Most Wanted: अब किन मोस्ट वांटेड गैंगस्टर्स को लाना है भारत, क्या हैं प्रत्यर्पण के नियम
Most Wanted: दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की एक टीम मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्याकांड के कथित मुख्य साजिशकर्ताओं में एक गैंगस्टर सचिन थापन उर्फ सचिन बिश्नोई को अजरबैजान के बाकू से प्रत्यर्पित करवा कर बीते दिनों भारत वापस ले आई है। देश की जेल में कैद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भतीजे सचिन बिश्नोई के प्रत्यर्पण के बाद विदेशों में छिपे और कई मोस्ट वांटेड अपराधियों को भारत वापस लाने की तैयारी और कानूनी प्रक्रियाएं तेज हो गई हैं। इनमें न सिर्फ सिंगर मूसेवाला हत्याकांड के मास्टरमाइंड बल्कि कई सारे खालिस्तानी आतंकवादी भी शामिल हैं। ज्यादातर तो देश से फरार होकर छिपे हैं और भारत के खिलाफ साजिश रचने, आतंकी हरकतें करने, भारतीय युवाओं को बरगलाने और खालिस्तान जैसी आपराधिक मांगों के लिए जमसमर्थन और फंड जुटाने के गुपचुप मुहिम में लिप्त हैं।
भारतीय एजेंसियों ने तैयार की आतंकियों और गैंगस्टर्स की कुंडली
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अपने अभियान में पूरी ताकत से लगी हुई है। विदेशी जमीन पर पनाह लेकर भारत में अपराधिक वारदातों को ऑपरेट करने और दुनिया के कई भारत विरोधी देशों की शह पाकर भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने वाले गैंगस्टर और खालिस्तानी आतंकियों की कुंडली भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने तैयार कर रखी है। हालांकि ऐसे डोजियर्स कांफिडेंशियल होते हैं, मगर समय-समय पर एजेंसियां कुछ वांछित नामों को सार्वजनिक करती हैं।

इस साल अप्रैल महीने में केंद्र सरकार ने ऐसे 28 वांटेड गैंगस्टर्स की एक लिस्ट तैयार की थी। इनमें दूसरे देशों में छिपकर बैठे ऐसे खूंखार अपराधियों का नाम शामिल है जो भारत और भारतीय नागरिकों के खिलाफ आतंकी और आपराधिक साजिश बनाते और उस पर अमल करते हैं। इन पर भारत में हत्या, अवैध उगाही, रंगदारी, अपहरण, अपराधिक साजिश रचने और देश विरोधी गतिविधियों के आरोप हैं।
मोस्ट वांटेड लिस्ट में सबसे ऊपर गैंगस्टर गोल्डी बराड़
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय एजेंसियों की इस मोस्ट वांटेड लिस्ट के 28 गैंगस्टर्स में से 9 कनाडा और 5 गैंगस्टर्स अमेरिका में पनाह लिए हुए हैं। इनमें अमेरिका में छिपे गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह बराड़ उर्फ गोल्डी बराड़ का नाम सबसे ऊपर है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी बराड़ भी मूसेवाला हत्याकांड में वांटेड है। उस पर मशहूर फिल्म अभिनेता सलमान खान को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। पंजाब पुलिस के डोजियर में उसकी 5 अलग-अलग लुक वाली तस्वीरें हैं। पंजाब के फरीदकोट जिले में युवा कांग्रेस नेता गुरलाल सिंह पहलवान की हत्या में उसका नाम आया था। साल 2021 में पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ एक गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
पुलिस को 16 से ज्यादा मामलों में गोल्डी बराड़ की तलाश है। A+ कैटेगरी के गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को भारतीय कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया हुआ है। भारत सरकार के डोजियर में गोल्डी बराड़ के 12 करीबियों का पूरा खुलासा किया गया है। गोल्डी बराड़ के अलावा खालिस्तानी आतंकी हरजोत सिंह गिल, दरमनजीत सिंह उर्फ दरमन कहलों और अमृत बल भी अमेरिका में ही छिपकर भारत की जमीन पर अपने नापाक हरकतों को अंजाम देने की कोशिश में लगा रहता है।
अनमोल बिश्नोई उर्फ भानू और गौरव उर्फ लकी पटियाल की भी पुरजोर तलाश
गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई का भाई और सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में एक प्रमुख आरोपी अनमोल बिश्नोई उर्फ भानू भी भारतीय एजेंसियों की मोस्ट वांटेड की लिस्ट में शामिल है। मूसेवाला की हत्या के बाद फर्जी पासपोर्ट पर भारत से फरार होकर अमेरिका में छिपे गैंगस्टर भानू का अमेरिका में पंजाबी सिंगर करण औजला और शैरी मान के शो में शामिल होने और पार्टी में डांस करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद केन्या में उसे हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। हालांकि विदेश मंत्रालय की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई थी। भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने के अलावा हिंदी-पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री और कॉर्पोरेट वर्ल्ड से जुड़े लोगों की टारगेट किलिंग्स करने के आरोपी भानू भारतीय एजेंसियों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। इस मोस्ट वांटेड लिस्ट में तीसरे नंबर पर गौरव उर्फ लकी पटियाल का नाम है। वह आर्मेनिया से पंजाब में दविंदर बंबीहा गैंग को ऑपरेट करता है।
