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Swami Vivekananda : 39 साल में दुनिया को अलविदा कहने वाले स्वामी विवेकानंद को थीं 31 बीमारियां!

किताब 'द मॉन्क ऐज मैन' के मुताबिक स्वामी विवेकानंद मात्र 39 साल की उम्र में करीब 31 बीमारियों से ग्रसित थे।

Swami Vivekananda :

Swami Vivekananda Jayanti 2023 (राष्ट्रीय युवा दिवस) : आज देश के महान दार्शनिक, समाजसुधारक और पथ प्रदर्शक स्वामी विवेकानंद का जन्मदिवस है। पूरा देश इसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाता है। साल 1985 से ये सिलसिला चला आ रहा है। स्वामी विवेकानंद के विचार ही उन्हें दूसरों से अलग करते हैं। बहुत ही छोटी सी उम्र में विवेकानंद ने ज्ञान का अथाह भंडार अपने अंदर समाहित कर दिया था लेकिन उन्होंने बहुत जल्द दुनिया को भी अलविदा कह दिया था।

Swami Vivekananda :

मात्र 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद ने दुनिया से विदाई ले ली थी। चार जुलाई 1902 को स्वामी विवेकानंद का निधन हो गया था लेकिन कुछ सालों पहले मशहूर बांग्ला लेखक शंकर ने अपनी किताब 'द मॉन्क ऐज मैन' ने उनके निधन की जो वजह बताई वो काफी चौंकाने वाली थी। उनके हिसाब से स्वामी विवेकानंद मात्र 39 साल की उम्र में ही करीब 31 बीमारियों से ग्रसित थे। उन्हें लीवर, टीबी, मधुमेह, दिल, किडनी से जुड़ी बीमारियां थीं, जिनका उस वक्त समुचित इलाज नहीं था और इसी वजह से स्वामी ने बहुत ही कम उम्र में दुनिया से विदाई ले ली।

'शरियाम ब्याधिकमंदिरम'

लेखक शंकर ने अपनी किताब में विवेकानंद की बीमारियों का जिक्र उस कथन से किया है जिसमें उन्होंने कहा था 'शरियाम ब्याधिकमंदिरम', यानी कि शरीर बीमारियों का घर होता है। उन्होंने लिखा है कि स्वामी विवेकानंद के शारीरिक स्वास्थ्य की गिरावट का कारण उनका कम भोजन करना, तनाव अधिक लेना और पर्याप्त आराम नहीं करना रहा। स्वामी विवेकानंद ने 29 मई, 1897 को शशिभूषण घोष को पत्र लिखकर अपने गिरते स्वास्थ्य के बारे में बताया था, उन्होंने अपने पत्र में नींद ना आने का भी जिक्र किया है।

बच्चों की फिटनेस बहुत जरूरी

विवेकानंद ने उस वक्त के हिसाब से अपना इलाज किया लेकिन वो उसमें सफल नहीं हो पाए थे। लेखक के मुताबिक यही कारण रहा कि उन्होंने बच्चों के शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने पर जोर दिया था। उन्होंने हमेशा कहा कि बच्चों को घर से बाहर जाकर क्रिकेट-फुटबॉल खेलना बहुत जरूरी है, इससे वो शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से फिट रहेंगे।

Swami Vivekananda :

लेखक शंकर ने ये भी लिखा है कि अपनी मृत्यु के बारे में स्वामी विवेकानंद को पहले से आभास था और इसी वजह से उन्होंने अपना मिस्र दौरा बीच में ही रोक दिया था। उन्होंने अपने समीप रहने वाले लोगों को कह दिया था कि उनकी चार जुलाई को मृत्यु हो जाएगी। वो अपने अंतिम समय में अपने देश और गुरुओं के बीच रहना चाहते थे इसलिए वो भारत वापस आ गए थे।

पीएम मोदी ने किया नमन

आपको बता दें कि मां भारती के इस महान सपूत को आज पूरा देश याद कर रहा है। स्वयं पीएम मोदी ने उन्हें याद करते हुए ट्वीट किया है कि 'स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर सादर नमन। उनका जीवन राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिकता और कर्मठता के लिए सदैव प्रेरित करता है। उनके महान विचार और आदर्श देशवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।'

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