Chenab River: 'सोहिनी के इश्क से लेकर पानी के बंटवारे तक', बहुत कुछ सहा है 'चिनाब' ने, जानिए अनकही दास्तां
Chenab River: 6 जून 2025 की तारीख... भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गई है, जानते हैं क्यों? दरअसल आज देश को दुनिया के सबसे ऊंचे 'चिनाब रेलवे ब्रिज' का अमूल्य तोहफा जो मिला है, जिसका उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों हुआ। चिनाब पुल पर जिस वक्त तिरंगा लहराया उस वक्त हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा भी कि 'शायद ये मां वैष्णों देवी की कृपा है कि सारे अच्छे काम मेरे ही हाथों लिखे हैं।'
धरती की जन्नत में बना ये पुल पिछले 17 वर्षों की तपस्या का फल है, वो तप जिसे कि देश के इंजीनियर्स और श्रमिकों ने लगातार किया है, जिसके लिए हर हिंदुस्तानी उनके आगे हमेशा नतमस्तक रहेगा। आपको बता दें कि 'चिनाब नदी' ने हमेशा ही देशवासियों को मोहब्बत का पैगाम दिया है।

हिमाचल के लाहौल क्षेत्र में ऊपरी चोटी से निकली 'चिनाब' के किनारे ही कभी 'हीर -रांझा' मिला करते थे तो कभी इसी 'चिनाब' को पार करके 'सोहिनी' हर रोज अपने 'महिवाल' से मिलने जाती थी। काश उस वक्त पुल होता तो शायद 'सोहिनी' का कच्चा घड़ा पानी में बहता नहीं और 'महिवाल' को चिनाब में कूदता नहीं पड़ता और ना ही हमें इश्क की अधूरी प्रेम कहानियों से दो चार होना पड़ता।
चंद्रमा के समान चमकती है 'Chenab River'
केवल लोककथाओं में ही 'चिनाब' का जिक्र नहीं है जनाब बल्कि इसके बारे में तो 'ऋग्वेद' में भी वर्णन है, जहां इसे 'असिक्नी' कहकर संबोधित किया गया है। व्यास की 'महाभारत' में इसे 'चंद्रभागा' बोला गया है क्योंकि चांदनी रात में ये यह नदी चंद्रमा के समान चमकती है और इसका उद्गम चंद्रभागा पर्वत श्रृंखला से होता है।
चिनार के पेड़ों के बीच की नदी है Chenab River
वक्त बदला, लोग बदले और इसी वजह से 'चिनाब' के नाम भी बदलते चले गए। यूनानियों ने इसे 'सैंड्रोफैगोस' नाम दिया तो फारसियों ने इसे 'चिनाब' बना दिया, जिसका जिक्र "किताब-उल-हिन्द" में अलबरूनी ने भी किया है, उनके हिसाब से 'चिनाब "चह" (पांच) और "आब" (पानी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "पांच नदियों का जल", हालांकि कश्मीर के पुरोधाओं ने कहा कि 'ये नदी चिनार के पेड़ों के बीच बहती है इसलिए 'चिनाब' कहलाती है।'

सिखों और अफगानों की लड़ाई का गवाह Chenab River
इतिहास कहता है कि 'चिनाब' का किनारा सिखों और अफगानों की लड़ाई का भी गवाह रहा है, इस नदी ने मोहब्बत भी देखी है, जंग का दीदार भी किया है तो वहीं ये सियासत का भी हिस्सा रही है क्योंकि इसके किनारे जम्मू, अखनूर, डोडा और पाकिस्तान के झंग जिले से जुड़े हुए हैं। मालूम हो कि ये जम्मू-कश्मीर और पंजाब होते हुए यह पाकिस्तान में प्रवेश करती है और अंत में सिंधु नदी से मिल जाती है। इसी वजह से ये निम्नलिखित राजनीतिक समझौतों की भी गवाह है।
सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty)
भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में यह ऐतिहासिक संधि हुई थी। इसके अनुसार, पूर्वी नदियां (रावी, सतलुज, ब्यास) भारत को दी गईं, जबकि पश्चिमी नदियां (चिनाब, झेलम, सिंधु) पाकिस्तान को आवंटित की गई, हालांकि, भारत को 'चिनाब' पर सीमित सिंचाई और हाइड्रो पावर परियोजनाएं विकसित करने का अधिकार है।
बगलीहार बांध विवाद (Baglihar Dam controversy)
जम्मू-कश्मीर में भारत द्वारा बनाए गए बगलीहार जल विद्युत परियोजना को लेकर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई थी। पाकिस्तान का आरोप था कि इससे 'चिनाब' नदी के प्रवाह पर असर पड़ेगा। यह विवाद अंततः वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से सुलझा और बांध को वैध माना गया।

मोक्षदायिनी है 'चिनाब' का जल
यही नहीं 'चिनाब' के पानी को लोग 'मोक्षदायिनी' कहते हैं इसी वजह से यहां पर लोग 'अस्थिविसर्जन' भी करते हैं तो वहीं 'चिनाब' सूफी गीतकारों और कवियों की भी फेवरेट रही है, जिसको लेकर कई प्रेमगीत रचे गए और कविताएं लिखी गई हैं। "चिनाब दी लहरां', ' रांझा रांझा करदी' कुछ बेहद ही मशहूर नगमे हैं तो वहीं सूफी संतों जैसे बुल्ले शाह और शाह हुसैन की कविताओं में 'चिनाब नदी' एक आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक भी रही है।
चिनाब रेलवे ब्रीज (Chenab Railway Bridge)
चिनाब नदी पर बना चिनाब रेलवे ब्रिज उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का हिस्सा है। यह पुल 359 मीटर ऊंचा है, ये विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है। पुल का निर्माण ISO-9001, ISO-14001 और ISO-45001 जैसे मानकों के अनुरूप हुआ जो कि इसे खास बनाता हैं। यह पुल जोन-V सिस्मिक जोन में स्थित है, इसलिए इसे 8-रिक्टर स्केल तक के भूकंप झेलने के लायक बनाया गया है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है।












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