Pakistan Cricket: क्यों नहीं थम रहा पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का विवाद?

Pakistan Cricket: फिर से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के एक चेयरमैन ने इस्तीफा दे दिया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता जका अशरफ ने यह कहते हुए पीसीबी का अध्यक्ष पद छोड़ दिया कि उन्हें काम करने के लिए आवश्यक अधिकार नहीं दिए जा रहे थे।

उनका कार्यकाल अभी तीन महीने बाकी था। पीसीबी में इतना झोल आ गया है कि 13 महीनों के अंतराल में चौथा बदलाव हो चुका है।

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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में अस्थिरता

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) शीर्ष पद पर पूरी तरह अस्थिरता का माहौल है। इस पद पर रहे हर शख्स का पूर्व खिलाड़ियों से सीधा टकराव हो रहा है। हर पीसीबी अध्यक्ष बोर्ड को वन-मैन शो के रूप में चलाना चाहता है और उसके कारण हितों का टकराव हो जाता है। अध्यक्ष जो भी निर्णय लेता है, उसे फेल करने के लिए पाकिस्तान के ही खिलाड़ी और अधिकारी पीछे लग जाते हैं।

पाकिस्तान में सत्ता बदलने के साथ ही क्रिकेट बोर्ड का ढांचा भी बदल जाता है। पाकिस्तानी क्रिकेटरों के खराब प्रदर्शन का भी ठीकरा पीसीबी पर ही फूटता है। वरिष्ठ पाकिस्तानी क्रिकेटर भी कई गुटों में बटे हैं। भारत में हुए विश्व कप में खराब प्रदर्शन के कारण पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पर भी गंभीर आरोप लगे थे।

पीसीबी अध्यक्षों का रहता है अधूरा कार्यकाल

पीसीबी के इतिहास में इसके अध्यक्षों के कई अधूरे कार्यकाल देखे गए हैं। ऐसा ही एक उदाहरण ज़का अशरफ़ का भी है। वैसे पीसीबी के अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है। वर्ष 2010 के बाद से पीसीबी के 4 लोग अध्यक्ष बने हैं और 10 कार्यकाल रहे हैं।

इन 10 कार्यकालों में 8 कार्यकाल अधूरे रहे और केवल दो कार्यकाल ही पूरे हुए, जिसमें शहरयार खान का कार्यकाल (मई 2014-अगस्त 2017) और एहसान मणि का कार्यकाल (अगस्त 2018-अगस्त 2021) शामिल है। ज़का अशरफ़ 2010 के बाद 3 बार पीसीबी अध्यक्ष रहे हैं और तीनों बार कभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। नजम सेठी 2010 के बाद से चार बार पीसीबी अध्यक्ष रहे लेकिन एक बार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। रमीज राजा को भी सितंबर 2021 में पीसीबी का अध्यक्ष बनाया गया लेकिन वह भी अपना कार्यकाल पूर्ण करने में असफल रहे।

पिछले 5 वर्षों में पीसीबी से जुड़े विवाद!

पिछले 5 सालों में पीसीबी को लेकर कई विवाद हुए हैं। इनमें से एक विवाद विश्व कप 2023 के दौरान पीसीबी द्वारा जारी की गई एक प्रेस विज्ञप्ति से संबंधित था, जिसकी कई लोगों ने आलोचना की थी। विज्ञप्ति में पीसीबी ने वर्ल्ड कप 2023 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आजम की कप्तानी पर निंदनीय टिप्पणी की थी। हालाँकि, पीसीबी के एक अधिकारी ने बयान का बचाव किया और स्पष्ट किया कि बोर्ड ने विश्व कप के दौरान कभी भी बाबर आज़म या टीम की आलोचना नहीं की।

एक और विवाद भारत में बाबर एंड कंपनी के शानदार स्वागत के बावजूद पीसीबी अध्यक्ष जका अशरफ की 'दुश्मन मुल्क' टिप्पणी से संबंधित था। इसके अलावा, पिछले 5 वर्षों में पीसीबी द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप में कई क्रिकेटरों पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिनमें उमर अकमल, शरजील खान और मोहम्मद इरफान शामिल हैं।

पीसीबी में राजनीति हावी

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, पीसीबी राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार से ग्रस्त है। पीसीबी के पूर्व अध्यक्ष जका अशरफ ने स्वीकार किया है कि बोर्ड में "बहुत अधिक राजनीति" होती है। पाकिस्तान की सरकार पर पीसीबी के मामलों में हस्तक्षेप करने का भी आरोप लगता रहता है।

अप्रैल 2016 में पीसीबी ने खुद को किसी भी कार्रवाई से बचाने के लिए सरकारी हस्तक्षेप के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन वह बेअसर साबित हुआ। पीसीबी में राजनीतिक भागीदारी के कारण नेतृत्व संबंधी प्रश्न, कानूनी चुनौतियाँ और संवैधानिक उल्लंघन की समस्या पैदा हुई हैं, जैसे स्नातक की डिग्री रखने की संवैधानिक पूर्व शर्त को पूरा नहीं करने के बावजूद जका अशरफ को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करना।

पीसीबी और पाक खिलाड़ियों पर भ्रष्टाचार के आरोप!

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भ्रष्टाचार के कई आरोपों में शामिल रहा है। सबसे महत्वपूर्ण घोटालों में से एक 2010 में पाकिस्तान क्रिकेट स्पॉट फिक्सिंग घोटाला था, जहां पाकिस्तान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के तीन खिलाड़ियों को लंदन में एक टेस्ट मैच के दौरान जानबूझकर नो-बॉल फेंकने के लिए एक सट्टेबाज से रिश्वत लेने का दोषी ठहराया गया था। इसमें शामिल खिलाड़ी थे सलमान बट, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर।

2020 में विवादास्पद पाकिस्तानी क्रिकेटर उमर अकमल को भ्रष्टाचार के आरोप में पीसीबी पैनल द्वारा 3 साल की अवधि के लिए क्रिकेट के सभी प्रारूपों से प्रतिबंधित कर दिया गया था। पीसीबी ने उमर पर फरवरी 2020 में पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में उन्हें दी गई स्पॉट फिक्सिंग की पेशकश की रिपोर्ट नहीं करने के दो अलग-अलग मामलों में आरोप लगाया था। उमर इस प्रस्ताव की रिपोर्ट करने में विफल रहे, जिसके कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया और अंततः प्रतिबंध लगा दिया गया।

सितंबर 2022 में ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के बाएं हाथ के स्पिनर आसिफ अफरीदी को पीसीबी ने भ्रष्टाचार विरोधी संहिता के तहत दो उल्लंघनों के लिए निलंबित कर दिया था, जिसमें स्पॉट फिक्सिंग की पेशकश की रिपोर्ट करने में विफल रहना भी शामिल था। अफरीदी को 20 फरवरी को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था और 17 मार्च को आरोप का नोटिस जारी किया गया था।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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