेहतर अंग दान प्रणालियों की व्यवस्था है। जिनमें प्रति मिलियन 30-50 दान की दर है।
अगस्त 2021 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल लांसेट पब्लिक हेल्थ में ऑर्गन ट्रांसप्लांट को लेकर एक रिसर्च प्रकाशित की गई थी। इसमें पेरिस की एक रिसर्च टीम ने 22 देशों के ऑर्गन ट्रांसप्लांट के आंकड़ों का विश्लेषण किया तो पाया कि कुछ देशों में तो ऑर्गन ट्रांसप्लांट 90 प्रतिशत तक कम हुआ है।
इसमें सबसे ज्यादा कमी जो लगभग सभी देशों में देखी गई थी, वो किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में थी। रिसर्च के मुताबिक ऑर्गन ट्रांसप्लांट में आयी इस कमी के कारण रोगियों को 48 हजार साल की लाइफ का नुकसान हुआ है। मतलब ये कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट होते तो इन सभी रोगियों के जीवन में जो भी साल जुड़ते उनका टोटल कुल 48 हजार साल के लगभग होता।
इन 22 देशों में से 16 यूरोपीय देश हैं। ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, इटली, नीदरलैंड, नार्वे, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड और यूके। दो उत्तरी अमेरिकी देश है कनाडा और अमेरिका। वहीं तीन दक्षिण अमेरिकी देश (अर्जेंटीना, ब्राजील और चिली) और जापान हैं।












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