नवरात्रि में 9 दिन के व्रत सेहत के लिये अच्छे भी, बुरे भी
नवरात्रि, जोकि नौ दिनों तक चलने वाला हिंदओं का एक त्यौहार है, पूर्ण भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। तमाम लोग पूरे नौ दिन का व्रत रखते हैं। हो सकता है उनमें आप भी हों। लेकिन क्या कभी आपने व्रत से होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में सोचा है? अगर नहीं, तो आज ही सोचिये।
खैर इसके लिये आपको ज्यादा दिमाग दौड़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि हम आपके लिये वो बातें यहां लाये हैं जो विशेषज्ञ ने व्रत के संबंध में बतायी। हमने इस संबंध में आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लैप्रोस्कोपी अस्पताल समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. भीम सेन बंसल से बात की।
उन्होंने कहा, "हमारा शरीर भोजन को पचाने के लिए काफी ऊर्जा का का उपयोग करता है, और उपवास के समय यही ऊर्जा अन्य कामों के लिए उपयोग हो जाती है। उपवास की अवस्था में, हमारा शरीर ऊर्जा के लिए उपयोग कर लिए गए या अवशेष के रूप में बाधित मृत कोशिकाओं, क्षतिग्रस्त ऊतकों, वसा जमा, फोड़े-फुंसियो (निसरण) को हटाता है। इन अवरोधों का उन्मूलन प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता को पुनर्स्थापित करता है तथा चयापचय की प्रक्रिया को इष्टतम अवस्था की ओर ले जाता है।"
डा. बंसल ने बताया, "उपवास अच्छे पाचन एवं उन्मूलन को पुनर्स्थापित करता है, तथा क्रमिक वृत्तों में सिकुड़ने की प्रक्रिया को भी तेज करता है। उपवास पाचन अंगों को गहन शारीरिक आराम की अनुमति देता है, तथा बची हुई ऊर्जा आत्म चिकित्सा और आत्म मरम्मत के कार्य में खपत होती है। अवरोधों को नष्ट करके, सफाई करके, विषहरण, तथा आंतों, रक्त, और कोशिकाओं को शुद्ध करके, हम हमारी बहुत शारीरिक बीमारियों से छुटकारा पाते हैं तथा हमारी ऊर्जा शक्ति भी बढ़ती है। उपवास ना केवल अवरोधों को हटाता है तथा शरीर को स्वयं स्वस्थ होने में मदद करता है, अपितु यह कायाकल्प करने के साथ जीवन (उम्र) का विस्तार भी करता है। इन परिणामी लाभों का आपके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर स्थायी प्रभाव हो सकता है।"
गुर्दों से संबंधित रोग लगने का खतरा
डॉ. बंसल ने कहा, "उपवास के दौरान कुछ सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि यह आपके गुर्दों को प्रभावित कर सकता है तथा यह गुर्दे की पथरी का कारण भी बन सकता है। हमारा मूत्र कैल्शियम ऑक्सेलेट, यूरिक एसिड, सिस्टीन, या ग्जैंथीन जैसे लवणों को वहन करता है। पर्याप्त मूत्र ना होने पर या मात्रा की असामान्य रूप से उच्चता होने पर क्रिस्टल का गठन करने वाले लवणों की उपस्थिति होने पर ये लवण अत्यंत गाढ़े हो सकते हैं। नमक की एकाग्रता उस स्तर पर पहुँच जाती है जबकि उसमें और कुछ भी घुल नहीं सकता है, तब ये लवण क्रिस्टल का निर्माण करते हैं।
इस प्रकार, इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक हो जाता है। इसलिए, इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए हमें पर्याप्त पानी (तरल पदार्थ) पीना चाहिए ताकि कैल्शियम तथा इस तरह के संबद्ध पोषक तत्व जमा ना हो सकें। ऐसी समस्याओं से बचने के रूप में हम नींबू पानी, अनानास का रस, नारियल पानी, विटामिन ए में युक्त फल, आदि भी ले सकते हैं। इसके अलावा, व्यक्ति को बहुत अधिक चाय या कॉफी, बर्फी या लड्डू जैसी मिठाइयां आदि लेने से बचना चाहिए। ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनका हमें ध्यान रखना चाहिए, तभी जाकर हम नवरात्रों को पूर्ण स्वभाव (मूड) और अच्छे स्वास्थ्य के साथ मना सकते हैं।"
क्या करें गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं
डॉ. बंसल ने यह भी कहा कि, "उपवास रखते हुए कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों द्वारा अतिरिक्त सावधानियां ली जानी चाहिए। इसमें वो लोग शामिल हैं, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, या रक्ताल्पता से पीडि़त हों या जिनका हाल ही में कोई ऑपरेशन हुआ हो। गुर्दे, हृदय, जिगर या फेफड़ों से संबंधित दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को झेल रहे व्यक्तियों को केवल उनके डॉक्टरों से सहमति के बाद ही व्रत का पालन करना चाहिए।"
उन्होंने आगे बताया, "गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी आलू, खीर, साबुदाना, पकोड़े जैसे विशिष्ट नवरात्र भोजन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये भोजन मोटा कर सकते हैं साथ ही जटिलताएं भी उत्पन्न कर सकते हैं। यही कारण है कि, इन सभी की अति से सख्ती से बचा जाना चाहिए। इसके अलावा, लम्बे अन्तराल पर भोजन लेना उचित नहीं है, बल्कि वास्तव में तो कम अंतराल में थोड़े-थोड़े भोजन सेवन किया जाना चाहिए। उच्च रक्तचाप से ग्रस्त रोगियों को नमक की खपत के स्तर पर नियंत्रण रखना चाहिए। मैं अपने देश के सभी लोगों के लिए एक बहुत ही मंगलमय और स्वस्थ नवरात्र उत्सव की कामना करता हूँ।"
डायट मंत्रा के क्लीनिक प्रबंधक श्री सचिन सिंह व्रत के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डाला। वो सावधानियां आप स्लाइडर में पढ़ सकते हैं।

