ईमानदार मनमोहन सिंह फिर से बनेंगे देश के प्रधानमंत्री

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गिरीजा सिंह के मुताबिक बीजेपी और पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की ओर से कई तरह के झूठ बोले जा रहे हैं। पढ़िए कि आखिर गिरीजा क्यों सैम पित्रोदा से सरोकार रखते हैं और क्यों उन्हें लगता है कि मोदी और उनकी पार्टी झूठ बोल रही है।
संपादक की ओर से उद्घोषणा: यह लेख पाठक द्वारा भेजा गया है, जिसमें सिर्फ भाषा और व्याकरण के सुधार किये गये हैं।
आज मैंने सैम पित्रोदा की ओर से दिए गए एक बयान को काफी गहराई के साथ पढ़ा और मुझे लगता है कि सैम ने सही समय पर सही बात कही है। सैम का मानना है कि झूठ और गलत जानकारियां देश को मुश्किलों की ओर से ले जाएंगे। बीजेपी और नरेंद्र मोदी देश से कई झूठ बोल रहे हैं। मोदी की भाषा, एक पीएम पद के उम्मीदवार के अनुरुप ही नहीं है।
पार्टी और मोदी दोनों बस एक ही बात कहते रहते हैं कि पिछले एक दशक में देश ने विकास देखा ही नहीं है। मुझे लगता है कि यह पागलपन में दिया गया बयान है। देश में पिछले एक दशक के दौरान हुए विकास और तरक्की को साफ देखा जा सकता है और इसके लिए किसी भी तरह के आंकड़ों की कोई जरूरत नहीं है।
आठ वर्षों में आठ प्रतिशत की विकास दर को बरकरार रखना कोई मजाक नहीं है। जब अमेरिका और यूरोपियन यूनियन की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही थी उस समय भी देश में विकास मध्यम गति से जारी था। वहीं रुपए की हालत में सुधार हुआ है और सेंसेक्स में भी तेजी वापस लौट आई है। पित्रोदा ने कहा था कि बीजेपी और मोदी झूठ बोल रहे हैं क्योंकि देश में झूठ पर आसानी से भरोसा कर लिया जाता है।
कुछ हद तक पित्रोदा सही हैं। मेरा मानना है कि इस देश के लोग 20वीं सदी से झूठ पर भरोसा कर रहे हैं। पहले विपक्ष ने वर्ष 1977 में उनसे झूठ बोलने की कोशिश की तो वह अगले तीन वर्षों तक सत्ता में नहीं लौट सके। दोबारा वर्ष 1989 में देश की जनता से सफलतापूर्वक झूठ बोला गया। इसका नतीजा था कि देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से धाराशयी हो गई थी।
वर्ष 1991 में मनमोहन सिंह ही थे जिन्होंने देश का प्रधानमंत्री बनकर देश को डूबने से बचाया। यहां तक कि बीजेपी और विपक्ष के दूसरे लोग भी इस बात को मानते हैं कि मनमोहन सिंह देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाले राजनेता हैं। लेकिन बीजेपी की समस्या यह है कि अगर वह झूठ नहीं बोलेंगी तो उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। बीजेपी ने वर्ष 1996 में झूठ बोला था और तीन साल तक उनका ड्रामा जारी रहा था।
वर्ष 2004 में 21वीं सदी का पहला चुनाव हुआ और देश की जनता ने पहली बार बीजेपी के झूठ को मानने से इंकार कर दिया। एनडीए का इंडिया शाइनिंग कैंपेन इस दौरान बुरी तरह फ्लॉप साबित हुआ और इसके साथ ही देश की अर्थव्यवस्था के निर्माता मनमोहन सिंह को देश का नेतृत्व करने का मौका मिला। पांच साल तक उन्होंने देश की सेवा की।
इसका ही नतीजा था कि लोगों ने उन पर एक बार और भरोसा किया और अगले पांच साल तक उन्हें देश की कमान फिर से सौंपी। मुझे लगता है कि वर्ष 2004 और 2009 की तरह इस बार भी एग्जिट पोल्स के नतीजे गलत साबित होंगे। मैं लोगों को सलाह दूंगा कि वह लोगों को पूरी तरह से जागरुक होकर ही वोट डालना चाहिए।
महंगाई सिर्फ भारत में ही नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में रहन सहन महंगा हो रहा है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था वाले किसी भी देश की सरकार को महंगाई कम करने में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
अगर देश में महंगाई बढ़ी है तो फिर लोगों की सैलरी में भी उसके अनुरुप ही इजाफा हुआ है। जब पूरी दुनिया में कंपनियां अपने स्टाफ की सैलरी में कटौती करने में लगी हुई थीं, भारत सरकार की ओर से डीए में 6 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई।
इस बात में कोई भी शक नहीं होना चाहिए कि मनमोहन सिंह ईमानदार व्यक्ति हैं और उन्होंने हमेशा देश की सेवा समर्पण और र्इमानदार भाव से की है। मुझे लगता है कि इस बार भी कांग्रेस जरूरी वोटों का प्रतिशत हासिल कर सकेगी और दिल्ली में फिर सरकार बनाएगी।












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