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SIM Card Rules: साइबर फ्रॉड रोकने के लिए बदले सिम कार्ड बेचने के नियम

SIM Card Rules: डिजिटल या ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। इसके लिए केन्द्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नयी गाइडलाइंस की घोषणा की है। इस गाइडलाइंस की वजह से सिम कार्ड डीलर्स की साठ-गांठ से फर्जी सिम कार्ड इश्यू करवाकर किए जाने वाले अपराध पर नकेल कसी जा सकेगी। कुछ महीने पहले दूरसंचार विभाग और प्रौद्योगिकी विकास शाखा (C-DoT) ने संचार साथी नाम का पोर्टल पैन इंडिया लेवल पर लॉन्च किया था। यह ऑनलाइन पोर्टल TAFCOP (टेलीकॉम एनालिटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन) और CEIR जैसी एजेंसियों के सहयोग से ऑपरेट होता है, जिसमें मोबाइल फोन खोने या चोरी होने पर खोए हुए डिवाइस को ट्रैक या ब्लॉक किया जा सकता है।

दूरसंचार विभाग को यूजर्स द्वारा किए गए रिपोर्ट के आधार पर लाखों फर्जी मोबाइल नंबर का पता चला। जांच के बाद DoT ने 67 हजार से ज्यादा सिम कार्ड डीलर्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया, जबकि 50 लाख से ज्यादा मोबाइल नंबर को बंद कर दिया गया। दूरसंचार विभाग को इस पोर्ट के जरिए 6 मिलियन यानी 60 लाख फर्जी सिम कार्ड का पता चला, जिनमें 5 मिलियन नंबर को ब्लॉक कर दिया गया, जबकि 10 लाख नंबर को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। ये सभी फर्जी नंबर किसी न किसी साइबर अपराध, टेलीमार्केटिंग आदि के लिए जारी किए गए थे, जिन्हें प्वाइंट ऑफ सेल यानी सिम कार्ड डीलर्स की मिली-भगत से इश्यू किया गया। एक ही डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल करके कई सारे नंबर जारी किए गए।

SIM Card Rules: Rules for selling SIM cards changed to prevent cyber fraud

सिम कार्ड डीलर का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य

केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सिम कार्ड के लिए नए दिशा-निर्देशों की घोषणा करते हुए कहा कि बल्क में मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं होंगे। सिम कार्ड डीलर का पुलिस वेरिफिकेशन करवाना टेलीकॉम ऑपरेटर यानी मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर की जिम्मेदारी होगी। जो मोबाइल कंपनी इसका उल्लंघन करेगी, उसे 10 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। हालांकि, सरकार ने इन सिम कार्ड डीलर को पुलिस वेरिफिकेशन करवाने के लिए पर्याप्त समय दिया है। उन्हें अगले 12 महीनों में नई लाइसेंस प्रक्रिया के तहत रजिस्टर करवाना होगा। दूरसंचार विभाग के मुताबिक, इस समय देश में 10 लाख से ज्यादा प्वाइंट ऑफ सेल यानी सिम कार्ड डीलर्स मौजूद हैं, जो बल्क में कनेक्शन बेचते हैं। इन सभी डीलर्स को नयी गाइडलाइंस के मुताबिक, रजिस्टर करवाना होगा, ताकि पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

पिछले कुछ सालों में साइबर फ्रॉड यानी ऑनलाइन धोखाधड़ी के बेतहाशा मामले सामने आए हैं। इनमें से ज्यादातर मामलों में फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल हुआ था। संचार साथी पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत के आधार पर 52 लाख मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए। मई 2023 से लेकर अब तक करीब 67 हजार सिम कार्ड डीलर्स को ब्लैकलिस्ट किया गया है और 300 से ज्यादा एफआईआर किए गए हैं। दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देश पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप ने भी फर्जी नंबरों पर चलने वाले 66 हजार अकाउंट्स को ब्लॉक किया है। ये अकाउंट्स गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त पाए गए। इसके अलावा 8 लाख बैंक वॉलेट अकाउंट्स पर भी कार्रवाई की गई।

