भारत रत्न नानाजी देशमुख: समाजसेवा के लिए ठुकरा दिया था मंत्री पद
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर नरेंद्र मोदी सरकार ने तीन लोगों को देश का सर्वोच्च सम्मान देने का ऐलान किया। पूर्व राष्ट्रपति और काग्रेस के कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी, भूपेन हजारिका और नानाजी देशमुख को भारत रत्न देने का ऐलान किया है। नानाजी देशमुख समाजसेवी थे और वह भारतीय जनसंघ के दिग्गज नेता थे। 1997 में जनता पार्टी की सरकार के दौरान नानाजी देशमुख मोरारजी देसाई ने उन्हें अपने मंत्रीमंडल में भी शामिल किया था। लेकिन नानाजी ने मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा था कि 60 वर्ष की उम्र के बाद लोगों को सरकार से बाहर रहकर समाज की सेवा करनी चाहिए।

सब्जी बेचकर की पढ़ाई
नानाजी देशमुख का असल नाम चंडिकादास अमृतराव देशमुख था। उनका जन्म 11 अक्टूबर 1916 में हुआ था। महाराष्ट्र के हिंगोली जिला के कंदोली कस्बा में जन्मे नानाजी देशमुख ने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। उनका जन्म मराठी परिवार में हुआ था और शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण था। नानाजी देशमुख का लालन-पालन उनके मामा ने किया। शिक्षा में नानाजी का काफी रुचि थी लेकिन अभाव के चलते उनके पास किताब खरीदने तक के पैसे नहीं थे, लिहाजा उन्होंने सब्जी बेचकर शिक्षा के लिए पैसे जुटाए, मंदिर में समय बिताया। जिसके बाद वह बिरला इंस्टीट्यूट से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में 1930 में वह आरएसएस में शामिल हो गए। नानाजी ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश में समाज सेसवा के क्षेत्र में काफी काम किया था।

आरएसएस में निभाई भूमिका
नानाजी देशमुख लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों से काफी प्रभावित थे, उन्ही से प्रेरित होकर उन्होंने समाज सेवा का काम शुरू किया। संघ के सरसंघचालक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार का नानाजी के परिवार से ताल्लुक था और नानाजी की प्रतिभा को उन्होंने पहचान लिया था, लिहाजा नानाजी को संघ में शामिल होने को कहा। आरएसएस के भीतर नानाजी ने काफी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने संघ की पत्रिका पाच्जन्य के प्रकाशन में काफी अहम भूमिका निभाई थी।

समाज सेवा में अहम योगदान
भारतीय जनसंघ की स्थापना के बाद नानाजी ने उत्तर प्रदेश में महासचिव का पद संभाला और बाबू त्रिलोकी सिंह की जीत में अहम भूमिका निभाई। डॉक्टर राम मनोहर लोहिया, चन्द्रभानु गुप्त जैसे दिग्गज नेता भी नानाजी का सम्मान करते थे। नानाजी ने भूदान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और विनोबा भावे के साथ मिलकर समाज सेवा के क्षेत्र में काम किया। जेपी आंदोलन के समय जयप्रकाश नारायण को पुलिस की लाठियों से बचाने में नानाजी ने अहम भूमिका निभाई थी। नानाजी बलरामपुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं।

शरीर को दान देने वाले देश के पहले व्यक्ति
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में नानाजी को राज्यसभा का सांसद बनाया गया। समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के चलते पद्म विभूषण के पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। लेकिन इस बार मोदी सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न देने का फैसला लिया 94 वर्ष की उम्र में नानाजी का चित्रकूट में निधन हो गया। वह देश के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने शरीर को मेडिकल के छात्रों को शोध के लिए दान किया था। निधन के बाद उनके शव को एम्स के हवाले कर दिया गया था।
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