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Munshi Premchand: मुंशी प्रेमचंद.. एक लेखक का नहीं बल्कि एक साधना का नाम है...

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    नई दिल्ली। आज यानी 31 जुलाई को प्रेमचंद की 138वीं जयंती है, आम लोगों के बीच प्रेमचंद कहानीकार और उपन्यासकार के रूप में ही अधिक प्रसिद्ध हैं। साहित्य और प्रेमचंद में रुचि रखने वालों के अलावा बहुत कम ही लोग यह जानते हैं कि प्रेमचंद ने कई वैचारिक लेख भी लिखे हैं। प्रेमचंद केवल एक लेखक का नाम नहीं है, बल्कि वो एक विचार और साधना का नाम है, जिनके लिखा एक-एक शब्द दिलों पर दस्तक देता है और कण-कण में रोमांच भर देता है। 

    चलिए एक नजर डालते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातों पर

    प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय

    प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय

    मुंशी प्रेमचंद का जन्म साल 1880 में 31 जुलाई को वाराणसी के एक छोटे से गांव लमही में हुआ था। मुंशी प्रेमचंद ने साल 1936 में अपना अंतिम उपन्यास गोदान लिखा। जो काफी चर्चित रहा। प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय था।

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     प्रेमचंद ने हिंदी से पहले उर्दू में लिखना शुरु किया था...

    प्रेमचंद ने हिंदी से पहले उर्दू में लिखना शुरु किया था...

    बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रेमचंद ने हिंदी से पहले उर्दू में लिखना शुरु किया था। जब धनपत आठ वर्ष के थे तब बीमारी के कारण इनकी मां का देहांत हो गया। इनका विवाह भी 15 साल की आयु में कर दिया गया था, मगर कुछ समय बाद ही उनकी पत्नी का देहांत हो गया।कुछ समय बाद उन्होंने बनारस के बाद चुनार के स्कूल में शिक्षक की नौकरी की, साथ ही बीए की पढ़ाई भी। बाद में उन्होंने एक बाल विधवा शिवरानी देवी से विवाह किया, जिन्होंने प्रेमचंद की जीवनी लिखी थी।

    कलम के जादूगर मुंशी प्रेमचंद

    कलम के जादूगर मुंशी प्रेमचंद

    कलम के जादूगर मुंशी प्रेमचंद ने अपना पहला साहित्यिक काम गोरखपुर से उर्दू में शुरू किया था। सोज-ए-वतन उनकी पहली रचना थी। जिस रावत पाठशाला में उन्‍होंने प्राथमिक शिक्षा ली थी, वहीं पर उनकी पहली पोस्टिंग शिक्षक के रूप मे हुई। उसी दौरान वह बालेमियां मैदान में महात्‍मा गांधी का भाषण सुनने गए। महात्‍मा गांधी के ओजस्‍वी भाषण का उन पर ऐसा प्रभाव पड़ा कि उन्‍होंने अंग्रेजी हुकूमत में सरकारी नौकरी से त्‍यागपत्र दे दिया और स्‍वतंत्र लेखन करने लगे।

    एक नजर मुंशी प्रेमचंद की कहानियों एवं उपन्यास पर

    एक नजर मुंशी प्रेमचंद की कहानियों एवं उपन्यास पर

    • प्रेमचंद की चर्चित कहानियां : मंत्र, नशा, शतरंज के खिलाड़ी, पूस की रात, आत्माराम, बूढ़ी काकी, बड़े भाईसाहब, बड़े घर की बेटी, कफन, उधार की घड़ी, नमक का दरोगा, जुर्माना आदि।
    • प्रेमचंद की चर्चित उपन्यास: गबन, बाजार-ए-हुस्न (उर्दू में), सेवा सदन, गोदान, कर्मभूमि, कायाकल्प, मनोरमा, निर्मला, प्रतिज्ञा प्रेमाश्रम, रंगभूमि, वरदान, प्रेमा आदि।

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    English summary
    o celebrate noted Hindi playwright, author and essayist Munshi Premchand’s 138th birth anniversary, a drama academy will be staging noted short stories by him as a part of a theatre festival.

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