Violence in Europe: दो साल में फ्रांस सहित यूरोप के इन 7 देशों में हो चुके हैं दंगे, क्या हैं उनके कारण?
यूरोपीय देश फ्रांस के कई इलाके 27 जून से खतरनाक हिंसा की चपेट में जल रहे हैं। इसका कारण एक 17 साल के युवक नाहेल की मौत है। इस मौत के बाद पूरे देश में हो रहे प्रदर्शन को पुलिस भी रोक नहीं पा रही है। खबरों के मुताबिक अब तक देश को कई बिलियन यूरो का नुकसान हो चुका है। जबकि हिंसा को काबू करने में जुटे 249 पुलिस अधिकारी घायल हो चुके हैं।
सीएनएन की खबर के मुताबिक फ्रांस के आंतरिक मंत्री गेराल्ड डर्मैनिन ने कहा कि 30 जून को पूरे फ्रांस में 45,000 पुलिसकर्मी तैनात होंगे। जिन्हें बख्तरबंद वाहन और हेलीकॉप्टर दिये जायेंगे। साथ ही कहा कि 29 जून की रात हिंसा के बाद करीब 917 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 13 बच्चे भी शामिल हैं। जबकि उसी रात देश भर में 200 सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ के साथ-साथ सड़कों पर खड़ी कारें, बसें व कई वाहनों में आग लगा दी गयी है।

गौरतलब है कि इस तरह की हिंसा और आगजनी की घटनायें बीते कुछ सालों में यूरोप के कई देशों सहित अमेरिका के कई शहरों में देखी गई हैं।
फुटबॉल मैच और जला पूरा यूरोप
दिसंबर 2022 में फीफा विश्वकप के दौरान जब-जब इस्लामिक देश मोरक्को की जीत या हार होती पूरे यूरोप में दंगा और आगजनी होने लगती। 10 दिसंबर को जब मोरक्को ने पुर्तगाल को हराया तब उस दिन फ्रांस के पेरिस में मोरक्कन झंडे लहराये गये और और जमकर आगजनी की गयी। वहीं नीदरलैंड में पुलिस को सड़कों पर उतरना पड़ा और हिंसा को शांत कराना पड़ा, इस दौरान कई गिरफ्तारियां हुईं। जबकि इटली के मिलान शहर में एक व्यक्ति का गला काटने का प्रयास किया गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाकर उसकी जान बचाने के लिए ऑपरेशन करना पड़ा। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में जमकर तोड़-फोड़ हुई, इसकी वजह से 60 लोग गिरफ्तार भी हुए। जर्मनी में भी जमकर उत्पात मचाया गया। इस पूरे विश्वकप के दौरान कई बार मोरक्को समर्थकों की तरह पूरे यूरोप में उत्पात मचाये गये।
भारत-पाक मैच के बाद भड़की हिंसा
अगस्त 2022 में ब्रिटेन के लेस्टर शहर में हिंदू व मुसलमान समुदायों के बीच जबरदस्त हिंसक झड़पें हुईं और शहर में आगजनी की गयी। जिसके बाद पुलिस को स्थिति संभालने के लिए अच्छी खासी मेहनत करनी पड़ी। अगस्त के अंत से शुरू हुए इस तनाव के मद्देनजर अब तक 47 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इन उग्र घटनाओं में 15 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गये थे। साथ ही 20 साल के एक लड़के को अवैध हथियार रखने के मामले में सजा भी सुनाई गयी थी।
कुरान जलाने पर जला स्वीडन
अप्रैल 2022 में स्वीडन के कई शहरों में कुरान जलाने के बाद से दंगे भड़क उठे थे। लोग जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों के हमले को रोकने के लिए पुलिस ने फायरिंग की। जिसमें तीन लोग घायल हो गये थे। हफ्तों तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़पें और आगजनी की घटनाएं होती रही। इस दौरान कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल भी हुए थे। इन दंगों में प्रदर्शनकारियों की ओर से कई गाड़ियों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया। मामले को शांत करने के लिए खुद स्वीडन के प्रधानमंत्री मैग्डेलेना एंडरसन को उतरना पड़ा। उन्होंने इस हिंसा पर कहा कि यहां लोगों को अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति है। यह हमारे लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन हिंसा हम कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे।
अश्वेत की हत्या पर भड़का अमेरिका
यूरोप के अलावा मई 2020 में अमेरिका में भी बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे। दरअसल, तब अमेरिका में एक पुलिस अधिकारी डेरिक शेविन ने एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की सार्वजनिक हत्या कर दी। इसके बाद से अमेरिका के मिनियापोलिस के अलावा फ्लोरिडा, जैक्सनविल, लॉस एंजेलिस, पीटसबर्ग, न्यूयॉर्क समेत कई जगहों पर हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं। इस हत्याकांड के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा कि जब लूट शुरू होती है तो उसके बाद शूट भी शुरू हो जाता है। यही वह कारण है कि मिनियापोलिस में एक व्यक्ति को गोली मार दी गयी। इस घटना के बाद डोनॉल्ड ट्रम्प को सेना को तैनात करने की चेतावनी देनी पड़ी।












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