साइबर फ्रॉड को अंजाम देने के लिए हैकर्स फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। सिम कार्ड डीलर्स से सांठ-गांठ करके बल्क में सिम कार्ड जारी करवाए जाते हैं। प्वाइंट ऑफ सेल यानी सिम कार्ड डीलर्स द्वारा बल्क में बेचे जाने वाले सिम कार्ड में से 80 प्रतिशत कनेक्शन बेवजह के होते हैं, जो कार्पोरेट और एग्जीबिशन आदि के नाम पर खरीदे जाते हैं। सरकार के मुताबिक, बल्क में खरीदे गए सिम कार्ड में से करीब 20 प्रतिशत कार्ड का इस्तेमाल गलत कामों के लिए किया जाता था।

कैसे होता है सिम कार्ड से फ्रॉड?

हैकर्स सिम कार्ड के जरिए कई तरीकों से फ्रॉड करते हैं। बल्क में सिम कार्ड खरीदकर लोगों को लुभावने और आकर्षक ऑफर देकर फ्रॉड किया जाता है। इसके अलावा सिम स्वैपिंग का इस्तेमाल करके लोगों के बैंक और सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैक कर लिया जाता है। इस तरह के स्कैम करने से पहले साइबर अपराधी पहले आपके बारे में कई तरीकों से जानकारियां इकट्ठा करते हैं। इसके बाद वो आपको टेलीकॉम कंपनी का एग्जीक्यूटिव बनकर सिम कार्ड बदलने की सलाह देते हैं और आपके सिम कार्ड का एक्सेस लेकर आपके साथ फ्रॉड करते हैं। इस तरह के फ्रॉड में कोई भी फंस सकता है।

आपके मोबाइल फोन में सिग्नल आने बंद हो जाते हैं और इस दौरान हैकर्स के पास आपके नए इश्यू कराए गए सिम कार्ड का एक्सेस होता है। इस दौरान वो आपके बैंक अकाउंट का एक्सेस लेकर आपको चूना लगाते हैं। आप जब तक टेलीकॉम ऑपरेटर के ऑफिस में जाकर अपनी समस्या बताएंगे, उतनी देर में आपका अकाउंट खाली हो जाता है। सरकार ने सिम कार्ड के नए नियम में इसका भी ध्यान रखा है।

क्या हैं नये नियम?

● अब सिम कार्ड खरीदने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य डाक्यूमेंट नहीं रह गया है। आप किसी भी आईडी प्रूफ का इस्तेमाल करके नया सिम कार्ड खरीद सकते हैं। इसके लिए आप अन्य आईडी प्रूफ जैसे कि वोटर कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट आदि का भी इस्तेमाल कर सकेंगे।
● नए नियम के तहत अब आधार e-KYC के लिए थंब इंप्रेशन के साथ-साथ IRIS बेस्ड यानी आंखों की पुतलियों पर आधारित बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन को भी मंजूरी मिली है।
● किसी यूजर का मोबाइल नंबर बंद होने के 90 दिनों तक टेलीकॉम कंपनियां उस नंबर को किसी दूसरे यूजर को आवंटित यानी जारी नहीं कर सकती हैं।
● सिम कार्ड स्वैप करने के लिए पूरी KYC प्रक्रिया फॉलो करनी होगी। नए सिम कार्ड से 24 घंटे तक न तो आउटगोइंग कॉल की जा सकेगी और न उसपर कोई इनकमिंग मैसेज मिलेगा। इसकी वजह से SIM Swap Fraud पर लगाम लगाया जा सकेगा।
● प्वाइंट ऑफ सेल यानी सिम कार्ड डीलर्स का वेरिफिकेशन प्रोसेस टेलीकॉम ऑपरेटर्स द्वारा किया जाएगा। जिस भी प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) के जरिए फर्जी सिम कार्ड जारी किया जाएगा उसे टर्मिनेट करने के साथ-साथ 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
● मौजूदा सिम कार्ड डीलर्स यानी प्वाइंट ऑफ सेल को अगले 12 महीनों तक नए लाइसेंसी प्रक्रिया के तहत रजिस्टर करवाया जाएगा।
Keywords: SIM Card New Rule, Cyber Crime, Digital Fraud, Online Fraud, SIM Card Rules, SIM Swapping

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