अब 4-वर्षीय डिग्री वाले छात्र सीधे कर सकेंगे पीएचडी, यूजीसी ने किए हैं कई महत्वपूर्ण बदलाव!
UGC: हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अर्थात यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने घोषणा की है कि चार साल की बैचलर डिग्री वाले छात्र अब सीधे नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) में शामिल हो सकते हैं और पीएचडी कर सकते हैं।
जूनियर रिसर्च फेलोशिप के साथ या उसके बिना पीएचडी करने के लिए, स्नातकों को अपने कोर्स में कम से कम 75% अंकों की आवश्यकता होगी। अभी तक नेट के लिए उम्मीदवार को कम से कम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री की आवश्यकता होती थी। पिछले कुछ वर्षों में यूजीसी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और बदलाव कर चुका है, आइए जानते हैं ऐसी कुछ खास सूचनाओं के बारे में।

पीएचडी के लिए नेट स्कोर के उपयोग की अनुमति
मार्च 2024 में यूजीसी ने घोषणा की कि एकेडमिक सेशन 2024-25 से विश्वविद्यालयों और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट (एचइआई) द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षाओं के स्थान पर पीएचडी प्रोग्राम में प्रवेश के लिए नेट के अंकों का उपयोग किया जा सकता है। आसान शब्दों में, अब पीएचडी प्रवेश के लिए इंटरव्यू के साथ-साथ नेट स्कोर का उपयोग किया जा सकेगा।
इस बदलाव का मकसद प्रवेश प्रक्रिया को आसान करना था और यह नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, 2020 के हिसाब से थी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा नेट एग्जाम का आयोजन साल में दो बार करवाया जाता है, पहला जून में और दूसरा दिसंबर में। इस बदलाव की घोषणा यूजीसी के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर की थी।
एमफिल डिग्री को घोषित किया अमान्य
दिसंबर 2023 में, यूजीसी ने छात्रों को सूचना दी थी कि मास्टर ऑफ फिलोसॉफी (एमफिल) अब से एक मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है और एमफिल प्रोग्राम में प्रवेश के खिलाफ चेतावनी दी थी। साथ ही यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को भी एकेडमिक सेशन 2023-24 में एमफिल प्रोग्राम में प्रवेश पर रोक लगाने के लिए आदेश जारी किया था।
यूजीसी ने अपने नोटिस में कहा, "यूजीसी के संज्ञान में यह आया है कि कुछ विश्वविद्यालय एमफिल प्रोग्राम के लिए नए आवेदन ले रहे हैं। इस संबंध में यह ध्यान में लाना है कि एमफिल डिग्री एक मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है। यूजीसी रेगुलेशंस 2022 के रेगुलेशन नंबर 14 में साफ कहा गया है कि एचइआई एमफिल प्रोग्राम ऑफर नहीं करेंगे।" हालांकि, जनवरी 2024 में, यूजीसी ने क्लिनिकल साइकोलॉजी और साइकैट्रिक सोशल वर्क में एमफिल प्रोग्राम की वैधता को 2025-2026 एकेडमिक ईयर तक बढ़ा दिया।
स्थानीय भाषा में परीक्षा देने की अनुमति
अप्रैल 2023 में यूजीसी अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने देश के सभी विश्वविद्यालयों से कहा था कि वो छात्रों को परीक्षा के दौरान उनकी स्थानीय भाषाओं में अपने उत्तर लिखने की अनुमति दें, भले ही कोर्स प्रोग्राम अंग्रेजी का ही क्यों न हो। यूजीसी की इस घोषणा का मकसद छात्रों के बीच स्थानीय भाषा के महत्व पर जोर देना था।
यूजीसी ने कहा कि एचइआई छात्रों को स्थानीय भाषाओं या मातृ भाषा के लिए तैयार करने में एक बहुत ही अहम भूमिका निभाते हैं। इसी के साथ यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से लेखों के स्थानीय भाषाओं में ट्रांसलेशन और उनका इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया, जिससे टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस और भी आसान किया जा सकता है।
एक साथ दो फुल-टाइम डिग्री कर सकेंगे
अप्रैल 2022 में यूजीसी ने दिशा-निर्देशों की घोषणा की थी, जो छात्रों को फिजिकल, ऑनलाइन या कॉम्बिनेशन मोड में एक साथ दो फुल-टाइम डिग्री करने की अनुमति देते हैं। यह निर्णय नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, 2020 के हिसाब से था। छात्र फिजिकल मोड में दो फुल टाइम एकेडमिक प्रोग्राम कर सकते हैं, बशर्ते कि एक प्रोग्राम के लिए कक्षा का समय दूसरे प्रोग्राम के कक्षा समय के साथ ओवरलैप न हो।
इसके अलावा, छात्र दो एकेडमिक प्रोग्राम कर सकते हैं, एक फुल-टाइम फिजिकल मोड में और दूसरा ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग/ऑनलाइन मोड में; या एक साथ दोनों ऑनलाइन मोड में। हालांकि, ये दिशा-निर्देश सभी विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य नहीं हैं, और उन्हें लागू करने का निर्णय विश्वविद्यालयों पर निर्भर है।
फर्जी विश्वविद्यालयों के नामों का किया खुलासा
अगस्त 2022 में यूजीसी ने एक ट्वीट कर 21 'फर्जी' विश्वविद्यालयों की एक सूची जारी की थी, जो दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश में स्थित थे। यूजीसी ने अपने नोटिस में कहा कि कहा कि ये "सेल्फ-स्टाइल्ड, अनरिकॉग्नाइज्ड संस्थान" किसी भी डिग्री प्रदान करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
बता दें कि इन 21 फर्जी विश्वविद्यालयों में 8 दिल्ली, 1 कर्नाटक, 1 केरल, 1 महाराष्ट्र, 2 पश्चिम बंगाल, 4 उत्तर प्रदेश, 2 ओडिशा, 1 पुडुचेरी और 1 आंध्र प्रदेश का विश्वविद्यालय शामिल था। इन फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, सेंट जॉन्स यूनिवर्सिटी, गांधी हिंदी विद्यापीठ, भारतीय शिक्षा परिषद, आदि कई नाम शामिल थे।
विदेशी विश्वविद्यालय भारत में खोल सकेंगे कैंपस
जनवरी 2023 में यूजीसी ने कहा कि विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस सेट-अप कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने के लिए उन्हें यूजीसी की मंजूरी की आवश्यकता होगी। यूजीसी ने विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए भारत में अपने कैंपस सेट-अप करने के लिए नियमों की घोषणा भी कर दी है।
यूजीसी के इस कदम का मकसद देश में फॉरेन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट (एफएचईआई) के प्रवेश को आसान बनाना और भारत में हायर एजुकेशन को एक अंतरराष्ट्रीय मुकाम पर पहुंचना है। भारत में एक कैंपस सेट-अप करने के लिए, विदेशी संस्थानों को वैश्विक रैंकिंग में टॉप 500 में स्थान प्राप्त करना आवश्यक है। ऐसे कई सारे नियमों की एक सूची यूजीसी जारी कर चुका है।
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