UP Assembly Election 2017: तो क्या बेटे से जीत की होड़ में यूपी हार रहे हैं 'मुलायम' ?

लखनऊ। रविवार को मैनपुरी में शिवपाल यादव द्वारा दिए गए बयान 'अगर सपाइयों ने उत्तर प्रदेश में जमीन कब्जाना बंद नहीं किया तो वह इस्तीफा दे देंगे' इसके बाद सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कटघरे में खड़ा कर दिया।

लेकिन सवाल यह था कि आखिर मुलायम की अखिलेश से नाराजगी क्या है? क्या वाकई परिवार के बीच तनातनी को जनता समझकर भी नजरंदाज कर रही है ? या अंतर्कलह के नतीजे देखकर समाजवादी पार्टी का खेमा सन्न होने वाला है?

मुलायम की धमकी मुलायम नहीं

शिवपाल यादव के इस बयान पर मुलायम ने स्वतंत्रता दिवस के दिन झंडारोहण समारोह में कहा कि पार्टी में शिवपाल के साथ षडयंत्र हो रहा है। उन्होंने यहां तक कह डाला कि यदि शिवपाल ने सरकार छोड़ी तो सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा हो जाएगी। उन्होंने यहां तक चेतावनी दी कि यदि मैं खड़ा हो गया तब सारे चापलूस भाग जाएंगे और सरकार की ऐसी-तैसी हो जाएगी।'

कहीं हकीकत कुछ ऐसी तो नहीं

बीते कुछ माह पहले मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने कथित तौर पर एक टिप्पणी की थी, जिसकी वजह थी कौमी एकता दल का सपा में विलय। अफजाल ने मुलायम और अखि‍लेश पर एक साथ निशाना साधते हुए कहा कि मुलायम को न तो अखि‍लेश के सिद्धां‍तों की परवाह है और न ही अखि‍लेश को अपने पिता के निर्णयों का सम्मान करने की ही फिक्र है। कहीं न कहीं उसमें से कई बातों पर से तो धीरे-धीरे पर्दा उठना शुरू भी हो गया है।

घटते कद को लेकर परेशान थे शिवपाल

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवपाल की नाराजगी अब साफ तौर पर दिख रही है। मानना है कि शिवपाल ये कयास लगा रहे थे कि अब उन्हें सीएम बनाया जायेगा लेकिन इसके इतर अखिलेश यादव को सीएम बना दिया गया।

डीपी यादव को पार्टी में लाने के प्रयास पर भी अखिलेश ने पानी फेरा

वहीं कुछ वक्त गुजरा नहीं कि शिवपाल द्वारा बुलंदशहर के डीपी यादव को पार्टी में लाने के प्रयास पर भी अखिलेश ने पानी फेर दिया। जिसके बाद शिवपाल सीएम अखिलेश की लोकप्रियता, युवा चेहरे के आगे खुद के तमाम ख्वाबों को मरता हुआ, और राजनीतिक कद को घटता हुआ पा रहे थे।

खराब छवि वालों से दूर रहना चाहते हैं अखिलेश

सूबे के मौजूदा मुखिया और शिवपाल के बीच चल रहे अंर्तविरोध की तमाम जड़ें तब अचानक से सुलग पड़ीं जब कौमी एकता दल के विलय की शिवपाल ने घोषणा की। जिसमें अफजाल अंसारी और अन्य नेता भी मौजूद थे। पर, एक दिन जैसे ही बीता वैसे ही सीएम अखिलेश ने इस विलय पर सवाल खड़े कर दिये। जिससे शिवपाल के मन में सवालों का ज्वार आना लाजिमी है। अखिलेश यहीं नहीं रूके बल्कि उन्होंने विलय प्रक्रिया तैयार करने को समर्थन दे रहे मंत्री बलराम सिंह यादव को बर्खास्त कर दिया।

अतीक अहमद पर भी भड़के थे सीएम

बीते कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता माने जाने वाले अतीक अहमद को सीएम अखिलेश द्वारा एक कार्यक्रम में धकेलते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसे देखकर लोगों ने इस बात का आंकलन शुरू कर दिया था कि सीएम अखिलेश किसी भी व्यक्ति जिसकी छवि से पार्टी पर नकारात्मक प्रभाव पड़े उसे कतई बख्शना चाहते।

सवाल कई पर जवाब नहीं

जी हां लोगों के जहन में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई अखिलेश यादव पार्टी की पुरानी परंपरा से इतर हटकर काम कर पाएंगे ? आजम खां का आने वाले वक्त में क्या होगा ? क्योंकि सपा को उनके बयानों की वजह से अच्छा-खासा खामियाजा भुगतना पड़ता है। मुलायम क्या अपने पुराने कुनबे को भूल पाएंगे ? क्योंकि सूबे की जनता का यह भी मानना है कि अखिलेश द्वारा दिया गया फैसला सिर्फ अखिलेश का नहीं होता बल्कि पुराने कढ़े नेताओं द्वारा गढ़ा गया एक विमर्श होता, जिस पर दबाव की वजह से उन्हें हामी भरनी ही पड़ती है।

सूबे की जनता में इस बात को लेकर असमंजस

ऐसे में एक निश्चित सी बात है कि सूबे की जनता में इस बात को लेकर भी असमंजस व्याप्त है कि अगर इसी तरह से सीएम अखिलेश पर परिवार हावी रहा तो वे सही ढंग से फिर से काम नहीं कर पाएंगे, जिससे माना जा रहा है कि सपा को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इन सबके इतर एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि इन तमाम बातों को ध्यान में रखकर क्या परिवार के बीच खाईयों में और अंतर आ जाएगा ? क्या मुलायम शिवपाल यादव पर दांव लगाने का विचार कर रहे हैं ? सवाल हैं जो पार्टियों के ऐलान के बाद ही शांत होंगे।

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