विदेश में छिपे टॉप-3 के अलावा भारतीय एजेंसी के रडार पर हैं ये मोस्ट वांटेड गैंगस्टर्स
विदेश में छिपे इन टॉप-3 गैंगस्टर्स के अलावा भारतीय एजेंसी के रडार पर सुखदुल सिंह उर्फ सूखा दुनेके, गोपिंदर सिंह उर्फ बाबा डल्ला, सतवीर सिंह वारिंग उर्फ सैम, स्नोवर ढिल्लन, लखबीर सिर्फ उर्फ लांडा, अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला, चरणजीत सिंह उर्फ रिंकू बिहला, रमनदपीप सिंह उर्फ रमन जज और गगनदीप सिंह उर्फ गगना हाथुर जैसे खालिस्तानी आतकियों का नाम है। इन सबके कनाडा के अलग-अलग इलाके में छुपे होने की आशंका है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रमजीत सिंह बराड़ उर्फ विक्की और कुलदीप सिंह उर्फ नवनशहरिया के अबूधाबी में छिपे होने की आशंका है। गैंगस्टर रोहित गोदारा के यूरोप में, जगजीत सिंह गांधी और जैकपाल सिंह उर्फ लाली धालीवाल के मलेशिया में, गैंगस्टर राजेश कुमार उर्फ सोनू खत्री के ब्राजील में छिपने, संदीप ग्रेवाल उर्फ बिल्ला के इंडोनेशिया में पनाह लेने, मनप्रीत सिंह उर्फ पीता के फिलीपींस में रहने, सुप्रीत सिंह उर्फ हैरी चराथा के जर्मनी में छिपे होने, गुरजंत सिंह उर्फ जनता के ऑस्ट्रेलिया में होने और रमनजीत सिंह उर्फ रोमी के हॉन्गकॉन्ग में छिपकर रहने की आशंका है। भारतीय एजेंसियों इन सबको पकड़ कर भारत लाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए प्रत्यर्पण संधियों का सहारा लिया जाता है।
क्या है प्रत्यर्पण? इसकी परिभाषा, पर्याय और प्रचलन का इतिहास
प्रत्यर्पण या एक्सट्रेडिक्शन (Extradition) दो लैटिन शब्द एक्स और ट्रेडिटम से बना है। आम तौर पर इसका अर्थ अपराधियों को उनके देश वापस भेजने से है। कानून शब्दावली में इसे "डिलीवरी आफ क्रिमिनल्स" "सरेंडर ऑफ फ्यूजिटिव" और "हैंड ओवर ऑफ फ्यूजीटिव" भी कहा जाता है। प्रत्यर्पण में दो राष्ट्र या राज्य शामिल होते हैं। पहला प्रादेशिक राज्य जहां चिन्हित अपराधी रह रहा होता है और दूसरा वापसी का अनुरोध करने वाला राज्य यानी जहां उस अपराधी ने वारदात को अंजाम दिया होता है। 1935 से 1990 तक कई प्रमुख कोशिशों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक प्रत्यर्पण के संबंध में कोई स्पष्ट बहुपक्षीय कानून निर्मित नहीं हो सका है। इसका मुख्य कारण प्रत्यर्पण की दोहरी प्रवृत्ति है क्योंकि प्रत्यर्पण एक साथ ही राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय प्रचलनो द्वारा संचालित होता है।
प्रत्यर्पण के सिद्धांत क्या हैं? इससे जुड़े क्षेत्रीय, द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय नियम और शर्तें
पहली बार साल 1935 में हावर्ड लॉ स्कूल द्वारा प्रत्यर्पण पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का ड्राफ्ट तैयार किया गया। 1949 में अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग द्वारा प्रत्यर्पण को संहिताबद्ध करने की कोशिश की गई और 1990 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एक मॉडल ट्रीटी ऑन एक्स्ट्राडिक्शन का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। इसके बावजूद अभी तक किसी भी प्रकार का एक सामान्य सामंजस्य स्थापित नहीं हो सका है। इसके मुकाबले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद कुछ क्षेत्रीय स्तर की प्रत्यर्पण संधियां कारगर है। इसमें 1957 का यूरोपियन कन्वेंशन आन एक्सट्रेडिक्शन और 1952 का अरब लीग प्रत्यर्पण समझौता महत्वपूर्ण है।
हमारे देश भारत में प्रत्यर्पण की स्थिति में प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 और प्रत्यर्पण संशोधन अधिनियम 1993 के प्रावधान लागू होते हैं। इन कानूनों के मुताबिक ही भारत में प्रत्यर्पण होता है। प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 की धारा 2 (डी) भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण से संबंधित विदेशी स्टेट के साथ भारत सरकार की संधि, समझौते या व्यवस्था के रूप में प्रत्यर्पण संधि को परिभाषित करती है।
प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक शर्तों में विशेषता का नियम या सिद्धांत और दोहरी अपराधिकता का नियम या सिद्धांत प्रमुख हैं। इसके अलावा सामान्य नियम के मुताबिक प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रार्थना आवश्यक है। वहीं, राजनैतिक अपराधियों, सैन्य अपराध, धार्मिक अपराध पर प्रत्यर्पण नहीं होता है। ये अलग बात है कि राजनीतिक अपराधियों को लेकर दुनिया के कई देशों और राज्यों में मतभेद है।












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