लंबे चक्र से बचें
भोजन के समय के बीच लंबें ब्रेक से बचें- नवरात्रों में हर थोड़ी देर में थोड़ा-थोड़ा खाते रहना चाहिए। यह शरीर का चयापचय दर बनाएं रखनें में मद्द करता है।

पूड़ी-कचौड़ी
पूड़ी पकौड़ी जैसे तले व्यंजनों से बचें- कम तेल में बनें व्यंजन जैसे पराठा या रोटी जैसे विकल्पों को चुनें।

हरी सब्जियां
इन नौ दिनों में अपनें आहार में हरी सब्जियों को शामिल करें। कद्दू, लौकी, ककड़ी, टमाटर खाएं क्योंकि ये ना केवल इनमें कैलोरी कम है बल्कि यह विटामिन का एक अच्छा स्रोत है।

हलवा-खीर
हलवा और खीर जैसी मिठाईं से बचें क्योंकि इनमें कैलोरी की मात्रा अधिक होती है।

जूस पीयें
फल और जूस जैसे नींबू पानी, नारियल पानी आदि हमारे उपवास के आहार के मुख्य पदार्थ होनें चाहिए।

कॉलेस्ट्रॉल वाले लोग
ये ना केवल विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालती है बल्कि उनके एंटीआक्सीडेंट रचना की वजह से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करनें में मद्द करती है।

दूध-घी
फुल क्रीम दूध का प्रयोग कम करें- इसके जगह स्किम्ड दूध, दही जैसे स्वस्थ विकल्पों का चयन करें। छांछ में धनिया और अदरक डाल के खाएं, इससे पेट भर जाता है।

नो देशी घी
आटा गूंथनें में तेल की जगह दही का प्रयोग करें। देशी घी के प्रयोग से भी बचें।

हर्बल चाय लें
हर्बल टी या ग्रीन टी एक बहुत अच्छा विकल्प हो सकता है। ग्रीन टी ना केवल वज़न कम करने में मद्द करता है परंतु त्वचा और पाचन के लिए भी बहुत अच्छा है।

आलू का सेवन
इन नौ दिनों में सिर्फ तीन दिन करें आलू का सेवन। इसके अलावा, आलू को ना तलें क्योंकि इससे खाने में अनावश्यक रूप से कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। तेल में आलू भाजी बनाने की बजाय, आलू उबाल कर उसमें हरी धनियां की चटपटी चटनी लगा के खाएं।

साबूदाना
साबूदाना को किसी भी व्यंजन में डालनें से पहले उसे 3-4 घंटें पानी में भिगों दें जिससे इसका स्टार्च निकल जाए।

सामक के चावल
सामक के चावल का उपवास के दौरान घिया पुलाव, चीला, इडली और डोसा बनानें में प्रयोग किया जा सकता है।

माइक्रोवेव
खाना पकानें में तेल की खपत कम करने के लिए माइक्रोवेव का प्रयोग करें।

व्यायाम
इन शुभ दिनों में हमें अपनें खानें की मात्रा पर नियंत्रण करना नही भूलना चाहिए और साथ ही अपने व्यायाम दिनचर्या का पालन करना चाहिए।

सत्संग व नृत्य करें
कलौरी कम करनें के लिए सत्संग में नृत्य करना एक अच्छा विकल्प हो सकता हैं।












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