'धर्म मनुष्य के लिए है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं', बाबा साहेब के यह 10 प्रेरणादायक विचार भर देते हैं जोश
Mahaparinirvan Diwas 2025: डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब अंबेडकर के नाम से जाना जाता है, भारत के संविधान निर्माता, और दलित अधिकारों के प्रबल समर्थक थे। उनकी पुण्यतिथि आज है, जिसे की पूरा भारत 'महापरिनिर्वाण दिवस' के रूप में मनाता है। उनके विचार आज भी लोगों को ऊर्जा से सराबोर कर देते हैं।
डॉ. अंबेडकर को हर चीज बहुत संघर्ष से हासिल हुई थी इसलिए उन्होंने हमेशा लोगों की शिक्षा पर जोर दिया था।वे मानते थे कि शिक्षा, संघर्ष और संगठन ही समाज में परिवर्तन लाने के मुख्य साधन हैं।

डॉ. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को एक दलित परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक असमानता और जाति प्रथा के खिलाफ संघर्ष किया। वे भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार थे और उन्होंने भारत को एक ऐसा संविधान दिया जो हर व्यक्ति को समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का अधिकार प्रदान करता है।
डॉ. अंबेडकर के विचार ( Baba Saheb Ambedkar slogan)
- शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।
- मैं उस धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है।
- किसी समाज की प्रगति का मापदंड उस समाज में महिलाओं की स्थिति है।
- अपने अधिकारों को प्राप्त करने का सबसे बड़ा साधन संघर्ष है।
- धर्म मनुष्य के लिए है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं
- इतिहास को भूलने वाले इतिहास नहीं बना सकते
- एक महान व्यक्ति हमेशा समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता है जबकि एक प्रतिष्ठित इंसान ऐसा नहीं करता है।
- पति-पत्नी के बीच का संबंध घनिष्ठ दोस्तों जैसा होना चाहिए।
- जीवन लम्बा होने के बजाय महान होना चाहिए।
- उदासीनता सबसे बुरी बीमारी है जो लोगों को प्रभावित कर सकती है।

डॉ. अंबेडकर के नारे
- "जाति तोड़ो, समाज जोड़ो।"
- "एकता में ही शक्ति है।"
- "जीवन लघु है, लेकिन उसके उद्देश्य ऊंचे होने चाहिए।"
- "हम सब एक हैं, और एक रहेंगे।"












Click it and Unblock the Notifications