Pakistan ISI: पाकिस्तान में आईएसआई का क्यों हो रहा विरोध?
Pakistan ISI: इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीश इस समय पाकिस्तान की मिलिट्री खुफिया एजेंसी आईएसआई के खिलाफ़ उठ खड़े हुए हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पत्र लिख कर आईएसआई पर यह आरोप लगाया है कि एजेंसी के अधिकारी अदालती मामलों में बार-बार हस्तक्षेप कर रहे हैं और मनमाने फ़ैसले के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहे है, जिनमें अपहरण भी शामिल है। यह पहला मौका नहीं है कि आईएसआई के खिलाफ पाकिस्तान में ही विद्रोह देखा गया है। बल्कि इसकी एक लंबी सूची है।
क्या है ताजा मामला
इस्लामाबाद हाई कोर्ट के आठ मौजूदा न्यायाधीशों में से छह ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भेज कर सर्वोच्च न्यायिक परिषद से यह जवाब मांगा है कि जब न्यायाधीशों को ब्लैकमेल, उत्पीड़न और जबरदस्ती का शिकार बनाया जाए तो उन्हें क्या करना चाहिए। इन न्यायाधीशों ने न्यायिक परिषद से यह पूछा है कि वे अपनी स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करने और जनता की नज़र में अपनी संस्था की बिगड़ती छवि को सुधारने के लिए उनसे क्या उम्मीद रखे।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले न्यायाधीशों ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का भी हवाला दिया है और मांग की है कि इन सभी मुद्दों पर न्यायिक सम्मेलन बुलाया जाए। साथ ही इस सम्मेलन में पूर्व आईएचसी न्यायाधीश शौकत अजीज सिद्दीकी के जबरन सेवा समाप्त करने के मामले को भी देखा जाए। उल्लेखनीय है कि न्यायाधीश सिद्दीकी को पीएमएल-एन प्रमुख नवाज शरीफ से जुड़े मामलों में आईएसआई की शिकायत पर अक्टूबर 2018 में न्यायपालिका से बेदखल कर दिया गया था।
स्पष्ट है कि न्यायाधीश भी चाहते हैं कि सर्वोच्च न्यायिक परिषद इस पर भी विचार करे कि सेवारत न्यायाधीशों को क्या सहने के लिए मजबूर किया जा रहा है और यह सलाह भी दे कि न्यायाधीशों को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करने के लिए क्या करना चाहिए। गेंद अब मुख्य न्यायाधीश काजी फ़ैज़ ईसा के पाले में है और उन पर इस समय जबर्दस्त दबाव भी है।
आईएसआई के हथकंडे
आरोप है कि आईएसआई ने एक न्यायाधीश के शयनकक्ष की गुप्त कैमरे से जासूसी करवाई है। किसी दूसरे जज के रिश्तेदार को उठा लिया गया और मनमाना बयान देने के लिए उसे प्रताड़ित किया गया। दो न्यायाधीशों ने यह आरोप लगाया है कि एक हाई-प्रोफाइल मामले में पुनर्विचार के लिए आईएसआई की तरफ से भारी दबाव बनाया गया। इसके लिए खुफिया अधिकारियों ने उनके दोस्तों और परिवार को परेशान करना शुरू कर दिया थ।
एक जिला और सत्र न्यायाधीश ने बताया कि उन्हें डराने के लिए उनके घर में एक पटाखा बम फेंका गया। जजों का यह भी कहना है कि जब राजनेता से इसकी शिकायत करते हैं तो वे उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। छह मौजूदा न्यायाधीशों ने आईएसआई द्वारा शक्ति के दुरुपयोग का जो ब्यौरा दिया है, उसे नज़रअंदाज करना काफी मुश्किल है।
पाकिस्तान में इस समय इसे लेकर भूचाल आया है। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ किसी तरह इस मामले को शांत करने में लगे हैं। वह खुद इस समय चीफ जस्टिस के संपर्क में हैं। सभी की निगाहें आईएसआई पर टिकी हैं कि उसका अलग कदम क्या होने वाला है।
इमरान भी आईएसआई पर लगा चुके हैं गंभीर आरोप
