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Share Market Rise: शेयर बाजार में तेज उछाल, क्या आगे भी बरकरार रहेगा?

Share Market Rise: शेयर बाजार ने विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत का जबरदस्त स्वागत किया है। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के नतीजों के आते ही सेंसेक्स और निफ्टी ने जोरदार शुरुआत की और रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुले। 4 दिसम्बर को सेंसेक्स और निफ्टी रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुले और क्रमश: 1,000 अंक और 300 अंक से अधिक की बढ़त तुरंत हासिल कर ली।

5 दिसंबर को भी अदानी पावर के शेयर में जबरदस्त तेजी देखी गई। सूचकांक मंगलवार को भी एक नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। दोपहर 1.30 बजे एनएसई निफ्टी 0.55% या 113.60 अंक बढ़कर 20,800.40 पर था, जबकि बीएसई सेंसेक्स 0.47% या 322.35 अंक बढ़कर 69,187.47 पर था। क्या पीएम मोदी के नेतृत्व मे बीजेपी को तीन राज्यों में मिली जीत की यह तत्कालिक प्रतिक्रिया है या 2024 में भी शेयर बाजार मे चमक बरकरार रहेगी?

Share Market Rise after assembly elections will it continue in future also?

मजबूत आर्थिक आधार

भारत में इस समय कई सकारात्मक आर्थिक कारक हैं, जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार पर सकारात्मक असर बना रहेगा। प्राप्त आर्थिक आकड़ें यह बता रहे हैं कि एक मजबूत वृद्धि दर का आधार खड़ा हो चुका है। अब विनिर्माण क्षेत्र में भी सुधार हुआ है। सामान्य आबादी की क्रय शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेष रूप से त्योहारी सीज़न बहुत सफल गया है, जिसका कॉर्पोरेट आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) का प्रवाह भी ठीकठाक है, जिससे भारत में दीर्घकालिक निवेश की भावना को बल मिला है। सभी मानदंड एक ही समय में मजबूत आर्थिक विकास की ओर इशारा कर रहे हैं। कच्चे तेल की कम कीमत और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मिली सफलता का लाभ जीडीपी वृद्धि में मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह कि एक स्थिर राजनीतिक माहौल निवेशकों के विश्वास को और बढ़ा सकता है और बाज़ार और ऊपर उठ सकता है।

विशेषज्ञों का आकलन है कि निफ्टी दिसंबर 2024 तक 25,000 और बीएसई 75,000 अंक को छू सकता है। निफ्टी अभी 21,000 का स्तर आसानी से पार करता हुआ दिखाई दे रहा है। बाजार के जानकार मई में संभावित आम चुनाव से पहले ही निफ्टी को 22,500 तक चढ़ते हुए देख रहे हैं।

क्या कहती हैं रेटिंग एजेंसियां

5 दिसम्बर को एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अपने पूर्वानुमान में यह कहा है कि भारत 2026-27 में 7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के साथ 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। भारत इस समय अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान के बाद दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

अपने "ग्लोबल क्रेडिट आउटलुक 2024" में, एसएंडपी ने कहा है कि भारत को 2026-27 वित्तीय वर्ष में 7 प्रतिशत तक पहुंचते हुए देख रहे हैं और हमें उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में सबसे तेजी से अर्थव्यवस्था का विकास होगा। एक मजबूत लॉजिस्टिक्स ढांचा भारत को सेवा-प्रधान अर्थव्यवस्था से विनिर्माण-प्रमुख अर्थव्यवस्था में बदलने में महत्वपूर्ण कारक साबित होगा।

एसएंडपी को यह भी उम्मीद है कि अगले दशक के दौरान भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए घरेलू डिजिटल बाजार में तेजी आएगी। रिपोर्ट में भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र को लेकर भी आशावादी रुख है और उम्मीद जाहिर कि गई है कि बुनियादी ढांचे, निवेश और नवाचार के आधार पर भारत काफी आगे निकल जाएगा।

जेपी मॉर्गन के अनुसार, भारत में 2024 और आने वाले वर्षों में प्राथमिक और द्वितीयक शेयर बिक्री के माध्यम से सालाना कम से कम 30 बिलियन डॉलर जुटाए जाने की संभावना है, क्योंकि कंपनियां और उनके शेयरधारक फंडिंग के लिए बाजार का दोहन करने के लिए तैयार हैं और इस समय भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल है। ब्लूमबर्ग का भी आकलन है कि देश में सूचीबद्ध कंपनियों ने अतिरिक्त शेयरों की बिक्री से इस साल 10 अरब डॉलर से अधिक की पूंजी प्राप्त की है, जो कि 2022 की कुल बिक्री से भी अधिक है।

भारत में नए निवेशकों की फौज

भारतीय शेयर बाजार में नए निवेशकों की मजबूत आमद देखी जा रही है। सीडीएसएल डेटा अनुसार इस साल अकेले जून 2.36 मिलियन से अधिक डीमैट खाते खोले गए। मई 2022 में 2.1 मिलियन और एक साल पहले 2.3 मिलियन डीमैट खाते खोले गए थे। मौजूदा समय में देश में कुल डीमैट खाते की संख्या 120.51 मिलियन को पार कर गई है, जो कि पिछले साल से 24.41 प्रतिशत अधिक है।

देश के मजबूत आर्थिक आधार के कारण विदेशी निवेशकों द्वारा मजबूत पूंजी प्रवाह के कारण भी घरेलू बाजार का बेंचमार्क रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और कई यूरोपीय देशों सहित दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष कर रही हैं। भारत की स्थिति काफी बेहतर स्थिति में है। इससे निवेशकों को भरोसा हो रहा है कि भारतीय बाजार उन्हें अपने प्रमुख वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में स्वस्थ रिटर्न देगा।

ऑनलाइन ऐप्स की बाढ़

भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की संख्या यदि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ रही है तो उसका एक कारण ऑनलाइन ऐप्स भी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान का भी मानना है कि अनगिनत संख्या में मोबाइल फोन और ट्रेडिंग ऐप्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस समय शेयर बाजारों में 80 मिलियन प्रत्यक्ष निवेशक हैं। उम्मीद है कि जल्द ही 90 मिलियन हो जाएंगे। अधिकांश नए निवेशक पिछले 2-3 वर्षों में आए हैं। मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अधिक से अधिक लोग अब शेयर बाजारों के माध्यम से ट्रेडिंग कर रहे हैं।

जाने माने चार्टर्ड अकाउंट और पी एम एच एसोसिएट एलएलपी के पार्टनर और शेयर मार्केट विशेषज्ञ मानस पीयूष का कहना है कि आने वाले दो तीन साल में निफ्टी 25000 और बीएसई 100000 अंक तक जा सकता है। उसका प्रमुख आधार जीडीपी में लगातार वृद्धि है। मानस के अनुसार हर एक ट्रिलियन के जीडीपी में जुडने का सीधा असर निफ्टी में 1000 अंक कि वृद्धि के रूप में होगा।

मानस पीयूष यह भी मानते हैं कि देश में मोदी जी के कारण एक विश्वास का माहौल तो बना है, लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि किसी और की सरकार होगी तो शेयर मार्केट आगे नहीं बढ़ेगा । मानस पीयूष का कहना है कि आर्थिक नीतियाँ आने वाले कई वर्षों तक यही रहेंगी, क्योंकि हमारे यहाँ सरकार बदलने से नीतियाँ नहीं बदलतीं।

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