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Technology Day: आज ही के दिन हुआ था परमाणु बम और स्वदेशी विमान ‘हंसा- 3’ का सफल परीक्षण

हर साल 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। सरकार ने ‘टेक्नोलॉजी विजन 2035’ नाम से एक रूपरेखा भी तैयार की है जिसमें यह लक्ष्य रखा गया है कि 2035 तक विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक के जरिए दक्षता लाई जाएगी।

National Technology Day 2023 history of today Successful test of nuclear bomb and indigenous aircraft Hansa-3

Technology Day: यह दिवस पहली बार 11 मई 1999 को मनाया गया था। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिकों, भारतीय इंजीनियरों और भारत में तकनीकी उपलब्धियों का स्मरण करना है। आज ही के दिन भारत ने पोखरण में परमाणु बमों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। इस परीक्षण को ऑपरेशन शक्ति के रूप में जाना जाता है। इस मिशन का नेतृत्व तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। इसके साथ ही आज ही के दिन भारत ने त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। तो वहीं पहले स्वदेशी विमान 'हंसा- 3' का परीक्षण भी आज ही के दिन किया गया था।

2023 में इस दिवस की थीम

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2023 की थीम "एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण" है। जिसका अंग्रेजी में मतलब "Integrated Approach in Science & Technology for Sustainable Future" होता है। आज का दिन इस बात का प्रमाण है कि समर्पण, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी में ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकते हैं। आज का यह दिन हमें एहसास दिलाता है कि टेक्नोलॉजी हमारे लिए कई कामों को आसान बनाती है। और टेक्नोलॉजी ही भारत का भविष्य और अधिक चमकाएगी।

दोनों ही पोखरण परीक्षण में 'बुद्ध पूर्णिमा'

आज के दिन ही पोखरण में परमाणु परीक्षण हुआ था। अब इसे संयोग कहें या भारत का बुद्ध के प्रति प्रेम, पर क्या आप जानते हैं कि पोखरण में परमाणु बमों का परीक्षण 1974 और 1998 में किया गया तो दोनों ही दिन बुद्ध पूर्णिमा थी। हालांकि दोनों समय में सरकारें अलग अलग थी। 1974 में इस परमाणु परीक्षण का कोड नाम स्माइलिंग बुद्धा रखा गया था। वहीं दूसरी बार 1998 में इस परीक्षण का नाम ऑपरेशन शक्ति रखा गया था। हालांकि इन परमाणु परीक्षणों के बाद जापान और अमेरिका सहित कई बड़े प्रमुख देशों ने भारत पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगा दिए थे।

आलोचना होने पर जमकर बरसे थे अटल

परमाणु परीक्षण की आलोचना होने पर अटल जी ने सदन में भाषण दिया था। उस भाषण में कहा कि ये आश्चर्य है कि परमाणु परीक्षण की आलोचना की गई। पूछा गया देश के सामने कौन सा खतरा था। मैं 1974 में सदन में था। जब श्रीमति इंदिरा गांधी के नेतृत्व में परमाणु परीक्षण किया गया था। हमने उसका स्वागत किया था। प्रतिपक्ष में थे फिर भी स्वागत किया था। क्योंकि देश की रक्षा के लिए ये किया गया था। उस समय कौन सा खतरा था। क्या आत्मरक्षा की तैयारी तभी होगी जब खतरा होगा। अगर तैयारी पहले से हो तो ये अच्छी बात है, जो खतरा भविष्य में आने वाला होगा वह भी दूर हो जाएगा। और इसलिए हमने परमाणु परीक्षण करने का फैसला लिया। यह कोई छिपी हुई बात नहीं थी, कोई रहस्य नहीं था।

अटल जी ने नरसिम्हा राव को दिया था परमाणु परीक्षण का श्रेय

2004 में अटल जी अपना जन्मदिन मनाने तीन दिवसीय प्रवास पर ग्वालियर गए थे। यहां एक कार्यक्रम में अटल जी ने परमाणु परीक्षण से जुड़ी एक ऐसी बात बताई जिससे पूरा देश चकित हो गया। अटलजी ने अपने संबोधन में कहा कि 1996 में जब मैं पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहा था, उस समय पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव मेरे पास आए और मेरे हाथ में एक कागज पकड़ाया। उस कागज पर लिखा हुआ था 'बम पूरी तरह तैयार हो चुका है, इसको सिर्फ फोड़ना है, पीछे नहीं हटना है।' कार्यक्रम में नरसिम्हा राव का जिक्र इसलिए किया गया क्योंकि आयोजन से तीन दिन पूर्व 23 दिसंबर 2004 को पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव का निधन हुआ था। और अटल जी उनकी याद में बोल रहे थे। हालांकि प्रधानमंत्री के रूप में अटलजी को परमाणु बम का परीक्षण करवाने का मौका अपने पहले कार्यकाल में 13 दिन में ही सरकार गिर जाने के कारण नहीं मिला। लेकिन अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही 11 मई 1998 को उन्होंने परमाणु परीक्षण करवा कर पूरी दुनिया को अचंभित कर दिया।

तकनीकी क्षेत्र में भारत

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    इंडियन साइंस एंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंडस्ट्री रिपोर्ट 2019 में बताया गया है कि औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की विभिन्न प्रयोगशालाओं में अनेकों शोधकार्य किए जा रहे हैं। सुपरकंप्यूटर बनाने में भी भारत इस तकनीक में दुनिया में चौथे स्थान स्थान पर है। हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा आईटी हब है। इसके साथ ही आपको बता दें कि भारत का देसी जीपीएस यानी 'नाविक' सात सैटेलाइट वाला एक रीजनल नेविगेशन सिस्टम है। जिसे इसरो द्वारा विकसित किया गया है। भारत में तकनीक के विकास को रफ्तार देने के लिए शोध के क्षेत्र में CSIR, DRDO, ICAR, ISRO, ICMR, C-DAC, NDRI, IIT, IISc जैसे कई संस्थान काम कर रहे हैं। इसके साथ ही आपको बता दें कि भारत सरकार ने 'टेक्नोलॉजी विजन 2035' नाम से एक रूपरेखा भी तैयार की है जिसमें यह लक्ष्य रखा गया है कि 2035 तक विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक के जरिए दक्षता लाई जाएगी।

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