यह पहली बार नहीं है कि आईएसआई पर कोई गंभीर आरोप लगा है। जेल में बंद पीटीआई प्रमुख इमरान खान ने तो पीडीएम के प्रधानमंत्री रहे शहबाज शरीफ, आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह और एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी पर उनकी हत्या की कोशिश का आरोप लगाया था और उनसे इस्तीफे की मांग की थी।
इस पर इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने बाकायदा बयान भी दिया था। उसने कहा था कि इमरान खान बिना सबूत के उक्त सैन्य अधिकारी के खिलाफ गैर-जिम्मेदार और निराधार आरोप लगा रहे हैं। पीटीआई प्रमुख ने तो यह भी दावा किया था कि उनके तोशाखाना मामले की सुनवाई में भाग लेने जाने से एक रात पहले आईएसआई ने इस्लामाबाद में न्यायिक परिसर पर कब्जा कर लिया था।
पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या में भी आईएसआई का नाम
केन्या में पुलिस की गोली से मारे गए मशहूर पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ के मामले में भी इस खुफिया एजेंसी के अधिकारी का नाम आया था। अरशद सेना के कटु आलोचक थे और वह सुरक्षा एजेंसियों से अपनी जान को खतरा बताकर देश छोड़कर भाग गए थे। बाद में 23 अक्टूबर 2022 को केन्या में उनकी हत्या हो गई। आईएसआई के शीर्ष अधिकारी मेजर जनरल फैसल नसीर को इस हत्याकांड में पाकिस्तान के ही लोगों ने शामिल बताया। इमरान खान ने यहाँ तक कहा कि अरशद को जान से मारने से पहले उस पर गंभीर अत्याचार किया गया। लेकिन आईएसआई के उस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुईं ।
आईएसआई और राजनीतिक गठजोड़
पाकिस्तान में वैसे तो विभिन्न प्रकार के लगभग 14 खुफिया संगठन हैं। इनमें आईबी, आंतरिक मंत्रालय, नैक्टा, आईएसआई, एमआई, एयरफोर्स एमआई और नेवी एमआई भी शामिल हैं। लेकिन आईएसआई सबसे विवादास्पद है और अपनी करतूतों से हमेशा सुर्खियों में रहती है। कहा जाता है कि आईएसआई ही पाकिस्तान की राजनीति को कंट्रोल करती है। अधिकांश नेताओं को भी यह अपने तरीके से निर्देशित करती है, जबकि यह एक सैन्य संगठन है।
आईएसआई प्रमुख का चयन कथित तौर पर प्रधान मंत्री द्वारा किया जाता है और आईएसआई का अपना बजट होता है। आईएसआई चीफ प्रमुख कॉर्प कमांडरों की बैठकों में बैठते हैं। आईएसआई के लोग ज्यादातर सिविलियन ड्रेस में होते हैं, लेकिन औपचारिक मौकों पर सैन्य वर्दी पहनते हैं।
आईएसआई के कुछ अधिकारियों को बहुत महत्वपूर्ण ओहदे मिलते हैं। आईएसआई का अधिकांश काम सेना सहित सभी प्रकार के सरकारी संगठनों में अपनी धाक बनाए रखना है। ऐसा माना जाता है कि हर सरकारी संगठन में उनका एक जासूस तैनात रहता है। आमतौर पर राज्य विरोधी गतिविधियों के साथ-साथ गड़बड़ी की जांच करना उनका काम है, लेकिन आईएसआई के लोग विदेश मंत्रालय तक में सक्रिय होते हैं।
विवादास्पद कामों या जासूसी गतिविधियों में आईएसआई वैसे ही कुख्यात है। लगभग सभी आईएसआई क्षेत्रीय प्रभारी निरंकुश हो कर काम करते हैं। सेना में नेतृत्व के खिलाफ बोलने वाले किसी भी व्यक्ति को तुरंत घेर कर उठा लेते हैं और फिर उन्हें आतंकित कर सीधा कर देते हैं।
आईएसआई के पास पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास का पूरा रिकॉर्ड है और उसके अधिकारी अपने उद्देश्यों और कार्यों के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं। एक दर्जन से अधिक पत्रकार भी आईएसआई की प्रताड़ना की कहानी सुना चुके है। पर सेना के दबदबे वाले पाकिस्तान में आईएसआई को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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