Rajasthan Jobs: देश का पहला प्रदेश बना राजस्थान जहां मनचलों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, थानों में लगेगी फोटो

Rajasthan Jobs: राजस्थान में बढ़ते महिला अपराध और दिन ब दिन बढ़ती छेड़खानी की घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने मनचलों पर लगाम लगाने का निर्णय लिया है। इस प्रकार का निर्णय लेने वाला राजस्थान संभावित पूरे देश में पहला राज्य है, जहां पर मनचलों को सरकारी नौकरी नहीं देने और पुलिस थाना में क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर की तर्ज पर फोटो लगाने का निर्णय लिया है। यही नहीं महिलाओं, लड़कियों और बच्चियों से छेड़छाड़ करने वालों के कैरेक्टर सर्टिफिकेट में भी इसका उल्लेख किया जाएगा। सर्टिफिकेट खराब होते ही सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।

पुलिस वेरिफिकेशन के नियमों में बदलाव, छेड़छाड़ को भी बड़ा अपराध माना

मनचलों को सरकारी नौकरी से वंचित करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस सत्यापन के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम के तहत जिनके खिलाफ छेड़छाड़ की एफआईआर दर्ज है, जांच चल रही है या कोर्ट के आदेश पर सजा मिल चुकी है, ऐसे लोगों के पुलिस सत्यापन में उनके चरित्र का उल्लेख किया जाएगा। इसी सत्यापन के आधार पर सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि छेड़छाड़ करने वाले लोग सरकारी नौकरी नहीं पा सकें। इसके अलावा मनचलों के नाम राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड को भी भेजे जाएंगे।

miscreants do not get government jobs in rajasthan Photos will be posted in police stations

पुलिस थाने में रखा जाएगा मनचलों का रिकॉर्ड

राज्य में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से पूर्व पुलिस की ओर से चरित्र सत्यापन का प्रावधान है। ऐसे उम्मीदवारों को नियुक्ति का पात्र नहीं माना जाएगा है, जिस पर महिला हिंसा, हत्या, धोखाधड़ी, रेप, किसी महिला की लज्जा भंग करने के अपराध में शामिल होने के मामले पुलिस और कोर्ट में विचाराधीन हो या फिर उस पर दोष सिद्ध हो गया हो।

आदेश में पुलिस अधिकारियों से यह कहा गया है कि नाबालिग लड़कियों और महिलाओं से छेड़छाड़, रेप के प्रयास, रेप के आरोपियों और मनचलों के खिलाफ केस दर्ज करना आवश्यक है। इन लोगों का रिकॉर्ड पुलिस थाने में रखा जाए, ताकि ऐसे व्यक्तियों के चरित्र को पुलिस वेरिफिकेशन में मार्क किया जा सके। इसके अलावा राज्य के सभी पुलिस थानों में ऐसे व्यक्तियों का रिकॉर्ड रखा जाए, जिनके खिलाफ लड़कियों एवं महिलाओं से छेड़छाड़, रेप का प्रयास या रेप के आरोप हों। ऐसे व्यक्तियों का राज्य सेवा के लिए या अन्य किसी कारण से चरित्र/पुलिस सत्यापन में उस रिकॉर्ड के आधार पर चरित्र को अंकित किया जाए। इस तरह के बदमाशों को चिह्नित कर पुलिस उनकी फोटो थाने में लगाएगी, साथ ही ऐसे लोगों का रिकॉर्ड आरपीएससीऔर सरकारी नौकरी लगाने वाली सभी एजेंसियों को भेजा जाएगा।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए चलाया विशेष अभियान

पुलिस मुख्यालय के आदेश पर राजस्थान में छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस तत्काल एक्शन ले रही हैं। छेड़छाड़ की घटना में पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और आरोपी को पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं। गत 10 दिन मे पुलिस ने ऐसे करीब 30 से ज्यादा मनचलों को गिरफ्तार कर उनका नाम सरकारी रिकॉर्ड में लिख चुकी हैं। जब भी ये लोग किसी भी विषय को लेकर पुलिस सत्यापन कराएंगे तो उसमें लिखा जाएगा कि ये लोग छेड़छाड़ की घटनाओं में पुलिस द्वारा पकड़े जा चुके हैं। छेड़छाड़ करने वाले लोगों को पुलिस रिकॉर्ड में एक अपराधी की तरह देखा जाएगा।

चुनावी साल में महिला अपराधों के खिलाफ सख्त छवि का संदेश

महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों को बीजेपी ने चुनावी साल में मुद्दा बना रखा है। राजस्थान महिला अपराधों के मामले में टॉप राज्यों में आता है। सीएम अशोक गहलोत अपराध के आंकड़े बढ़ने के पीछे अनिवार्य एफआईआर के प्रावधान को जिम्मेदार बताते हैं। चुनावी साल होने के कारण महिलाओं के खिलाफ अपराध बड़ा मुद्दा बन गए हैं। कोटड़ी, जोधपुर में हाल ही हुई रेप की कुछ घटनाओं की गूंज राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दी। ऐसे में गहलोत चुनावी साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में सख्त एक्शन लेने वाली सरकार की छवि बनाना चाहते हैं। छेड़छाड़ करने वालों को सरकारी नौकरी से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान भी इसी छवि की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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